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हिमाचल: कोल डैम में दिखेगा कश्मीर जैसा नजारा, शिकारा बोटिंग शुरू करने की तैयारी; स्थानीय ने उठाई ये मांग
Sun, 25 Oct 2026 11:57 AM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 25 Oct 2026 11:57 AM IST
सार
मंडी जिले के कोल डैम में जल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शिकारा बोटिंग शुरू करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इससे क्षेत्र में कश्मीर जैसा नजारा देखने को मिल सकता है और पर्यटन कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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कोल डैम में शिकारा बोटिंग की तैयारी
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
कोल डैम में जल पर्यटन और जल क्रीड़ा गतिविधियां शुरू होने से क्षेत्र में पर्यटन कारोबार बढ़ने की उम्मीद जगी है। यहां शिकारा बोटिंग शुरू करने की भी योजना है। ऐसा होने पर पर्यटक कोल डैम में कश्मीर जैसा नजारा देख सकेंगे। इस बीच, वर्षों से पारंपरिक नाव चलाकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे स्थानीय बोट मालिकों ने पर्यटन गतिविधियों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि सरकार जल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सुविधाएं उपलब्ध करवा रही है तो स्थानीय लोगों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए।
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आधुनिक स्पीड बोट और क्रूज से कारोबार प्रभावित होने की चिंता
स्थानीय बोट मालिकों को आशंका है कि आधुनिक स्पीड बोट और क्रूज जैसी सुविधाएं शुरू होने से उनका पारंपरिक कारोबार प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि पारंपरिक नावों से पर्यटकों को कम खर्च में सैर करवाने का विकल्प मिल सकता है। इससे कम बजट में घूमने आने वाले पर्यटकों को सुविधा मिलेगी और स्थानीय बोट मालिकों की आमदनी बढ़ने की संभावना भी रहेगी।
स्थानीय बोट मालिकों को आशंका है कि आधुनिक स्पीड बोट और क्रूज जैसी सुविधाएं शुरू होने से उनका पारंपरिक कारोबार प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि पारंपरिक नावों से पर्यटकों को कम खर्च में सैर करवाने का विकल्प मिल सकता है। इससे कम बजट में घूमने आने वाले पर्यटकों को सुविधा मिलेगी और स्थानीय बोट मालिकों की आमदनी बढ़ने की संभावना भी रहेगी।
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स्थानीय लोगों को मिलें शिकारे चलाने के लाइसेंस
बोट मालिकों ने मांग की है कि कोल डैम में शिकारे चलाने की अनुमति स्थानीय लोगों को दी जाए। उनका कहना है कि इस काम के लिए किसी बड़ी पर्यटन कंपनी के बजाय स्थानीय बोट मालिकों को लाइसेंस दिए जाने चाहिए, ताकि पर्यटन विकास का लाभ क्षेत्र के लोगों तक पहुंचे। क्षेत्र में करीब 10 से 15 परिवार पुराने बोट चलाकर अपनी आजीविका चला रहे हैं।
बोट मालिकों ने मांग की है कि कोल डैम में शिकारे चलाने की अनुमति स्थानीय लोगों को दी जाए। उनका कहना है कि इस काम के लिए किसी बड़ी पर्यटन कंपनी के बजाय स्थानीय बोट मालिकों को लाइसेंस दिए जाने चाहिए, ताकि पर्यटन विकास का लाभ क्षेत्र के लोगों तक पहुंचे। क्षेत्र में करीब 10 से 15 परिवार पुराने बोट चलाकर अपनी आजीविका चला रहे हैं।
ऐहन कोल डैम के बोट मालिक गीता राम ने बताया कि वह पिछले 15 साल से पारंपरिक नाव चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। उनका कहना है कि पर्यटन गतिविधियां शुरू होने से उन्हें भी पर्यटकों को कम खर्च में सैर करवाने का अवसर मिल सकता है। इससे उनकी आमदनी बढ़ने की उम्मीद है।
वहीं, बोट मालिक कांशी राम ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कोल डैम में शिकारे चलाने की बात कही है। उन्होंने मांग की कि इसका लाभ किसी बड़ी जल पर्यटन कंपनी को देने के बजाय स्थानीय पुराने बोट मालिकों को लाइसेंस दिए जाएं। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।
वहीं, बोट मालिक कांशी राम ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कोल डैम में शिकारे चलाने की बात कही है। उन्होंने मांग की कि इसका लाभ किसी बड़ी जल पर्यटन कंपनी को देने के बजाय स्थानीय पुराने बोट मालिकों को लाइसेंस दिए जाएं। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।
पंजीकरण करवाकर जिला जल पर्यटन समिति के समक्ष रखें मांग
पर्यटन विभाग मंडी के उपनिदेशक रजनीश शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बढ़ने के साथ शिकारे चलाने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इसके लिए स्थानीय बोट मालिकों को पंजीकरण करवाकर जिला जल पर्यटन समिति के समक्ष अपनी मांग रखनी होगी। उन्होंने बताया कि शिकारे चलाने के लिए फाइबर बोट होना भी जरूरी है।
पर्यटन विभाग मंडी के उपनिदेशक रजनीश शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बढ़ने के साथ शिकारे चलाने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इसके लिए स्थानीय बोट मालिकों को पंजीकरण करवाकर जिला जल पर्यटन समिति के समक्ष अपनी मांग रखनी होगी। उन्होंने बताया कि शिकारे चलाने के लिए फाइबर बोट होना भी जरूरी है।