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Hamirpur (Himachal) News: खौफ के साए में बचपन...मां!मैं अकेले स्कूल नहीं जाऊंगी, रास्ते में कुत्ते काट लेंगे
Sun, 28 Jun 2026 12:41 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 28 Jun 2026 12:41 AM IST
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पम्मी शर्मा , वार्ड नंबर दस राम नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। मां... मैं अब अकेले स्कूल नहीं जाऊंगी, रास्ते में कुत्ते काट लेंगे। बेटी के ये शब्द सुनकर वार्ड नंबर 10 निवासी पम्मी की चिंता और बढ़ गई। कुछ दिन पहले उनकी बेटी की सहेली पर लावारिस कुत्ते ने हमला कर दिया था।
इस हादसे के बाद बेटी का डर इतना बढ़ गया कि उसने अकेले स्कूल जाने से साफ इन्कार कर दिया। शुरुआत में परिजन खुद उसे स्कूल छोड़ने लगे, लेकिन यह व्यवस्था रोज संभव नहीं थी। आखिरकार मजबूरी में स्कूल बस की सुविधा लेनी पड़ी।
यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि हमीरपुर के सैकड़ों अभिभावकों की चिंता बन चुकी है। शहर में लावारिस कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि लोग बच्चों को अकेले घर से बाहर भेजने से भी डरने लगे हैं।
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शहर की कई गलियों में लावारिस कुत्तों के झुंड दिन-रात डेरा जमाए रहते हैं। सुबह सैर पर निकलने वाले लोगों से लेकर स्कूल जाने वाले बच्चों तक, हर कोई हाथ में डंडा लेकर निकलने को मजबूर है। सबसे अधिक परेशानी सुबह छह से सात बजे और शाम सात बजे के बाद होती है।
वहीं, रातभर कुत्तों के भौंकने से लोगों की नींद भी प्रभावित हो रही है। शुक्रवार को शहर में दो बच्चों को कुत्तों के काटने की घटनाओं ने अभिभावकों की चिंता और बढ़ा दी है। जिले में लगभग हर दूसरे-तीसरे दिन डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन लोगों का आरोप है कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि न्यायालय के निर्देशों के बावजूद लावारिस कुत्तों की बढ़ती संख्या पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पाया है। उनका आरोप है कि हमीरपुर नगर निगम के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
शहरवासियों का कहना है कि अब सड़क पर निकलना भी खतरे से खाली नहीं रह गया है। उन्होंने प्रशासन से आम जनता और मासूम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम जल्द उठाए जाने की मांग की है।
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कुत्तों के डर से बेटी को रोज स्कूल छोड़ने जाते थे। इससे हमारी दिनचर्या प्रभावित हो रही थी। अंत में बस लगाने का निर्णय लिया। बच्चों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने पड़ रहे हैं। गलियों में आठ से दस कुत्ते बैठे रहते हैं। -पम्मी शर्मा, निवासी वार्ड नंबर दस, नगर निगम हमीरपुर
सुबह-शाम कुत्तों के झुंड गलियों में घूमते या बैठे हुए देखे जा सकते हैं। कई बार सड़क पर कुत्ते लड़ते हुए दिखाई देते हैं। इसके कारण राहगीरों को गुजरना भी मुश्किल हो जाता है। इनका समाधान बहुत ही जरूरी है। -जसवंत शर्मा, निवासी वार्ड नंबर आठ, नगर निगम हमीरपुर
गलियों में कुत्तों का आतंक बहुत अधिक है। जिन गलियों से लोगों को गुजरना होता है, वहां पर कुत्तों ने डेरा जमाया होता है। लोगों की सुरक्षा राम भरोसे ही है। नगर निगम के अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। -अश्वनी कुमार, निवासी वार्ड नंबर दो, नगर निगम हमीरपुर
मैं अपने पोते के साथ रहता हूं। कई बार हाथ में डंडा लेकर चलना पड़ता है। रात को कुत्ते भौंकते रहते हैं, जिससे नींद भी प्रभावित होती है। अकेले चलना मुश्किल हो गया है। हमें हमेशा यही डर रहता है कि पता नहीं कब कहां से आक्रमण कर दें। -संत राम कमल, किरायेदार, वार्ड नंबर आठ, निवासी सरकाघाट
नगर निगम हमीरपुर के आयुक्त राकेश कुमार शर्मा से सवाल
प्रश्न : शहर में एक बार फिर कुत्तों द्वारा बच्चों को काटने की घटना सामने आई है, ऐसे में नगर निगम कैसे लोगों को राहत देगा।
उत्तर :
नगर निगम हमीरपुर पशुपालन विभाग के साथ मिलकर खतरनाक कुत्तों की सूची बना रहा है। शीघ्र ही ऐसे कुत्तों को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा।प्रश्न : नगर निगम हर बार दावे करता है कि कुत्तों से राहत दिलाई जाएगी, लेकिन धरातल पर कोई कदम नहीं उठाए जाते, क्यों?
