{"_id":"6aac2402eeb8b4d5150b2eed","slug":"homes-filled-with-the-aroma-of-traditional-dishes-during-the-sair-festival-kullu-news-c-89-1-ssml1013-186985-2026-09-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kullu News: सायर पर्व साजा पर पारंपरिक व्यंजनों से महके घर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kullu News: सायर पर्व साजा पर पारंपरिक व्यंजनों से महके घर
विज्ञापन
कुल्लू के भेखली के समीप अपने बड़े बुजुर्ग को ज्रूब देकर अर्शिवाद लेते हुए।-संवाद
- फोटो : 1
कुल्लू। कुल्लू घाटी में पारंपरिक सायर पर्व साजा की धूम रही। इस अवसर पर घाटी के गांवों में उत्सव का उल्लास देखने को मिला। सुबह से ही घरों में पारंपरिक व्यंजन तैयार किए गए और उनकी खुशबू से पूरा वातावरण महक उठा। देवी-देवताओ की पूजा-अर्चना के बाद लोगों ने एक-दूसरे के घर जाकर पारंपरिक पकवानों का स्वाद चखा और पर्व की खुशियां साझा कीं।
साजा उत्सव के दौरान परिवार और समाज में आपसी मेलजोल की परंपरा भी देखने को मिली। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी उत्साह के साथ एक-दूसरे के घर पहुंचे। बच्चों ने बुजुर्गों के घर जाकर उन्हें ध्रुव देकर आशीर्वाद लिया। वहीं, बुजुर्गों ने भी बच्चों को सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया।
कुल्लू घाटी के दलीप, प्रमोद ठाकुर, नारायण, रवि ठाकुर और मनोहर लाल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में साजा पर्व को लेकर सुबह से ही विशेष चहल-पहल रही। घरों में महिलाओं ने पारंपरिक व्यंजन तैयार किए। इसके बाद परिवार और रिश्तेदारों के साथ इन्हें साझा किया गया। लोग पड़ोसियों और रिश्तेदारों के घर पहुंचकर व्यंजनों का स्वाद लेते नजर आए।
विज्ञापन
साजा उत्सव कुल्लू की लोक परंपराओं और सामाजिक भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। इस पर्व के बहाने लोग अपने रिश्तेदारों, पड़ोसियों और परिचितों से मिलते हैं और आपसी संबंधों को मजबूत करते हैं। आधुनिक दौर में भी कुल्लू घाटी के ग्रामीण क्षेत्रों में इस परंपरा को उत्साह के साथ निभाया जा रहा है।
विज्ञापन
साजा उत्सव के दौरान परिवार और समाज में आपसी मेलजोल की परंपरा भी देखने को मिली। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी उत्साह के साथ एक-दूसरे के घर पहुंचे। बच्चों ने बुजुर्गों के घर जाकर उन्हें ध्रुव देकर आशीर्वाद लिया। वहीं, बुजुर्गों ने भी बच्चों को सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया।
विज्ञापन
कुल्लू घाटी के दलीप, प्रमोद ठाकुर, नारायण, रवि ठाकुर और मनोहर लाल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में साजा पर्व को लेकर सुबह से ही विशेष चहल-पहल रही। घरों में महिलाओं ने पारंपरिक व्यंजन तैयार किए। इसके बाद परिवार और रिश्तेदारों के साथ इन्हें साझा किया गया। लोग पड़ोसियों और रिश्तेदारों के घर पहुंचकर व्यंजनों का स्वाद लेते नजर आए।
विज्ञापन
साजा उत्सव कुल्लू की लोक परंपराओं और सामाजिक भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। इस पर्व के बहाने लोग अपने रिश्तेदारों, पड़ोसियों और परिचितों से मिलते हैं और आपसी संबंधों को मजबूत करते हैं। आधुनिक दौर में भी कुल्लू घाटी के ग्रामीण क्षेत्रों में इस परंपरा को उत्साह के साथ निभाया जा रहा है।