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Himachal News: सुकेती खड्ड में अवैध खनन पर रोक, हाईकोर्ट ने सख्त कार्रवाई के दिए आदेश

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 01 Apr 2026 06:00 AM IST
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सार

 हाईकोर्ट ने मंडी जिले की सुकेती खड्ड में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध खनन पर कड़ा संज्ञान लेते हुए तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। 

Himachal: Ban on Illegal Mining in Suketi Khad; High Court Orders Strict Action
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मंडी जिले की सुकेती खड्ड में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध खनन पर कड़ा संज्ञान लेते हुए तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए मंडी जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण की सचिव को व्यक्तिगत रूप से मौके का दौरा कर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। निरीक्षण के दौरान महिला अधिकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मंडी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को पर्याप्त पुलिस बल मुहैया कराने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही खनन विभाग के स्थानीय अधिकारी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी भी निरीक्षण के दौरान सचिव के साथ मौजूद रहेंगे।

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अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि मौके पर अवैध खनन का कोई भी प्रमाण मिलता है, तो अधिकारी तत्काल प्रभाव से उस गतिविधि को रुकवाना सुनिश्चित करेंगे। अदालत ने इस मामले में सरकार को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 13 मई को होगी। अदालत ने यह कार्रवाई एक शिकायत में तस्वीरों और वीडियो क्लिप के आधार पर शुरू की है। साक्ष्यों में स्पष्ट रूप से देखा गया कि सुकेती खड्ड के बीचों-बीच भारी मशीनरी का खेल चल रहा है। खड्ड के अंदर बड़े पैमाने पर एक्सावेटर, जेसीबी और ट्रैक्टरों का संचालन किया जा रहा है। नदी के किनारों पर मलबा और कचरा फेंका जा रहा है, इससे प्राकृतिक जलधाराएं पूरी तरह बाधित हो गई हैं। खनन के कारण खड्ड का स्वरूप बिगड़ रहा है और पारिस्थितिक संतुलन को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

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दुष्कर्म के आरोपियों की जमानत रद्द करने से हाईकोर्ट का इन्कार
हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और धमकी देने के आरोपियों की जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल अस्पष्ट आरोपों के आधार पर किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता (जमानत) को छीना नहीं जा सकता है। पीड़िता ने अपनी शिकायत में किसी भी ऐसी निश्चित तारीख या घटना का जिक्र नहीं किया जब उसे धमकाया गया हो। अदालत ने पाया कि आरोप केवल सामान्य और अस्पष्ट प्रकृति के है। अदालत ने कहा कि पीड़िता ने धमकियों के संबंध में पुलिस या किसी अन्य उच्च अधिकारी को कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। आरोपी जांच में सहयोग कर रहे हैं और उनके खिलाफ बाद में उत्पन्न हुए कोई ठोस सबूत नहीं हुई है, इसलिए उनकी स्वतंत्रता को बाधित करना उचित नहीं है।

अदालत ने दोनों याचिकाओं को विचारहीन मानकर खारिज कर दिया। पीड़िता ने दो व्यक्तियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (दुष्कर्म), 504 और 506 के तहत मामला दर्ज करवाया था। पीड़िता का आरोप था कि वह आरोपियों के घर पर नौकरानी का काम करती थी, जहां पर एक आरोपी ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, जिससे एक बच्चे का जन्म हुआ। बाद में आरोपियों ने उसे घर से निकाल दिया। मार्च 2025 में इन दोनों आरोपियों को अग्रिम जमानत प्रदान की थी। पीड़िता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 483 (3) के तहत आवेदन दायर कर जमानत रद्द करने की मांग की थी। याचिका में बताया गया है कि जमानत मिलने के बाद आरोपी उसे समझौता करने के लिए धमका रहे हैं।आरोपी सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं और दबाव बना रहे हैं।

चूड़ेश्वर महादेव के क्षेत्र में अवैध सड़क निर्माण पर सरकार को नोटिस
 प्रदेश हाईकोर्ट ने चौपाल मंडल के हल्डू जुब्बड़ के घने देवदार के जंगलों में 5 किलोमीटर लंबी मोटर योग्य सड़क के अवैध निर्माण पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने इस मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि अगली सुनवाई तक इस निर्माण कार्य और लगाए गए आरोपों पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाए। मामले की अगली सुनवाई 15 मई को होगी। अदालत को इसको लेकर एक शिकायत मिली है, जिस पर हाईकोर्ट ने यह संज्ञान लिया है, इसमें शिरगुल महाराज चूड़धार के निवास स्थान की ओर जाने वाली ओर सड़क के निर्माण पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इस निर्माण की वजह से चूड़धार पर्वत और उसके आसपास के जंगल न केवल प्राकृतिक संपत्ति हैं, बल्कि हिमाचल के लोगों के लिए एक पवित्र सांस्कृतिक परिदृश्य भी हैं। घने देवदार के जंगलों के बीच 5 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण बिना उचित अनुमति के किया जा रहा है। सड़क बनने से इस शांत क्षेत्र में अनियंत्रित पर्यटकों की भीड़ बढ़ेगी, जिससे शोर, प्रदूषण, अतिक्रमण और कचरे की समस्या पैदा होगी। आरोप है कि जेआईसीए (जायका) परियोजना के तहत प्राप्त धन, जो पारिस्थितिक संरक्षण और सतत वन प्रबंधन के लिए था, उसका उपयोग राजनीतिक संरक्षण में जंगलों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

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