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Mandi News: विभाजन की त्रासदी के मानवीय पक्ष से रूबरू हुए विद्यार्थी

Sat, 15 Aug 2026 12:19 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 15 Aug 2026 12:19 AM IST
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Students encountered the human side of the tragedy of Partition.
सरदार पटेल विश्वविद्यालय में प्रदर्शनी में दिखी 1947 की त्रासदी
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के इतिहास विभाग की ओर से भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर मांडव परिसर में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान लगाई गई प्रदर्शनी में वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान हुए विस्थापन, मानवीय पीड़ा, सामाजिक विघटन और शरणार्थियों के पुनर्वास से जुड़े दस्तावेज और चित्र प्रदर्शित किए गए। प्रदर्शनी के माध्यम से विद्यार्थियों को विभाजन की त्रासदी के मानवीय पक्ष से रूबरू कराया गया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य ललित कुमार अवस्थी मुख्य अतिथि, डॉ. जय इंद्रपाल विशिष्ट अतिथि और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली के बृहत्तर भारत एवं क्षेत्रीय अध्ययन विभाग के अध्यक्ष प्रो. धर्म चंद चौबे मुख्य वक्ता रहे। कुलपति आचार्य ललित कुमार अवस्थी ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस उन असंख्य लोगों की पीड़ा, संघर्ष और बलिदान को याद करने का अवसर है, जिन्होंने विभाजन के दौरान अपार कष्ट झेले। इतिहास को याद करने का उद्देश्य वैमनस्य पैदा करना नहीं, बल्कि अतीत से सीख लेकर सशक्त, समरस और एकजुट भारत का निर्माण करना होना चाहिए। मुख्य वक्ता प्रो. धर्म चंद चौबे ने ऑनलाइन संबोधन में कहा कि विभाजन केवल ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि लाखों लोगों के संघर्ष, पीड़ा और विस्थापन की त्रासदी थी। उन्होंने विभाजन में अपने परिजनों और घरों को खोने वाले लोगों के साहस और धैर्य को भी याद करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में लोगों ने जीवन को दोबारा खड़ा किया और राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया।
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डॉ. पवन कुमार चंद ने कहा कि विभाजन की स्मृतियां आज भी कई परिवारों और समुदायों की सामूहिक चेतना में मौजूद हैं। डॉ. जय इंद्रपाल ने विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और इसके दूरगामी प्रभावों पर विचार रखे।
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