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Kangra News: मातृ-शिशु अस्पताल तो तैयार, पर जांच के लिए मशीनें ही नहीं
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धर्मशाला। डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा में मातृ-शिशु अस्पताल का भवन तैयार है लेकिन गर्भवती महिलाओं को अभी यहां जांच की पूरी सुविधा नहीं मिल पा रही है।
करीब तीन साल पहले अस्पताल के लिए पहुंची जांच मशीनें इस्तेमाल न होने पर अन्य विभागों को दे दी गई थीं। अब अस्पताल के लिए नए सिरे से मशीनरी खरीदने की तैयारी है।
टांडा में मातृ-शिशु अस्पताल का रैंप तैयार हो चुका है और करीब एक साल से ओपीडी भी चल रही है। मगर अल्ट्रासाउंड सहित अन्य जरूरी जांच के लिए गर्भवती महिलाओं को पुराने परिसर जाना पड़ रहा है। इससे उन्हें परेशानी के साथ अतिरिक्त समय भी लग रहा है।
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कॉलेज प्रशासन के अनुसार करीब तीन वर्ष पहले मातृ-शिशु अस्पताल के लिए कुछ आवश्यक मशीनें टांडा मेडिकल कॉलेज पहुंची थीं। अस्पताल तैयार न होने के कारण इनका इस्तेमाल नहीं हो सका। बाद में इन्हें अन्य विभागों को दे दिया गया।
अब अस्पताल तैयार होने के बाद वहां अलग से मशीनरी की जरूरत पड़ रही है। अस्पताल को पूरी तरह सुचारु करने के लिए कॉलेज प्रशासन ने सरकार से करीब तीन करोड़ रुपये मांगे हैं। आवश्यक मशीनरी की सूची तैयार कर बजट उपलब्ध करवाने का प्रस्ताव भेजा गया है।
बजट मिलने के बाद मशीनों की खरीद की जाएगी। मातृ-शिशु अस्पताल बनने से गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों को एक ही जगह उपचार और जांच की सुविधा मिलने की उम्मीद थी।
अभी पुराने परिसर में हो रही जांच
मशीनरी उपलब्ध न होने से फिलहाल जरूरी जांच के लिए पुराने परिसर पर निर्भरता बनी हुई है। गंभीर स्थिति में आने वाली गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों के लिए अस्पताल में तत्काल जांच सुविधा उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है।
अस्पताल के लिए आवश्यक मशीनरी की सूची तैयार कर सरकार को बजट उपलब्ध करवाने का प्रस्ताव भेजा गया है। करीब तीन करोड़ रुपये मिलने के बाद मशीनों की खरीद की जाएगी। मशीनें उपलब्ध होने के बाद मातृ-शिशु अस्पताल को पूरी क्षमता के साथ संचालित करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकेगा। -डॉ. मिलाप शर्मा, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, टांडा
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करीब तीन साल पहले अस्पताल के लिए पहुंची जांच मशीनें इस्तेमाल न होने पर अन्य विभागों को दे दी गई थीं। अब अस्पताल के लिए नए सिरे से मशीनरी खरीदने की तैयारी है।
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टांडा में मातृ-शिशु अस्पताल का रैंप तैयार हो चुका है और करीब एक साल से ओपीडी भी चल रही है। मगर अल्ट्रासाउंड सहित अन्य जरूरी जांच के लिए गर्भवती महिलाओं को पुराने परिसर जाना पड़ रहा है। इससे उन्हें परेशानी के साथ अतिरिक्त समय भी लग रहा है।
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कॉलेज प्रशासन के अनुसार करीब तीन वर्ष पहले मातृ-शिशु अस्पताल के लिए कुछ आवश्यक मशीनें टांडा मेडिकल कॉलेज पहुंची थीं। अस्पताल तैयार न होने के कारण इनका इस्तेमाल नहीं हो सका। बाद में इन्हें अन्य विभागों को दे दिया गया।
अब अस्पताल तैयार होने के बाद वहां अलग से मशीनरी की जरूरत पड़ रही है। अस्पताल को पूरी तरह सुचारु करने के लिए कॉलेज प्रशासन ने सरकार से करीब तीन करोड़ रुपये मांगे हैं। आवश्यक मशीनरी की सूची तैयार कर बजट उपलब्ध करवाने का प्रस्ताव भेजा गया है।
बजट मिलने के बाद मशीनों की खरीद की जाएगी। मातृ-शिशु अस्पताल बनने से गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों को एक ही जगह उपचार और जांच की सुविधा मिलने की उम्मीद थी।
अभी पुराने परिसर में हो रही जांच
मशीनरी उपलब्ध न होने से फिलहाल जरूरी जांच के लिए पुराने परिसर पर निर्भरता बनी हुई है। गंभीर स्थिति में आने वाली गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों के लिए अस्पताल में तत्काल जांच सुविधा उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है।
अस्पताल के लिए आवश्यक मशीनरी की सूची तैयार कर सरकार को बजट उपलब्ध करवाने का प्रस्ताव भेजा गया है। करीब तीन करोड़ रुपये मिलने के बाद मशीनों की खरीद की जाएगी। मशीनें उपलब्ध होने के बाद मातृ-शिशु अस्पताल को पूरी क्षमता के साथ संचालित करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकेगा। -डॉ. मिलाप शर्मा, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, टांडा