खुशवंत सिंह लिटफेस्ट: पूर्व सेना प्रमुख नरवणे बोले- कलम का इस्तेमाल तलवार की तरह मर्यादा से करें
नरवणे ने कहा कि सेना और लेखन दोनों में अनुशासन अनिवार्य है। एक सैनिक की तरह लेखक को भी प्रतिदिन लिखना चाहिए। उन्होंने युवा लेखकों से निडर होकर लिखने, लेकिन जिम्मेदारी से लिखने का आग्रह किया।
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के कसौली में 15वें खुशवंत सिंह लिटफेस्ट 2026 का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने युवा लेखकों को महत्वपूर्ण सलाह दी। मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा कि लेखन और सेना, दोनों क्षेत्रों में अनुशासन अनिवार्य है। लेखकों को निर्भीकता के साथ लिखना चाहिए, लेकिन अपनी जिम्मेदारी को भी समझना चाहिए। कलम का इस्तेमाल भी तलवार की तरह सम्मान और मर्यादा के साथ किया जाना चाहिए।
कहा कि एक सैनिक रोज अपनी डायरी लिखता है, उसी तरह लेखक को भी प्रतिदिन लिखने की आदत डालनी चाहिए। युवा लेखकों को आगे बढ़कर नेतृत्व करना चाहिए, ठीक उसी तरह जैसे एक सैनिक मोर्चे पर आगे रहता है। उन्होंने युवा लेखकों से गंभीर मुद्दों पर बिना किसी दुर्भावना के लिखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मुद्दों पर असहमति जताने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन किसी व्यक्ति का अपमान नहीं होना चाहिए।
विभिन्न सत्रों में चर्चा
उत्सव के निदेशक राहुल सिंह ने अपने दिवंगत पिता खुशवंत सिंह को याद किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता अनुशासित और हास्य के बेताज बादशाह थे। खुशवंत सिंह ने लगभग 70 वर्षों तक प्रतिदिन लेखन किया। अधिवक्ता और लेखिका मिहिरा सूद ने 'गर्ल्स जस्ट वाना हैव फंडामेंटल राइट्स' सत्र में लैंगिक समानता पर बात की। उन्होंने बताया कि केवल कानूनी सुधारों से लैंगिक समानता सुनिश्चित नहीं हो सकती। लेखक और पत्रकार संजॉय हजारिका ने 'मिजोरम: फ्रॉम बैटलफील्ड टू बैलेट बॉक्स' सत्र में मिजोरम के बदलाव पर चर्चा की। उन्होंने सशस्त्र विद्रोह से लोकतांत्रिक शासन तक के सफर को समझाया।
अन्य लेखकों के विचार
शेफ और लेखक राहुल अकेरकर ने परवाना नूरानी के साथ बातचीत में बायोकेमिकल इंजीनियरिंग से लेकर पाक-कला (कुकिंग) की दुनिया तक के अपने सफर के बारे में बताया। उन्होंने अपनी आत्मकथा 'बाइटिंग मोर दैन आई कैन च्यू' से प्रामाणिकता, सादगी और प्रयोग पर जोर दिया। आणविक जीवविज्ञानी से विज्ञान लेखिका बनीं उपासना सर्राजू ने जिज्ञासा और अपरंपरागत सोच की शक्ति पर प्रकाश डाला। लेखक रूपिंदर सिंह और कमला कपूर ने व्यक्तिगत आस्था और सामूहिक पूजा पर विचार रखे। इस सत्र में सिख मूल्यों और गुरु ग्रंथ साहिब के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया गया।