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Hamirpur (Himachal) News: जिले की 87 पंचायतें हुई टीबी मुक्त, सीटीडी ने दी मंजूरी
Sun, 09 Aug 2026 01:20 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 09 Aug 2026 01:20 AM IST
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हमीरपुर। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले की 87 पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित करने के दावों को केंद्रीय टीबी डिपार्टमेंट (सीटीडी) ने मंजूरी दे दी है। अब इन पंचायतों के प्रतिनिधियों को जल्द ही स्वर्ण, रजत और कांस्य श्रेणी के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग सम्मान समारोह से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने में जुटा है। विश्व टीबी दिवस 24 मार्च के बाद भी टीबी मुक्त पंचायतों की अंतिम सूची सार्वजनिक न होने से पंचायत स्तर पर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। केंद्रीय स्तर से स्वीकृति मिलने के बाद अब स्थिति स्पष्ट हो गई है।
जिले की 87 पंचायतों ने टीबी उन्मूलन के लिए निर्धारित मानकों को पूरा करते हुए यह उपलब्धि हासिल की है। टीबी मुक्त पंचायत बनने के लिए पंचायत के दावे की पहले स्वास्थ्य खंड स्तर पर जांच होती है।
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इसके बाद दावे जिला और राज्य स्तर से होते हुए राष्ट्रीय स्तर पर भेजे जाते हैं, जहां निर्धारित मानकों के आधार पर उनका गहन परीक्षण किया जाता है। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही पंचायत को टीबी मुक्त घोषित किया जाता है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार टीबी मुक्त पंचायत अभियान का उद्देश्य गांव-गांव में बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ समय पर जांच और उपचार सुनिश्चित करना है। साथ ही टीबी मरीजों को सामाजिक सहयोग उपलब्ध करवाने और बीमारी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
बॉक्स
टौणी देवी स्वास्थ्य खंड से 22 आवेदन
जिले में सबसे अधिक 22 पंचायतों ने टौणी देवी स्वास्थ्य खंड से दावा प्रस्तुत किया था। इसके अलावा बड़सर से 20, गलोड़ से 18, भोरंज से 11, नादौन से 10 और सुजानपुर से 6 पंचायतों ने टीबी मुक्त होने का दावा किया था। 10 पंचायतों ने स्वर्ण, 9 ने रजत और 68 पंचायतों ने कांस्य श्रेणी के लिए आवेदन किया था।
कोट
87 पंचायतों का टीबी मुक्त होना स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों के साथ ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी और जनजागरूकता की सफलता है। पंचायत स्तर पर लोगों की भागीदारी बढ़ने से टीबी की पहचान, उपचार और रोकथाम के प्रयासों को और मजबूती मिली है। -डॉ. सुनील वर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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स्वास्थ्य विभाग सम्मान समारोह से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने में जुटा है। विश्व टीबी दिवस 24 मार्च के बाद भी टीबी मुक्त पंचायतों की अंतिम सूची सार्वजनिक न होने से पंचायत स्तर पर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। केंद्रीय स्तर से स्वीकृति मिलने के बाद अब स्थिति स्पष्ट हो गई है।
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जिले की 87 पंचायतों ने टीबी उन्मूलन के लिए निर्धारित मानकों को पूरा करते हुए यह उपलब्धि हासिल की है। टीबी मुक्त पंचायत बनने के लिए पंचायत के दावे की पहले स्वास्थ्य खंड स्तर पर जांच होती है।
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इसके बाद दावे जिला और राज्य स्तर से होते हुए राष्ट्रीय स्तर पर भेजे जाते हैं, जहां निर्धारित मानकों के आधार पर उनका गहन परीक्षण किया जाता है। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही पंचायत को टीबी मुक्त घोषित किया जाता है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार टीबी मुक्त पंचायत अभियान का उद्देश्य गांव-गांव में बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ समय पर जांच और उपचार सुनिश्चित करना है। साथ ही टीबी मरीजों को सामाजिक सहयोग उपलब्ध करवाने और बीमारी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
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टौणी देवी स्वास्थ्य खंड से 22 आवेदन
जिले में सबसे अधिक 22 पंचायतों ने टौणी देवी स्वास्थ्य खंड से दावा प्रस्तुत किया था। इसके अलावा बड़सर से 20, गलोड़ से 18, भोरंज से 11, नादौन से 10 और सुजानपुर से 6 पंचायतों ने टीबी मुक्त होने का दावा किया था। 10 पंचायतों ने स्वर्ण, 9 ने रजत और 68 पंचायतों ने कांस्य श्रेणी के लिए आवेदन किया था।
कोट
87 पंचायतों का टीबी मुक्त होना स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों के साथ ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी और जनजागरूकता की सफलता है। पंचायत स्तर पर लोगों की भागीदारी बढ़ने से टीबी की पहचान, उपचार और रोकथाम के प्रयासों को और मजबूती मिली है। -डॉ. सुनील वर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी