फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   himachal High Court remarked that the govt should take a cue from the bee, calf and leech and impose taxes.

Himachal News: हाईकोर्ट की टिप्पणी, सरकार मधुमक्खी, बछड़े और जोंक से सीख लेकर लगाए कर

Wed, 12 Aug 2026 05:15 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 12 Aug 2026 05:15 AM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने स्टोन क्रशर और खनन उद्योगों पर बिजली ड्यूटी में की गई भारी बढ़ोतरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार की ओर से तय 37.50 प्रतिशत की दर को अंतरिम तौर पर अमान्य कर दिया है। 

विज्ञापन
himachal High Court remarked that the govt should take a cue from the bee, calf and leech and impose taxes.
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्टोन क्रशर और खनन उद्योगों पर बिजली ड्यूटी में की गई भारी बढ़ोतरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार की ओर से तय 37.50 प्रतिशत की दर को अंतरिम तौर पर अमान्य कर दिया है। अदालत ने कर नीति पर टिप्पणी करते हुए महाभारत के शांति पर्व, मनुस्मृति और कौटिल्य के अर्थशास्त्र का हवाला दिया। कोर्ट ने प्राचीन ग्रंथों में राजाओं, जोंक, मधुमक्खी और बछड़े से सीख लेने की सलाह दी है। ये अपने स्रोत से उतना ही लेते हैं, जिससे स्रोत को नुकसान न पहुंचे। उसी तरह सरकार को भी कर लगाते समय ध्यान रखना चाहिए कि राजस्व के चक्कर में करदाता या उद्योग की क्षमता समाप्त न हो जाए।

विज्ञापन

निर्धारित समय सीमा के बार-बार भारी बढ़ोतरी मनमाना और कानून के अनुरूप नहीं: कोर्ट
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सरकार को बिजली ड्यूटी में संशोधन का अधिकार है, लेकिन बिना स्पष्ट नियम और निर्धारित समय सीमा के बार-बार भारी बढ़ोतरी मनमाना और कानून के अनुरूप नहीं है। हाईकोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत बिजली ड्यूटी की अधिकतम सीमा तय कर दी है। इसके अनुसार 1 सितंबर 2023 से स्टोन क्रशरों पर अधिकतम 16.50 प्रतिशत बिजली ड्यूटी लागू होगी। वहीं, 18 जनवरी 2024 से अधिसूचित 37.50 प्रतिशत के स्थान पर अधिकतम 24.75 प्रतिशत बिजली ड्यूटी वसूली जा सकेगी। अदालत ने निर्देश दिया है कि यदि याचिकाकर्ता इकाइयों से निर्धारित सीमा से अधिक राशि वसूल की गई है तो उस अतिरिक्त रकम को अगले एक वर्ष के भीतर आगामी बिजली बिलों में समायोजित किया जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

दो अधिसूचनाओं से पैदा हुआ विवाद
सरकार की दो अधिसूचनाओं के कारण यह विवाद पैदा हुआ है। 1 सितंबर 2023 को जारी अधिसूचना के अनुसार स्टोन क्रशर, खदानों और सीमेंट उद्योग के लिए बिजली ड्यूटी की दर 11 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दी गई। इसके महज करीब पांच महीने बाद 18 जनवरी 2024 की अधिसूचना से इसे और बढ़ाकर 37.50 प्रतिशत किया गया। स्टोन क्रशर संचालकों ने इन दोनों अधिसूचनाओं को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

विज्ञापन

140 याचिकाकर्ताओं की संयुक्त याचिकाओं पर फैसला
खंडपीठ ने करीब 140 याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिकाओं पर संयुक्त फैसला सुनाया है। प्रदेश में अलग-अलग श्रेणियों में 300 से अधिक स्टोन क्रशर पंजीकृत हैं। हालांकि, अदालत ने सरकार के इस अधिकार को स्वीकार किया है कि वह स्टोन क्रशरों को बिजली ड्यूटी के लिए अलग उप-श्रेणी में रख सकती है। याचिकाकर्ताओं की यह दलील स्वीकार नहीं की गई कि सरकार क्रशरों को अन्य बड़े उद्योगों से अलग श्रेणी में नहीं रख सकती।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed