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करवाचौथ पर बन रहा लक्ष्मी नारायण योग : संजय शर्मा
Wed, 28 Oct 2026 07:52 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 28 Oct 2026 07:52 PM IST
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चंद्रमा के वृषभ राशि में गोचर और रोहिणी नक्षत्र का मिलेगा शुभ संयोग
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाला करवाचौथ पर्व इस बार 29 अक्तूबर को मनाया जाएगा। शक्तिपीठ ज्वालामुखी के पंडित एवं ज्योतिषाचार्य संजय शर्मा के अनुसार इस दिन कई शुभ ज्योतिषीय संयोग बन रहे हैं। महिलाएं पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली की कामना के साथ निर्जला व्रत रखेंगी।
संजय शर्मा ने बताया कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार 29 अक्तूबर को शुक्र अपनी स्वराशि तुला में उदित होंगे और बुध के साथ युति बनाएंगे। इस संयोग को लक्ष्मी नारायण योग कहा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह योग सुख-समृद्धि, आर्थिक उन्नति और दांपत्य जीवन में मधुरता का प्रतीक माना जाता है।
उन्होंने बताया कि करवाचौथ पर चंद्रमा का वृषभ राशि में गोचर भी विशेष महत्व रखता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार वृषभ राशि में चंद्रमा उच्च के होते हैं। इस दिन सुबह 11 बजकर 12 मिनट तक रोहिणी नक्षत्र का संयोग रहेगा। चंद्रमा और रोहिणी नक्षत्र के इस मेल को प्रेम, सौहार्द और वैवाहिक जीवन में मधुरता के लिए शुभ माना जाता है।
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सुबह 4 से 5 बजे तक सरगी ग्रहण करना उचित
महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करने के बाद निर्जला व्रत शुरू करती हैं। इसके लिए सुबह 4 से 5 बजे तक का समय उचित बताया गया है। हालांकि, सरगी ग्रहण करने का समय स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार तय करना चाहिए। दिनभर व्रत रखने के बाद महिलाएं चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देंगी और पति की लंबी आयु की कामना के साथ व्रत खोलेंगी। करवाचौथ प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक भी है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाला करवाचौथ पर्व इस बार 29 अक्तूबर को मनाया जाएगा। शक्तिपीठ ज्वालामुखी के पंडित एवं ज्योतिषाचार्य संजय शर्मा के अनुसार इस दिन कई शुभ ज्योतिषीय संयोग बन रहे हैं। महिलाएं पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली की कामना के साथ निर्जला व्रत रखेंगी।
संजय शर्मा ने बताया कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार 29 अक्तूबर को शुक्र अपनी स्वराशि तुला में उदित होंगे और बुध के साथ युति बनाएंगे। इस संयोग को लक्ष्मी नारायण योग कहा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह योग सुख-समृद्धि, आर्थिक उन्नति और दांपत्य जीवन में मधुरता का प्रतीक माना जाता है।
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उन्होंने बताया कि करवाचौथ पर चंद्रमा का वृषभ राशि में गोचर भी विशेष महत्व रखता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार वृषभ राशि में चंद्रमा उच्च के होते हैं। इस दिन सुबह 11 बजकर 12 मिनट तक रोहिणी नक्षत्र का संयोग रहेगा। चंद्रमा और रोहिणी नक्षत्र के इस मेल को प्रेम, सौहार्द और वैवाहिक जीवन में मधुरता के लिए शुभ माना जाता है।
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सुबह 4 से 5 बजे तक सरगी ग्रहण करना उचित
महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करने के बाद निर्जला व्रत शुरू करती हैं। इसके लिए सुबह 4 से 5 बजे तक का समय उचित बताया गया है। हालांकि, सरगी ग्रहण करने का समय स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार तय करना चाहिए। दिनभर व्रत रखने के बाद महिलाएं चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देंगी और पति की लंबी आयु की कामना के साथ व्रत खोलेंगी। करवाचौथ प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक भी है।