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Hamirpur (Himachal) News: डीसी, रजिस्ट्रार सहित हर अहम पद पर महिलाओं की सरकार
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 08 Mar 2026 12:59 AM IST
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कौशल्या देवी
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हमीरपुर। प्रदेश के सबसे साक्षर जिलों में शुमार हमीरपुर में आज प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था की कमान महिला शक्ति के हाथों में है। प्रशासन, शिक्षा, पंचायती राज, उद्यम और समाजसेवा जैसे क्षेत्रों में महिलाएं अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवा रही हैं।
सरकारी सेवा के साथ-साथ उद्यमिता और सामाजिक जागरूकता में भी जिले की महिलाएं मिसाल कायम कर रही हैं। जिले की कमान उपायुक्त के रूप में वर्ष 2016 बैच की आईएएस अधिकारी गंधर्वा राठौड़ के हाथों में है। वहीं, बड़सर उपमंडल में एचएएस अधिकारी स्वाति डोगरा एसडीएम के पद पर कार्यरत हैं। स्वाति एचएएस परीक्षा में दूसरा स्थान हासिल कर चुकी हैं।
डीसी गंधर्वा राठौड़ इससे पहले पश्चिम बंगाल में भी सेवाएं दे चुकी हैं। शुरुआती नियुक्ति उन्हें पश्चिम बंगाल कैडर में मिली थी, लेकिन बाद में उन्होंने हिमाचल प्रदेश कैडर में स्थानांतरण लिया और वर्तमान में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के गृह जिले हमीरपुर की प्रशासनिक कमान संभाल रही हैं।
शिक्षा क्षेत्र में भी महिला नेतृत्व
जिले के सबसे बड़े शैक्षणिक संस्थान एनआईटी हमीरपुर में रजिस्ट्रार के पद पर शिक्षाविद डॉ. अर्चना नानोटी सेवाएं दे रही हैं। उनके प्रयासों से संस्थान की रैंकिंग और प्लेसमेंट में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। डॉ. नानोटी भारत सरकार से मान्यता प्राप्त म्यूजिक थैरेपिस्ट भी हैं। मूल रूप से गुजरात के वडोदरा की रहने वाली अर्चना नानोटी 26 वर्षों के शैक्षणिक कॅरिअर में विभिन्न संस्थानों में प्राचार्य, प्रोफेसर और निदेशक सहित कई अहम पदों पर सेवाएं दे चुकी हैं। शोध के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में उनके कई शोध लेख प्रकाशित हो चुके हैं।
पर्यावरण संरक्षण में भी बनाई पहचान
सरकारी स्कूलों में भी महिला प्रधानाचार्यों ने अपनी पहचान बनाई है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला भलेठ की प्रधानाचार्य मंजरी वी. महाजन ने पर्यावरण संरक्षण और हस्तशिल्प के क्षेत्र में कार्य करते हुए स्कूल को हरित विद्यालय का दर्जा दिलाया। इसके लिए उन्हें प्रदेश सरकार और सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट नई दिल्ली की ओर से सम्मानित किया जा चुका है। जिला महिला एवं बाल विकास विभाग ने उन्हें गर्ल्स एजुकेशन लीडर के खिताब से नवाजा है।
महिलाओं के जिम्मे पंचायत राज विभाग की कमान
पंचायती राज विभाग में भी महिला अधिकारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं। जिला पंचायत अधिकारी बविता गुलेरिया के साथ-साथ खंड विकास अधिकारी के रूप में वैशाली और नीना सोनी तीन विकास खंडों का कार्यभार संभाल रही हैं। इसके अलावा जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (डीआरडीए) में अस्मिता ठाकुर सेवाएं दे रही हैं। पंचायत चुनाव और ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में इन अधिकारियों की भूमिका अहम मानी जा रही है।
दिव्यांग बेटे से प्रेरणा लेकर सैकड़ों के लिए सहारा बनी चेतना
हमीरपुर की चेतना शर्मा ने अपने दिव्यांग बेटे से प्रेरणा लेकर समाजसेवा का अनूठा उदाहरण पेश किया है। वर्ष 2001 में उनका बड़ा बेटा अक्षत पीलिया से ग्रसित हो गया था। कई जगह उपचार कराने के बावजूद जब स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो चेतना ने खुद को मजबूत बनाकर उसे सामान्य जीवन देने का संकल्प लिया। इसी संकल्प के साथ उन्होंने सलासी में दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष स्कूल शुरू किया। यहां दिव्यांग बच्चों को आश्रय देने के साथ-साथ उन्हें सामान्य जीवन जीने के लिए प्रशिक्षण और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाता है।
सैकड़ों महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही बगारटी की सीमा
