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हिमाचल: बोशिया के मैदान में मंडी की अंजलि ठाकुर का कमाल, भारत के नाम हुआ पहला अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण
Wed, 16 Sep 2026 01:29 PM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, गोहर (मंडी )।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोहर (मंडी )।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Wed, 16 Sep 2026 01:29 PM IST
सार
मंडी जिले के गोहर क्षेत्र की बेटी अंजलि ठाकुर ने अंतरराष्ट्रीय बोशिया प्रतियोगिता में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। चेक गणराज्य के पिलसेन में आयोजित पिलसेन-2026 वर्ल्ड बोशिया चैलेंजर में अंजलि ने भारतीय टीम के साथ बीसी-3 पेयर स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। इस वर्ग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का यह पहला स्वर्ण पदक बताया जा रहा है। अंजलि ने प्रियंका, अजेया राज और संदीप के साथ शानदार तालमेल दिखाते हुए कड़े मुकाबलों में जीत दर्ज की।
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गोहर की अंजलि ने बोशिया में रचा इतिहास
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
मंडी जिले के गोहर क्षेत्र की बेटी अंजलि ठाकुर ने अंतरराष्ट्रीय बोशिया प्रतियोगिता में इतिहास रच दिया है। चेक गणराज्य के पिलसेन में आयोजित पिलसेन-2026 वर्ल्ड बोशिया चैलेंजर प्रतियोगिता में अंजलि ने बीसी-3 पेयर स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया। इस स्पर्धा में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को पहली बार स्वर्ण पदक मिला है। अंजलि की इस उपलब्धि से भारतीय बोशिया खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और खेल प्रेमियों में खुशी का माहौल है।
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भारतीय टीम ने दिखाया शानदार तालमेल
अंजलि ने भारतीय टीम के साथियों प्रियंका, अजेया राज और संदीप के साथ शानदार तालमेल दिखाया। प्रतियोगिता के दौरान टीम ने सटीक निशाने, बेहतर रणनीति और आत्मविश्वास के साथ खेलते हुए कड़े मुकाबलों में जीत हासिल की।
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टीम के प्रदर्शन में खिलाड़ियों के बीच समन्वय और लगातार अभ्यास की झलक दिखाई दी। स्वर्ण पदक जीतने के बाद भारतीय दल की इस उपलब्धि को बोशिया खेल के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
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जनैणी गांव में खुशी की लहर
अंजलि ठाकुर मंडी जिले के गोहर उपमंडल की मौवीसेरी पंचायत के जनैणी गांव की रहने वाली हैं। उनकी जीत की खबर जैसे ही गांव और परिजनों तक पहुंची, खुशी की लहर दौड़ गई। अंजलि फिलहाल अपनी टीम के साथ पिलसेन में हैं।
परिजनों ने फोन पर अंजलि को जीत की बधाई दी और भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं दीं। परिवार का कहना है कि अंजलि ने अपनी मेहनत, लगन और मजबूत हौसले से यह मुकाम हासिल किया है।
क्या है बोशिया खेल?
बोशिया एक इनडोर खेल है, जिसे गंभीर शारीरिक अक्षमता वाले खिलाड़ियों के लिए विकसित किया गया है। यह पैरालंपिक खेलों का हिस्सा है। इस खेल में सफेद रंग की गेंद को ‘जैक’ कहा जाता है। खिलाड़ी लाल और नीली गेंदों को जैक के अधिक से अधिक करीब पहुंचाने का प्रयास करते हैं।
सभी गेंदें खेले जाने के बाद जैक के सबसे करीब गेंद रखने वाले खिलाड़ी या टीम को अंक मिलते हैं। कई बार विजेता का फैसला गेंदों की दूरी मिलीमीटर तक मापकर किया जाता है। खिलाड़ी आमतौर पर व्हीलचेयर पर बैठकर इस खेल में हिस्सा लेते हैं।
कार दुर्घटना के बाद बदली जिंदगी की दिशा
मौवीसेरी पंचायत के जनैणी गांव की अंजलि ठाकुर ने कार दुर्घटना के बाद अपनी जिंदगी को नई दिशा दी। दुर्घटना में गर्दन के नीचे का हिस्सा काम करना बंद हो गया, लेकिन अंजलि का हौसला नहीं टूटा।
उन्होंने बोशिया खेल को अपनी जिंदगी का सहारा बनाया और लगातार मेहनत करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। आज उनकी उपलब्धि न केवल परिवार और गांव, बल्कि पूरे हिमाचल और देश के लिए गर्व का विषय बन गई है।
मेहनत के दम पर सपना किया साकार
अंजलि का सपना बोशिया खेल में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना था, जिसे उन्होंने कड़ी मेहनत और लगन से पूरा कर दिखाया। बेटी से जीत की जानकारी मिलने के बाद पिता दमेश्वर दत्त और माता पार्वती देवी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
दूरभाष पर अंजलि ने बताया कि देश के लिए पदक जीतने का सपना पूरा हो गया है। उन्होंने कहा कि अब उनका लक्ष्य अगले महीने जापान में होने वाली प्रतियोगिता में भी जीत का सिलसिला जारी रखना है।
पिता दमेश्वर दत्त और माता पार्वती देवी ने कहा कि अंजलि की मेहनत और हौसले का परिणाम स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया है। उन्होंने बताया कि अंजलि बुधवार को यूरोप से चंडीगढ़ पहुंचेगी। बेटी के घर लौटने का परिवार बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
मौवीसेरी पंचायत के जनैणी गांव की अंजलि ठाकुर ने कार दुर्घटना के बाद अपनी जिंदगी को नई दिशा दी। दुर्घटना में गर्दन के नीचे का हिस्सा काम करना बंद हो गया, लेकिन अंजलि का हौसला नहीं टूटा।
उन्होंने बोशिया खेल को अपनी जिंदगी का सहारा बनाया और लगातार मेहनत करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। आज उनकी उपलब्धि न केवल परिवार और गांव, बल्कि पूरे हिमाचल और देश के लिए गर्व का विषय बन गई है।
मेहनत के दम पर सपना किया साकार
अंजलि का सपना बोशिया खेल में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना था, जिसे उन्होंने कड़ी मेहनत और लगन से पूरा कर दिखाया। बेटी से जीत की जानकारी मिलने के बाद पिता दमेश्वर दत्त और माता पार्वती देवी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
दूरभाष पर अंजलि ने बताया कि देश के लिए पदक जीतने का सपना पूरा हो गया है। उन्होंने कहा कि अब उनका लक्ष्य अगले महीने जापान में होने वाली प्रतियोगिता में भी जीत का सिलसिला जारी रखना है।
पिता दमेश्वर दत्त और माता पार्वती देवी ने कहा कि अंजलि की मेहनत और हौसले का परिणाम स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया है। उन्होंने बताया कि अंजलि बुधवार को यूरोप से चंडीगढ़ पहुंचेगी। बेटी के घर लौटने का परिवार बेसब्री से इंतजार कर रहा है।