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Hamirpur (Himachal) News: 25 करोड़ की थ्री टेस्ला एमआरआई मशीन तैयार, मरीजों को जांच सुविधा शुरू होने का इंतजार
Fri, 24 Jul 2026 01:03 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Fri, 24 Jul 2026 01:03 AM IST
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नवनिर्मित जोलसप्पड़ में मेडिकल कॉलेज हमीरपुर का भवन। संवाद।
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कमलेश रतन भारद्वाज
हमीरपुर। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक थ्री टेस्ला एमआरआई मशीन मरीजों के लिए शुरू होने का इंतजार कर रही है। जोलसप्पड़ स्थित नए मेडिकल कॉलेज परिसर में मशीन इंस्टाल हुए करीब दो सप्ताह बीत चुके हैं।
रेडियोलॉजी विभाग के स्टाफ का प्रशिक्षण भी पूरा हो गया है, लेकिन सरकार से संचालन की अंतिम मंजूरी नहीं मिलने और नए परिसर में अस्पताल की शिफ्टिंग लंबित होने के कारण अभी तक एमआरआई जांच शुरू नहीं हो पाई है।
मरीजों को जहां एमआरआई सुविधा शुरू होने का इंतजार है। वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रशासन सरकार की अनुमति का इंतजार कर रहा है। संभावना जताई जा रही है कि मंजूरी मिलने के बाद कॉलेज की पूरी शिफ्टिंग से पहले जोलसप्पड़ परिसर में मशीन की टेस्टिंग शुरू की जा सकती है।
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हालांकि, इसकी आधिकारिक सूचना अभी मेडिकल कॉलेज प्रशासन को नहीं मिली है, लेकिन अगले माह तक मशीन शुरू होने की उम्मीद है।
फिलहाल मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में केवल सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध है। एमआरआई जांच के लिए मरीजों को निजी लैब, डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा और आईजीएमसी शिमला का रुख करना पड़ता है। निजी संस्थानों में एमआरआई जांच के लिए मरीजों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
मेडिकल कॉलेज में थ्री टेस्ला एमआरआई सुविधा शुरू होने से हमीरपुर सहित आसपास के जिलों के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। यहां सरकारी दरों पर जांच उपलब्ध होगी। हालांकि, रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) के माध्यम से एमआरआई जांच की दरें अभी निर्धारित की जानी बाकी हैं। संवाद
निजी लैब की मशीनों से 10 गुना बेहतर है थ्री टेस्ला
नई थ्री टेस्ला एमआरआई मशीन पारंपरिक मशीनों की तुलना में कहीं अधिक उन्नत तकनीक से लैस है। जिले में निजी लैब में मौजूद एमआरआई मशीनों से भी यह दस गुना बेहतर है। इससे कम समय में उच्च गुणवत्ता वाली इमेज मिलती हैं, जिससे मस्तिष्क, रीढ़, हृदय, नसों, जोड़ों और कैंसर जैसी जटिल बीमारियों का अधिक सटीक और शुरुआती स्तर पर पता लगाया जा सकता है। बेहतर रिजॉल्यूशन के कारण चिकित्सकों को उपचार की योजना बनाने में भी आसानी होगी।
2018 से क्षेत्रीय अस्पताल में चल रहा मेडिकल कॉलेज
मेडिकल कॉलेज का संचालन वर्ष 2018 से क्षेत्रीय अस्पताल हमीरपुर परिसर से हो रहा है। जोलसप्पड़ में प्रशासनिक और अस्पताल ब्लॉक बनकर तैयार हैं, लेकिन भवन अभी तक मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को हैंडओवर नहीं किए गए हैं। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग का करीब 36 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित होने और फर्नीचर सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी नहीं होने से शिफ्टिंग लगातार टल रही है। अब शिफ्टिंग के साथ इस मशीन का संचालन भी अटक गया है।
कोट