बगारटी की सीमा ने घरेलू महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम शुरू की है। वह सरकारी और निजी संस्थाओं के सहयोग से महिलाओं को जूट, प्लास्टिक, चीड़ की पत्तियों, कृत्रिम आभूषण और वेस्ट-टू-बेस्ट थीम पर प्रशिक्षण देती हैं। इसके माध्यम से महिलाएं घर बैठे उत्पाद तैयार कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। हमीरपुर के अलावा वह पंजाब और दिल्ली में भी महिलाओं को प्रशिक्षण दे चुकी हैं।
बेटे की मौत के बाद हर वर्ष लगा रहीं रक्तदान शिविर
सुजानपुर वार्ड नंबर एक की सविता महाजन ने बेटे की मौत के बाद समाज सेवा को अपना जीवन समर्पित कर दिया। वर्ष 2015 में हार्ट अटैक से उनके 30 वर्षीय बेटे का निधन हो गया था।बेटे की स्मृति में उन्होंने रक्तदान अभियान शुरू किया। पिछले दस वर्षों में वह 10 से अधिक रक्तदान शिविर आयोजित कर अस्पतालों को रक्त उपलब्ध करवा चुकी हैं। इसके अलावा युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए वह हर वर्ष खंड स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन भी कराती हैं।
युवाओं को खेलों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रही दीपमाला
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय भारत सरकार के तहत संचालित मेरा युवा भारत कार्यक्रम में दीपमाला जिला युवा अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। पिछले छह वर्षों में उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों युवाओं को खेलों से जोड़ने का काम किया है। साथ ही महिला मंडलों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण और मंच प्रदान किया है।
27 वर्ष की उम्र में भावना ने खड़ा किया लाखों का कारोबार
भारी गांव की 27 वर्षीय भावना राणा ने मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उन्होंने अपने गांव में करीब 30 लाख रुपये की लागत से मशरूम उत्पादन के प्लांट स्थापित किए हैं। इस व्यवसाय से वह न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि आसपास के गांवों की 10 से 12 महिलाओं को रोजगार भी उपलब्ध करवा रही हैं।
हर महिला तक पहुंचाई योजना, अब मिलेगा राज्य स्तरीय पुरस्कार
नगर निगम हमीरपुर के वार्ड नंबर नौ स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता कौशल्या देवी को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।महिला दिवस के अवसर पर नाहन में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की देखभाल से लेकर महिलाओं तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की उन्होंने हर जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाई है। निरीक्षण के दौरान भी उनके कार्य की सराहना की जाती रही है।
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सरकारी सेवा के साथ-साथ उद्यमिता और सामाजिक जागरूकता में भी जिले की महिलाएं मिसाल कायम कर रही हैं। जिले की कमान उपायुक्त के रूप में वर्ष 2016 बैच की आईएएस अधिकारी गंधर्वा राठौड़ के हाथों में है। वहीं, बड़सर उपमंडल में एचएएस अधिकारी स्वाति डोगरा एसडीएम के पद पर कार्यरत हैं। स्वाति एचएएस परीक्षा में दूसरा स्थान हासिल कर चुकी हैं।
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डीसी गंधर्वा राठौड़ इससे पहले पश्चिम बंगाल में भी सेवाएं दे चुकी हैं। शुरुआती नियुक्ति उन्हें पश्चिम बंगाल कैडर में मिली थी, लेकिन बाद में उन्होंने हिमाचल प्रदेश कैडर में स्थानांतरण लिया और वर्तमान में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के गृह जिले हमीरपुर की प्रशासनिक कमान संभाल रही हैं।
शिक्षा क्षेत्र में भी महिला नेतृत्व
जिले के सबसे बड़े शैक्षणिक संस्थान एनआईटी हमीरपुर में रजिस्ट्रार के पद पर शिक्षाविद डॉ. अर्चना नानोटी सेवाएं दे रही हैं। उनके प्रयासों से संस्थान की रैंकिंग और प्लेसमेंट में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। डॉ. नानोटी भारत सरकार से मान्यता प्राप्त म्यूजिक थैरेपिस्ट भी हैं। मूल रूप से गुजरात के वडोदरा की रहने वाली अर्चना नानोटी 26 वर्षों के शैक्षणिक कॅरिअर में विभिन्न संस्थानों में प्राचार्य, प्रोफेसर और निदेशक सहित कई अहम पदों पर सेवाएं दे चुकी हैं। शोध के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में उनके कई शोध लेख प्रकाशित हो चुके हैं।
पर्यावरण संरक्षण में भी बनाई पहचान
सरकारी स्कूलों में भी महिला प्रधानाचार्यों ने अपनी पहचान बनाई है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला भलेठ की प्रधानाचार्य मंजरी वी. महाजन ने पर्यावरण संरक्षण और हस्तशिल्प के क्षेत्र में कार्य करते हुए स्कूल को हरित विद्यालय का दर्जा दिलाया। इसके लिए उन्हें प्रदेश सरकार और सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट नई दिल्ली की ओर से सम्मानित किया जा चुका है। जिला महिला एवं बाल विकास विभाग ने उन्हें गर्ल्स एजुकेशन लीडर के खिताब से नवाजा है।
