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Mandi News: नगर निगम के महापौर-उप महापौर और पार्षदों का आज कार्यकाल होगा खत्म
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13 अप्रैल 2021 के दिन पार्षदों ने ग्रहण की थी शपथ
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। नगर निगम के पार्षदों, महापौर और उपमहापौर का पांच वर्ष का कार्यकाल बैसाखी पर्व के अवसर पर समाप्त हो रहा है। सोमवार को उनका कार्यकाल आधिकारिक रूप से खत्म हो जाएगा। पांच साल पहले, 13 अप्रैल 2021 को पार्षदों ने शपथ ग्रहण की थी।
म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट के अनुसार कार्यकाल समाप्त होते ही महापौर, उपमहापौर और पार्षदों की शक्तियां समाप्त हो जाएंगी और नगर निगम की पूरी प्रशासनिक जिम्मेदारी आयुक्त के हाथों में आ जाएगी। इसके साथ ही महापौर को सरकारी वाहन और अन्य सुविधाएं भी वापस करनी होंगी।
इस मौके पर जहां बैसाखी पर्व की रौनक रहेगी, वहीं चुने हुए प्रतिनिधियों के लिए यह कार्यकाल का अंतिम दिन होगा। हाल ही में जारी आरक्षण रोस्टर ने कई दिग्गजों के राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं, जिससे कई वार्ड अब अन्य श्रेणियों और महिलाओं के लिए आरक्षित हो गए हैं। कुछ पार्षदों ने इस बदलाव को लेकर न्यायालय का भी रुख किया है।
महापौर वीरेंद्र भट्ट शर्मा ने कहा है कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद वे पद पर नहीं रहेंगे और उन्हें जो भी सरकारी सुविधाएं प्राप्त थीं, वे सभी वापस कर दी जाएंगी। वे लोगों के कार्यों में हर संभव मदद जारी रखने की बात भी कह रहे हैं। नगर निगम आयुक्त रोहित राठौर ने स्पष्ट किया कि पार्षदों का पाँच वर्ष का कार्यकाल शपथ ग्रहण की तिथि (13 अप्रैल 2021) से माना जाता है, और उसी आधार पर यह कार्यकाल 13 अप्रैल को समाप्त हो रहा है।
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मंडी। नगर निगम के पार्षदों, महापौर और उपमहापौर का पांच वर्ष का कार्यकाल बैसाखी पर्व के अवसर पर समाप्त हो रहा है। सोमवार को उनका कार्यकाल आधिकारिक रूप से खत्म हो जाएगा। पांच साल पहले, 13 अप्रैल 2021 को पार्षदों ने शपथ ग्रहण की थी।
म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट के अनुसार कार्यकाल समाप्त होते ही महापौर, उपमहापौर और पार्षदों की शक्तियां समाप्त हो जाएंगी और नगर निगम की पूरी प्रशासनिक जिम्मेदारी आयुक्त के हाथों में आ जाएगी। इसके साथ ही महापौर को सरकारी वाहन और अन्य सुविधाएं भी वापस करनी होंगी।
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इस मौके पर जहां बैसाखी पर्व की रौनक रहेगी, वहीं चुने हुए प्रतिनिधियों के लिए यह कार्यकाल का अंतिम दिन होगा। हाल ही में जारी आरक्षण रोस्टर ने कई दिग्गजों के राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं, जिससे कई वार्ड अब अन्य श्रेणियों और महिलाओं के लिए आरक्षित हो गए हैं। कुछ पार्षदों ने इस बदलाव को लेकर न्यायालय का भी रुख किया है।
महापौर वीरेंद्र भट्ट शर्मा ने कहा है कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद वे पद पर नहीं रहेंगे और उन्हें जो भी सरकारी सुविधाएं प्राप्त थीं, वे सभी वापस कर दी जाएंगी। वे लोगों के कार्यों में हर संभव मदद जारी रखने की बात भी कह रहे हैं। नगर निगम आयुक्त रोहित राठौर ने स्पष्ट किया कि पार्षदों का पाँच वर्ष का कार्यकाल शपथ ग्रहण की तिथि (13 अप्रैल 2021) से माना जाता है, और उसी आधार पर यह कार्यकाल 13 अप्रैल को समाप्त हो रहा है।