Himachal News: हाईकोर्ट की टिप्पणी, सरकार मधुमक्खी, बछड़े और जोंक से सीख लेकर लगाए कर
प्रदेश हाईकोर्ट ने स्टोन क्रशर और खनन उद्योगों पर बिजली ड्यूटी में की गई भारी बढ़ोतरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार की ओर से तय 37.50 प्रतिशत की दर को अंतरिम तौर पर अमान्य कर दिया है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्टोन क्रशर और खनन उद्योगों पर बिजली ड्यूटी में की गई भारी बढ़ोतरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार की ओर से तय 37.50 प्रतिशत की दर को अंतरिम तौर पर अमान्य कर दिया है। अदालत ने कर नीति पर टिप्पणी करते हुए महाभारत के शांति पर्व, मनुस्मृति और कौटिल्य के अर्थशास्त्र का हवाला दिया। कोर्ट ने प्राचीन ग्रंथों में राजाओं, जोंक, मधुमक्खी और बछड़े से सीख लेने की सलाह दी है। ये अपने स्रोत से उतना ही लेते हैं, जिससे स्रोत को नुकसान न पहुंचे। उसी तरह सरकार को भी कर लगाते समय ध्यान रखना चाहिए कि राजस्व के चक्कर में करदाता या उद्योग की क्षमता समाप्त न हो जाए।
निर्धारित समय सीमा के बार-बार भारी बढ़ोतरी मनमाना और कानून के अनुरूप नहीं: कोर्ट
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सरकार को बिजली ड्यूटी में संशोधन का अधिकार है, लेकिन बिना स्पष्ट नियम और निर्धारित समय सीमा के बार-बार भारी बढ़ोतरी मनमाना और कानून के अनुरूप नहीं है। हाईकोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत बिजली ड्यूटी की अधिकतम सीमा तय कर दी है। इसके अनुसार 1 सितंबर 2023 से स्टोन क्रशरों पर अधिकतम 16.50 प्रतिशत बिजली ड्यूटी लागू होगी। वहीं, 18 जनवरी 2024 से अधिसूचित 37.50 प्रतिशत के स्थान पर अधिकतम 24.75 प्रतिशत बिजली ड्यूटी वसूली जा सकेगी। अदालत ने निर्देश दिया है कि यदि याचिकाकर्ता इकाइयों से निर्धारित सीमा से अधिक राशि वसूल की गई है तो उस अतिरिक्त रकम को अगले एक वर्ष के भीतर आगामी बिजली बिलों में समायोजित किया जाए।
दो अधिसूचनाओं से पैदा हुआ विवाद
सरकार की दो अधिसूचनाओं के कारण यह विवाद पैदा हुआ है। 1 सितंबर 2023 को जारी अधिसूचना के अनुसार स्टोन क्रशर, खदानों और सीमेंट उद्योग के लिए बिजली ड्यूटी की दर 11 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दी गई। इसके महज करीब पांच महीने बाद 18 जनवरी 2024 की अधिसूचना से इसे और बढ़ाकर 37.50 प्रतिशत किया गया। स्टोन क्रशर संचालकों ने इन दोनों अधिसूचनाओं को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
140 याचिकाकर्ताओं की संयुक्त याचिकाओं पर फैसला
खंडपीठ ने करीब 140 याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिकाओं पर संयुक्त फैसला सुनाया है। प्रदेश में अलग-अलग श्रेणियों में 300 से अधिक स्टोन क्रशर पंजीकृत हैं। हालांकि, अदालत ने सरकार के इस अधिकार को स्वीकार किया है कि वह स्टोन क्रशरों को बिजली ड्यूटी के लिए अलग उप-श्रेणी में रख सकती है। याचिकाकर्ताओं की यह दलील स्वीकार नहीं की गई कि सरकार क्रशरों को अन्य बड़े उद्योगों से अलग श्रेणी में नहीं रख सकती।