महिलाओं के जिम्मे पंचायत राज विभाग की कमान
पंचायती राज विभाग में भी महिला अधिकारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं। जिला पंचायत अधिकारी बविता गुलेरिया के साथ-साथ खंड विकास अधिकारी के रूप में वैशाली और नीना सोनी तीन विकास खंडों का कार्यभार संभाल रही हैं। इसके अलावा जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (डीआरडीए) में अस्मिता ठाकुर सेवाएं दे रही हैं। पंचायत चुनाव और ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में इन अधिकारियों की भूमिका अहम मानी जा रही है।
दिव्यांग बेटे से प्रेरणा लेकर सैकड़ों के लिए सहारा बनी चेतना
हमीरपुर की चेतना शर्मा ने अपने दिव्यांग बेटे से प्रेरणा लेकर समाजसेवा का अनूठा उदाहरण पेश किया है। वर्ष 2001 में उनका बड़ा बेटा अक्षत पीलिया से ग्रसित हो गया था। कई जगह उपचार कराने के बावजूद जब स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो चेतना ने खुद को मजबूत बनाकर उसे सामान्य जीवन देने का संकल्प लिया। इसी संकल्प के साथ उन्होंने सलासी में दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष स्कूल शुरू किया। यहां दिव्यांग बच्चों को आश्रय देने के साथ-साथ उन्हें सामान्य जीवन जीने के लिए प्रशिक्षण और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाता है।
सैकड़ों महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही बगारटी की सीमा
बगारटी की सीमा ने घरेलू महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम शुरू की है। वह सरकारी और निजी संस्थाओं के सहयोग से महिलाओं को जूट, प्लास्टिक, चीड़ की पत्तियों, कृत्रिम आभूषण और वेस्ट-टू-बेस्ट थीम पर प्रशिक्षण देती हैं। इसके माध्यम से महिलाएं घर बैठे उत्पाद तैयार कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। हमीरपुर के अलावा वह पंजाब और दिल्ली में भी महिलाओं को प्रशिक्षण दे चुकी हैं।
बेटे की मौत के बाद हर वर्ष लगा रहीं रक्तदान शिविर
सुजानपुर वार्ड नंबर एक की सविता महाजन ने बेटे की मौत के बाद समाज सेवा को अपना जीवन समर्पित कर दिया। वर्ष 2015 में हार्ट अटैक से उनके 30 वर्षीय बेटे का निधन हो गया था।बेटे की स्मृति में उन्होंने रक्तदान अभियान शुरू किया। पिछले दस वर्षों में वह 10 से अधिक रक्तदान शिविर आयोजित कर अस्पतालों को रक्त उपलब्ध करवा चुकी हैं। इसके अलावा युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए वह हर वर्ष खंड स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन भी कराती हैं।
युवाओं को खेलों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रही दीपमाला
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय भारत सरकार के तहत संचालित मेरा युवा भारत कार्यक्रम में दीपमाला जिला युवा अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। पिछले छह वर्षों में उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों युवाओं को खेलों से जोड़ने का काम किया है। साथ ही महिला मंडलों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण और मंच प्रदान किया है।
27 वर्ष की उम्र में भावना ने खड़ा किया लाखों का कारोबार
भारी गांव की 27 वर्षीय भावना राणा ने मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उन्होंने अपने गांव में करीब 30 लाख रुपये की लागत से मशरूम उत्पादन के प्लांट स्थापित किए हैं। इस व्यवसाय से वह न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि आसपास के गांवों की 10 से 12 महिलाओं को रोजगार भी उपलब्ध करवा रही हैं।
हर महिला तक पहुंचाई योजना, अब मिलेगा राज्य स्तरीय पुरस्कार
नगर निगम हमीरपुर के वार्ड नंबर नौ स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता कौशल्या देवी को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।महिला दिवस के अवसर पर नाहन में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की देखभाल से लेकर महिलाओं तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की उन्होंने हर जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाई है। निरीक्षण के दौरान भी उनके कार्य की सराहना की जाती रही है।

कौशल्या देवी

कौशल्या देवी

कौशल्या देवी

कौशल्या देवी

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