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Himachal: बोर्ड को सस्ती बिजली नहीं, अब बाजार में बिकेगा राज्य सरकार का हिस्सा, ई-टेंडर जारी

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 10 Apr 2026 06:00 AM IST
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सार

सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए अब अपनी हिस्सेदारी की बिजली को सस्ते दाम पर बिजली बोर्ड को देने की बजाय खुले बाजार में बेचने का फैसला किया है।

Himachal: No more subsidized electricity for the Board; the State Govt share will now be sold in the open mark
बिजली। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए अब अपनी हिस्सेदारी की बिजली को सस्ते दाम पर बिजली बोर्ड को देने की बजाय खुले बाजार में बेचने का फैसला किया है। इसी कड़ी में ऊर्जा निदेशालय ने नाथपा-झाकड़ी और रामपुर जल विद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली बिजली के अंतरराज्यीय व्यापार के लिए ई-टेंडर जारी कर कंपनियों से आवेदन मांगे हैं। अब तक प्रदेश सरकार इन परियोजनाओं से मिलने वाली अपनी 12 फीसदी मुफ्त बिजली हिस्सेदारी को हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड को जेनरेशन कॉस्ट पर उपलब्ध कराती रही है।

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यह बिजली करीब 2.48 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बोर्ड को दी जाती थी, जो बाजार दरों से काफी कम है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिजली बोर्ड को भी अपनी जरूरत की बिजली खुले बाजार से बोली लगाकर खरीदनी पड़ेगी। ऊर्जा निदेशालय की ओर से जारी टेंडर 1 जून 2026 से 31 मई 2029 तक के लिए वैध रहेगा। जरूरत पड़ने पर इसे दो साल तक और बढ़ाया जा सकता है। इसके तहत राज्य की इक्विटी हिस्सेदारी की बिजली को बाजार में बेचने के लिए कंपनियों का चयन किया जाएगा। इस प्रक्रिया में राज्य बिजली बोर्ड, विभिन्न डिस्कॉम, ओपन एक्सेस उपभोक्ता और ट्रेडिंग लाइसेंस धारक कंपनियां भाग ले सकेंगी।

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शर्त यह है कि संबंधित कंपनियों के पास केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी वैध इंटर-स्टेट ट्रेडिंग लाइसेंस होना अनिवार्य होगा। टेंडर के तहत सतलुज जल विद्युत निगम की नाथपा-झाकड़ी और रामपुर जल विद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली बिजली की बिक्री की जाएगी। ये दोनों परियोजनाएं प्रदेश के लिए राजस्व का प्रमुख स्रोत मानी जाती हैं। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि खुले बाजार में बिक्री से इस बिजली का बेहतर मूल्य मिल सकेगा, जिससे राज्य की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। सरकार को इस नई व्यवस्था से सालाना करीब 250 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है। नई व्यवस्था के तहत बिजली बोर्ड को अब सस्ती दरों पर सीधे आपूर्ति नहीं मिलेगी, जिससे भविष्य में बिजली खरीद लागत बढ़ सकती है।

ऑनलाइन होगी पूरी प्रक्रिया
ऊर्जा निदेशालय के अनुसार पूरी निविदा प्रक्रिया ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन होगी। इच्छुक कंपनियां दस्तावेज डाउनलोड कर सकती हैं और डिजिटल सिग्नेचर के जरिये आवेदन कर सकेंगी। हालांकि, सरकार का तर्क है कि प्रतिस्पर्धी बाजार व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और दीर्घकाल में ऊर्जा क्षेत्र अधिक सक्षम बनेगा। हिमाचल सरकार का यह कदम परंपरागत व्यवस्था से हटकर बाजार आधारित मॉडल की ओर बदलाव माना जा रहा है।

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