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Hamirpur (Himachal) News: अध्यापक की नौकरी छोड़ स्वरोजगार से संवारी तकदीर
Fri, 24 Jul 2026 12:59 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Fri, 24 Jul 2026 12:59 AM IST
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ग्राम पंचायत धीरड़ के गांव सप्लूही की सपना कपड़े तैयार करते हुए । संवाद
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हमीरपुर। ग्राम पंचायत धीरड़ के गांव सप्लूही की सपना ने अध्यापक की नौकरी छोड़ स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। आज वह कपड़ों की सिलाई के साथ-साथ पेपर बैग और शगुन के लिफाफे तैयार कर हर महीने 15 से 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
उनकी सफलता क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। सपना ने ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) हमीरपुर से पेपर बैग और स्कूल बैग निर्माण का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
प्रशिक्षण के बाद उन्होंने छोटे स्तर पर काम शुरू किया। शुरुआत में ऑर्डर सीमित थे, लेकिन मेहनत, बेहतर गुणवत्ता और समय पर काम पूरा करने की वजह से धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा बढ़ता गया।
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अब उन्हें स्थानीय बाजार के अलावा विभिन्न आयोजनों और समारोहों के लिए भी पेपर बैग और शगुन के लिफाफों के ऑर्डर मिल रहे हैं। सपना बताती हैं कि स्वरोजगार शुरू करने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और वह परिवार की आय में भी सहयोग कर रही हैं।
सपना का कहना है कि महिलाएं अपने हुनर को पहचानकर मेहनत और लगन से काम करें तो घर से भी अच्छी आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उनका लक्ष्य अपने काम का विस्तार करना और अधिक महिलाओं को इससे जोड़कर रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना है।
उन्होंने कहा कि सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों से प्राप्त कौशल का सही उपयोग कर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं अपनी और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकती हैं।
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उनकी सफलता क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। सपना ने ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) हमीरपुर से पेपर बैग और स्कूल बैग निर्माण का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
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प्रशिक्षण के बाद उन्होंने छोटे स्तर पर काम शुरू किया। शुरुआत में ऑर्डर सीमित थे, लेकिन मेहनत, बेहतर गुणवत्ता और समय पर काम पूरा करने की वजह से धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा बढ़ता गया।
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अब उन्हें स्थानीय बाजार के अलावा विभिन्न आयोजनों और समारोहों के लिए भी पेपर बैग और शगुन के लिफाफों के ऑर्डर मिल रहे हैं। सपना बताती हैं कि स्वरोजगार शुरू करने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और वह परिवार की आय में भी सहयोग कर रही हैं।
सपना का कहना है कि महिलाएं अपने हुनर को पहचानकर मेहनत और लगन से काम करें तो घर से भी अच्छी आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उनका लक्ष्य अपने काम का विस्तार करना और अधिक महिलाओं को इससे जोड़कर रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना है।
उन्होंने कहा कि सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों से प्राप्त कौशल का सही उपयोग कर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं अपनी और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकती हैं।