थ्री टेस्ला एमआरआई मशीन इंस्टाल हो चुकी है और स्टाफ को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। सरकार से मंजूरी मिलते ही मरीजों की एमआरआई जांच शुरू कर दी जाएगी। -डॉ. रमेश भारती, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर
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हमीरपुर। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक थ्री टेस्ला एमआरआई मशीन मरीजों के लिए शुरू होने का इंतजार कर रही है। जोलसप्पड़ स्थित नए मेडिकल कॉलेज परिसर में मशीन इंस्टाल हुए करीब दो सप्ताह बीत चुके हैं।
रेडियोलॉजी विभाग के स्टाफ का प्रशिक्षण भी पूरा हो गया है, लेकिन सरकार से संचालन की अंतिम मंजूरी नहीं मिलने और नए परिसर में अस्पताल की शिफ्टिंग लंबित होने के कारण अभी तक एमआरआई जांच शुरू नहीं हो पाई है।
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मरीजों को जहां एमआरआई सुविधा शुरू होने का इंतजार है। वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रशासन सरकार की अनुमति का इंतजार कर रहा है। संभावना जताई जा रही है कि मंजूरी मिलने के बाद कॉलेज की पूरी शिफ्टिंग से पहले जोलसप्पड़ परिसर में मशीन की टेस्टिंग शुरू की जा सकती है।
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हालांकि, इसकी आधिकारिक सूचना अभी मेडिकल कॉलेज प्रशासन को नहीं मिली है, लेकिन अगले माह तक मशीन शुरू होने की उम्मीद है।
फिलहाल मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में केवल सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध है। एमआरआई जांच के लिए मरीजों को निजी लैब, डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा और आईजीएमसी शिमला का रुख करना पड़ता है। निजी संस्थानों में एमआरआई जांच के लिए मरीजों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
मेडिकल कॉलेज में थ्री टेस्ला एमआरआई सुविधा शुरू होने से हमीरपुर सहित आसपास के जिलों के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। यहां सरकारी दरों पर जांच उपलब्ध होगी। हालांकि, रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) के माध्यम से एमआरआई जांच की दरें अभी निर्धारित की जानी बाकी हैं। संवाद
निजी लैब की मशीनों से 10 गुना बेहतर है थ्री टेस्ला
नई थ्री टेस्ला एमआरआई मशीन पारंपरिक मशीनों की तुलना में कहीं अधिक उन्नत तकनीक से लैस है। जिले में निजी लैब में मौजूद एमआरआई मशीनों से भी यह दस गुना बेहतर है। इससे कम समय में उच्च गुणवत्ता वाली इमेज मिलती हैं, जिससे मस्तिष्क, रीढ़, हृदय, नसों, जोड़ों और कैंसर जैसी जटिल बीमारियों का अधिक सटीक और शुरुआती स्तर पर पता लगाया जा सकता है। बेहतर रिजॉल्यूशन के कारण चिकित्सकों को उपचार की योजना बनाने में भी आसानी होगी।
2018 से क्षेत्रीय अस्पताल में चल रहा मेडिकल कॉलेज
मेडिकल कॉलेज का संचालन वर्ष 2018 से क्षेत्रीय अस्पताल हमीरपुर परिसर से हो रहा है। जोलसप्पड़ में प्रशासनिक और अस्पताल ब्लॉक बनकर तैयार हैं, लेकिन भवन अभी तक मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को हैंडओवर नहीं किए गए हैं। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग का करीब 36 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित होने और फर्नीचर सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी नहीं होने से शिफ्टिंग लगातार टल रही है। अब शिफ्टिंग के साथ इस मशीन का संचालन भी अटक गया है।
कोट
थ्री टेस्ला एमआरआई मशीन इंस्टाल हो चुकी है और स्टाफ को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। सरकार से मंजूरी मिलते ही मरीजों की एमआरआई जांच शुरू कर दी जाएगी। -डॉ. रमेश भारती, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर