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Sirmour News: चेक बाउंस मामले में दोषी की एक साल की सजा बरकरार, अपील खारिज
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अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को ठहराया सही, 5 लाख मुआवजा देने के आदेश
साल 2016 में तहसील पच्छाद क्षेत्र का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने चेक बाउंस मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी जितेंद्र सिंह की अपील खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन ने निचली अदालत की ओर से सुनाई गई एक साल की सजा और 5 लाख रुपये के मुआवजे आदेश को बरकरार रखा है।
यह मामला साल 2016 को तहसील पच्छाद क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता सुखचैन सिंह ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उससे 2.48 लाख रुपये उधार लिए थे। राशि लौटाने के लिए आरोपी ने 5 अक्तूबर 2016 को चेक जारी किया, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर चेक अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद न्यायालय में शिकायत दायर की गई। न्यायिक मजिस्ट्रेट, राजगढ़ ने 13 अगस्त 2024 को आरोपी को एनआई एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए सजा और मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। मुआवजा न देने की स्थिति में एक माह अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान किया गया था।
इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। आरोपी ने दावा किया कि शिकायत समय से पहले दायर की गई थी। अदालत ने पाया कि आरोपी अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। न्यायालय ने माना कि चेक आरोपी के खाते का था और उसके दुरुपयोग की कोई शिकायत भी दर्ज नहीं कराई गई थी। न्यायालय ने माना कि निचली अदालत ने साक्ष्यों का सही मूल्यांकन किया है और इसी आधार पर अपील खारिज कर दी गई।
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साल 2016 में तहसील पच्छाद क्षेत्र का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने चेक बाउंस मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी जितेंद्र सिंह की अपील खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन ने निचली अदालत की ओर से सुनाई गई एक साल की सजा और 5 लाख रुपये के मुआवजे आदेश को बरकरार रखा है।
यह मामला साल 2016 को तहसील पच्छाद क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता सुखचैन सिंह ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उससे 2.48 लाख रुपये उधार लिए थे। राशि लौटाने के लिए आरोपी ने 5 अक्तूबर 2016 को चेक जारी किया, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर चेक अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद न्यायालय में शिकायत दायर की गई। न्यायिक मजिस्ट्रेट, राजगढ़ ने 13 अगस्त 2024 को आरोपी को एनआई एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए सजा और मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। मुआवजा न देने की स्थिति में एक माह अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान किया गया था।
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इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। आरोपी ने दावा किया कि शिकायत समय से पहले दायर की गई थी। अदालत ने पाया कि आरोपी अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। न्यायालय ने माना कि चेक आरोपी के खाते का था और उसके दुरुपयोग की कोई शिकायत भी दर्ज नहीं कराई गई थी। न्यायालय ने माना कि निचली अदालत ने साक्ष्यों का सही मूल्यांकन किया है और इसी आधार पर अपील खारिज कर दी गई।