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Rampur Bushahar News: पांवटा डिपो को लकड़ी ढोने पर ट्रक यूनियनों ने जताई आपत्ति
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वन निगम के सरस्वतीनगर मंडल से हर वर्ष बद्दी भेजे जाते हैं इमारती लकड़ी के हजारों ट्रक
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। वन निगम के सरस्वतीनगर मंडल से हर वर्ष हजाराें ट्रक इमारती लकड़ियां लेकर बद्दी स्थित निगम के डिपो में जाते हैं। लकड़ियों को शिफ्ट करने के लिए रोहड़ू और सावड़ा ट्रक यूनियन से ट्रक हायर किए जाते हैं, लेकिन अब वन निगम ने क्षेत्र से 60 प्रतिशत लकड़ी को पांवटा स्थित डिपो में भेजने का फरमान जारी किया है। निगम के इस फरमान पर ट्रक यूनियनों ने आपत्ति जताई है। सावड़ा और रोहड़ू ट्रक यूनियन ने अतिरिक्त टैक्स और मार्ग में असुरक्षा को देखते हुए पांवटा लकड़ी ले जाने पर आपत्ति जताई है। यूनियनों की गुहार है कि पांवटा जाने के लिए उत्तराखंड होते हुए जाना पड़ता है। दूसरे राज्य से होते हुए जाने पर ट्रकों को अतिरिक्त टैक्स देना होगा। नियमानुसार लकड़ी को सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले ही ढोना पड़ता है। रात को लकड़ी से भरे ट्रक को सड़क के किनारे खड़ा रखना पड़ेगा। पांवटा जाने वाला मार्ग सुनसान है, जिस कारण वहां हमेशा लकड़ी की चोरी का खतरा बना रहेगा। चालक और ट्रक भी सुरक्षित नहीं है। लड़की को बद्दी ले जाने के बाद वहां से वापस ट्रक को लोड मिलता है, लेकिन पांवटा से वापस ट्रकों को खाली आना पड़ता है, इसलिए यूनियनों ने वन निगम के मंडल कार्यालय में पत्र भेजकर पांवटा डिपो लकड़ी ढोने में असमर्थता जताई है।
अभी तक सारी लकड़ी बद्दी डिपो में जा रही है। अब पांवटा डिपो को लकड़ी भेजी जानी है, लेकिन ट्रक यूनियनों ने पांवटा के लिए विभिन्न कारणों से लकड़ी ढोने पर असमर्थता जताई है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को सूचित किया गया है। - धर्म चंद शर्मा, डीएम, वन निगम सरस्वतीनगर मंडल
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रोहड़ू। वन निगम के सरस्वतीनगर मंडल से हर वर्ष हजाराें ट्रक इमारती लकड़ियां लेकर बद्दी स्थित निगम के डिपो में जाते हैं। लकड़ियों को शिफ्ट करने के लिए रोहड़ू और सावड़ा ट्रक यूनियन से ट्रक हायर किए जाते हैं, लेकिन अब वन निगम ने क्षेत्र से 60 प्रतिशत लकड़ी को पांवटा स्थित डिपो में भेजने का फरमान जारी किया है। निगम के इस फरमान पर ट्रक यूनियनों ने आपत्ति जताई है। सावड़ा और रोहड़ू ट्रक यूनियन ने अतिरिक्त टैक्स और मार्ग में असुरक्षा को देखते हुए पांवटा लकड़ी ले जाने पर आपत्ति जताई है। यूनियनों की गुहार है कि पांवटा जाने के लिए उत्तराखंड होते हुए जाना पड़ता है। दूसरे राज्य से होते हुए जाने पर ट्रकों को अतिरिक्त टैक्स देना होगा। नियमानुसार लकड़ी को सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले ही ढोना पड़ता है। रात को लकड़ी से भरे ट्रक को सड़क के किनारे खड़ा रखना पड़ेगा। पांवटा जाने वाला मार्ग सुनसान है, जिस कारण वहां हमेशा लकड़ी की चोरी का खतरा बना रहेगा। चालक और ट्रक भी सुरक्षित नहीं है। लड़की को बद्दी ले जाने के बाद वहां से वापस ट्रक को लोड मिलता है, लेकिन पांवटा से वापस ट्रकों को खाली आना पड़ता है, इसलिए यूनियनों ने वन निगम के मंडल कार्यालय में पत्र भेजकर पांवटा डिपो लकड़ी ढोने में असमर्थता जताई है।
अभी तक सारी लकड़ी बद्दी डिपो में जा रही है। अब पांवटा डिपो को लकड़ी भेजी जानी है, लेकिन ट्रक यूनियनों ने पांवटा के लिए विभिन्न कारणों से लकड़ी ढोने पर असमर्थता जताई है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को सूचित किया गया है। - धर्म चंद शर्मा, डीएम, वन निगम सरस्वतीनगर मंडल
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