उत्तर : नगर निगम के पास डॉग शेल्टर नहीं है। कुत्तों को दूसरी जगह छोड़ा जाता है, लेकिन यह वापस आ जाते हैं। कुत्तों की वैक्सीनेशन करवाई गई है।
प्रश्न : क्या अधिकारी केवल बंद कमरों में बैठकर रणनीति बनाने तक सीमित हैं।
उत्तर : ऐसा नहीं है। नगर निगम हर प्रकार से कोशिश कर रहा है कि लोगों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाएं। इसके लिए नगर निगम प्रयासरत है।
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हमीरपुर। मां... मैं अब अकेले स्कूल नहीं जाऊंगी, रास्ते में कुत्ते काट लेंगे। बेटी के ये शब्द सुनकर वार्ड नंबर 10 निवासी पम्मी की चिंता और बढ़ गई। कुछ दिन पहले उनकी बेटी की सहेली पर लावारिस कुत्ते ने हमला कर दिया था।
इस हादसे के बाद बेटी का डर इतना बढ़ गया कि उसने अकेले स्कूल जाने से साफ इन्कार कर दिया। शुरुआत में परिजन खुद उसे स्कूल छोड़ने लगे, लेकिन यह व्यवस्था रोज संभव नहीं थी। आखिरकार मजबूरी में स्कूल बस की सुविधा लेनी पड़ी।
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यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि हमीरपुर के सैकड़ों अभिभावकों की चिंता बन चुकी है। शहर में लावारिस कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि लोग बच्चों को अकेले घर से बाहर भेजने से भी डरने लगे हैं।
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शहर की कई गलियों में लावारिस कुत्तों के झुंड दिन-रात डेरा जमाए रहते हैं। सुबह सैर पर निकलने वाले लोगों से लेकर स्कूल जाने वाले बच्चों तक, हर कोई हाथ में डंडा लेकर निकलने को मजबूर है। सबसे अधिक परेशानी सुबह छह से सात बजे और शाम सात बजे के बाद होती है।
वहीं, रातभर कुत्तों के भौंकने से लोगों की नींद भी प्रभावित हो रही है। शुक्रवार को शहर में दो बच्चों को कुत्तों के काटने की घटनाओं ने अभिभावकों की चिंता और बढ़ा दी है। जिले में लगभग हर दूसरे-तीसरे दिन डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन लोगों का आरोप है कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि न्यायालय के निर्देशों के बावजूद लावारिस कुत्तों की बढ़ती संख्या पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पाया है। उनका आरोप है कि हमीरपुर नगर निगम के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
शहरवासियों का कहना है कि अब सड़क पर निकलना भी खतरे से खाली नहीं रह गया है। उन्होंने प्रशासन से आम जनता और मासूम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम जल्द उठाए जाने की मांग की है।
कुत्तों के डर से बेटी को रोज स्कूल छोड़ने जाते थे। इससे हमारी दिनचर्या प्रभावित हो रही थी। अंत में बस लगाने का निर्णय लिया। बच्चों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने पड़ रहे हैं। गलियों में आठ से दस कुत्ते बैठे रहते हैं। -पम्मी शर्मा, निवासी वार्ड नंबर दस, नगर निगम हमीरपुर
सुबह-शाम कुत्तों के झुंड गलियों में घूमते या बैठे हुए देखे जा सकते हैं। कई बार सड़क पर कुत्ते लड़ते हुए दिखाई देते हैं। इसके कारण राहगीरों को गुजरना भी मुश्किल हो जाता है। इनका समाधान बहुत ही जरूरी है। -जसवंत शर्मा, निवासी वार्ड नंबर आठ, नगर निगम हमीरपुर
गलियों में कुत्तों का आतंक बहुत अधिक है। जिन गलियों से लोगों को गुजरना होता है, वहां पर कुत्तों ने डेरा जमाया होता है। लोगों की सुरक्षा राम भरोसे ही है। नगर निगम के अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। -अश्वनी कुमार, निवासी वार्ड नंबर दो, नगर निगम हमीरपुर
मैं अपने पोते के साथ रहता हूं। कई बार हाथ में डंडा लेकर चलना पड़ता है। रात को कुत्ते भौंकते रहते हैं, जिससे नींद भी प्रभावित होती है। अकेले चलना मुश्किल हो गया है। हमें हमेशा यही डर रहता है कि पता नहीं कब कहां से आक्रमण कर दें। -संत राम कमल, किरायेदार, वार्ड नंबर आठ, निवासी सरकाघाट
नगर निगम हमीरपुर के आयुक्त राकेश कुमार शर्मा से सवाल
प्रश्न : शहर में एक बार फिर कुत्तों द्वारा बच्चों को काटने की घटना सामने आई है, ऐसे में नगर निगम कैसे लोगों को राहत देगा।
उत्तर :
नगर निगम हमीरपुर पशुपालन विभाग के साथ मिलकर खतरनाक कुत्तों की सूची बना रहा है। शीघ्र ही ऐसे कुत्तों को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा।प्रश्न : नगर निगम हर बार दावे करता है कि कुत्तों से राहत दिलाई जाएगी, लेकिन धरातल पर कोई कदम नहीं उठाए जाते, क्यों?
उत्तर : नगर निगम के पास डॉग शेल्टर नहीं है। कुत्तों को दूसरी जगह छोड़ा जाता है, लेकिन यह वापस आ जाते हैं। कुत्तों की वैक्सीनेशन करवाई गई है।
प्रश्न : क्या अधिकारी केवल बंद कमरों में बैठकर रणनीति बनाने तक सीमित हैं।
उत्तर : ऐसा नहीं है। नगर निगम हर प्रकार से कोशिश कर रहा है कि लोगों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाएं। इसके लिए नगर निगम प्रयासरत है।

पम्मी शर्मा , वार्ड नंबर दस राम नगर

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