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Hamirpur (Himachal) News: लावारिस कुत्तों के आतंक पर कसेगी नकेल, सार्वजनिक भवन होंगे सुरक्षित
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 29 Jan 2026 08:50 AM IST
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देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में लावारिस कुत्तों और आवारा पशुओं के बढ़ते आतंक से निपटने के लिए प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का संज्ञान लेते हुए जिला पंचायत अधिकारी कार्यालय ने सभी खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) को सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
निर्देशों के अनुसार अब सभी पंचायत घरों, सामुदायिक केंद्रों और महत्वपूर्ण सार्वजनिक भवनों के चारों ओर मजबूत बाड़, चहारदीवारी और फाटकों का निर्माण अनिवार्य कर दिया गया है। इस घेराबंदी का मुख्य उद्देश्य लावारिस कुत्तों और पशुओं के प्रवेश को रोकना है, ताकि सार्वजनिक स्थानों पर आने वाली जनता और विशेषकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस सुरक्षा परियोजना को गति देने के लिए विभाग ने वित्तीय संसाधनों की भी स्पष्ट व्यवस्था की है। पंचायतों में निर्माण कार्यों के लिए 14वें और 15वें वित्त आयोग से प्राप्त बजट का उपयोग किया जा सकेगा। इसके अलावा सामुदायिक केंद्रों के निर्माण के बाद बची हुई धनराशि और पंचायतों के अपने स्वयं के कोष के उपयोग की भी अनुमति दी गई है। सभी निर्माण कार्य जिला पंचायत मंडल के कार्यकारी अभियंता की देखरेख में विभागीय नियमों के तहत पूरे किए जाएंगे।
जिला पंचायत अधिकारी सचिन ठाकुर ने बताया कि पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त निदेशक केवल शर्मा की ओर से प्राप्त दिशा-निर्देशों के आधार पर सभी को तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। पंचायत सचिवों को भी इस संबंध में पत्र भेज दिए गए हैं, ताकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की कड़ाई से अनुपालना हो सके।
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निर्देशों के अनुसार अब सभी पंचायत घरों, सामुदायिक केंद्रों और महत्वपूर्ण सार्वजनिक भवनों के चारों ओर मजबूत बाड़, चहारदीवारी और फाटकों का निर्माण अनिवार्य कर दिया गया है। इस घेराबंदी का मुख्य उद्देश्य लावारिस कुत्तों और पशुओं के प्रवेश को रोकना है, ताकि सार्वजनिक स्थानों पर आने वाली जनता और विशेषकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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इस सुरक्षा परियोजना को गति देने के लिए विभाग ने वित्तीय संसाधनों की भी स्पष्ट व्यवस्था की है। पंचायतों में निर्माण कार्यों के लिए 14वें और 15वें वित्त आयोग से प्राप्त बजट का उपयोग किया जा सकेगा। इसके अलावा सामुदायिक केंद्रों के निर्माण के बाद बची हुई धनराशि और पंचायतों के अपने स्वयं के कोष के उपयोग की भी अनुमति दी गई है। सभी निर्माण कार्य जिला पंचायत मंडल के कार्यकारी अभियंता की देखरेख में विभागीय नियमों के तहत पूरे किए जाएंगे।
जिला पंचायत अधिकारी सचिन ठाकुर ने बताया कि पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त निदेशक केवल शर्मा की ओर से प्राप्त दिशा-निर्देशों के आधार पर सभी को तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। पंचायत सचिवों को भी इस संबंध में पत्र भेज दिए गए हैं, ताकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की कड़ाई से अनुपालना हो सके।
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