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Sirmour News: अदालत 3
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सात वर्षीय बच्चे के साथ दुष्कर्म मामले में साक्ष्यों
में गंभीर संदेह का आरोपी को मिला फायदा, बरी
- साल 2023 में पांवटा साहिब थाना का मामला, बच्चे के साथ 4 अलग-अलग स्थानों पर अप्राकृतिक कृत्य करने के लगे थे आरोप
- डीएनए रिपोर्ट ने नहीं दिया साथ, मेडिकल और वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं बने आधार, गवाही में विरोधाभास
- कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कानूनी सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा, संदेह का लाभ देना होगा
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। किशोर न्याय बोर्ड ने यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी के आरोपों से घिरे एक नाबालिग को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। इस पर सात वर्षीय बालक के साथ अलग-अलग स्थानों पर चार बार अप्राकृतिक कृत्य (दुष्कर्म) और धमकी देने के आरोप थे। बोर्ड ने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के स्थापित कानूनी सिद्धांत का उल्लेख करते कहा है कि यदि साक्ष्यों में गंभीर संदेह हो तो आरोपी को उसका लाभ दिया जाना चाहिए। सभी तथ्यों, गवाहों और वैज्ञानिक रिपोर्टों पर विचार करने के बाद बोर्ड ने आरोपी नाबालिग को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
मामला फरवरी, 2023 में थाना पांवटा साहिब में दर्ज है। आरोपी पर आईपीसी की धारा 377 व 506 तथा बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम की धारा 6 के तहत गंभीर आरोप लगाए गए थे। सुनवाई के दौरान मेडिकल रिपोर्ट में यौन शोषण के स्पष्ट संकेत नहीं मिले। डीएनए जांच में भी आरोपी और कथित पीड़ित के बीच कोई निर्णायक वैज्ञानिक कड़ी स्थापित नहीं हो सकी। बोर्ड ने आदेश में कहा कि जब वैज्ञानिक साक्ष्य आरोपों की पुष्टि नहीं करते और प्रत्यक्षदर्शी गवाह भी नहीं हैं, तो केवल आरोपों के आधार पर दोषसिद्धि संभव नहीं।
पीड़ित और उसके परिजनों के बयानों में समय, स्थान और घटनाक्रम को लेकर अंतर पाया गया। जांच के दौरान दोनों परिवारों के बीच पुराने भूमि विवाद की बात भी सामने आई, जिसने मामले को और जटिल बना दिया। बोर्ड ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में गवाही का विश्वसनीय और सुसंगत होना अत्यंत आवश्यक है।
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यह है पूरा मामला
पीड़ित की मां के अनुसार, उनके बड़े बेटे को 2-3 दिनों से पेट दर्द की शिकायत थी। उससे इस बारे में पूछा, तो वह डर गया और रोने लगा। बाद में पीड़ित बच्चे ने मां को बताया कि 13 फरवरी को शाम 6:30 बजे वह अपने घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान पड़ोस का एक लड़का उसे बहला-फुसलाकर एक निर्माणाधीन मकान में ले गया, जहां पर उसके साथ दुष्कर्म किया। साथ ही घटना की जानकारी किसी और को बताने पर धमकी दी थी।
संवाद
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में गंभीर संदेह का आरोपी को मिला फायदा, बरी
- साल 2023 में पांवटा साहिब थाना का मामला, बच्चे के साथ 4 अलग-अलग स्थानों पर अप्राकृतिक कृत्य करने के लगे थे आरोप
- डीएनए रिपोर्ट ने नहीं दिया साथ, मेडिकल और वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं बने आधार, गवाही में विरोधाभास
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दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। किशोर न्याय बोर्ड ने यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी के आरोपों से घिरे एक नाबालिग को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। इस पर सात वर्षीय बालक के साथ अलग-अलग स्थानों पर चार बार अप्राकृतिक कृत्य (दुष्कर्म) और धमकी देने के आरोप थे। बोर्ड ने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के स्थापित कानूनी सिद्धांत का उल्लेख करते कहा है कि यदि साक्ष्यों में गंभीर संदेह हो तो आरोपी को उसका लाभ दिया जाना चाहिए। सभी तथ्यों, गवाहों और वैज्ञानिक रिपोर्टों पर विचार करने के बाद बोर्ड ने आरोपी नाबालिग को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
मामला फरवरी, 2023 में थाना पांवटा साहिब में दर्ज है। आरोपी पर आईपीसी की धारा 377 व 506 तथा बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम की धारा 6 के तहत गंभीर आरोप लगाए गए थे। सुनवाई के दौरान मेडिकल रिपोर्ट में यौन शोषण के स्पष्ट संकेत नहीं मिले। डीएनए जांच में भी आरोपी और कथित पीड़ित के बीच कोई निर्णायक वैज्ञानिक कड़ी स्थापित नहीं हो सकी। बोर्ड ने आदेश में कहा कि जब वैज्ञानिक साक्ष्य आरोपों की पुष्टि नहीं करते और प्रत्यक्षदर्शी गवाह भी नहीं हैं, तो केवल आरोपों के आधार पर दोषसिद्धि संभव नहीं।
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पीड़ित और उसके परिजनों के बयानों में समय, स्थान और घटनाक्रम को लेकर अंतर पाया गया। जांच के दौरान दोनों परिवारों के बीच पुराने भूमि विवाद की बात भी सामने आई, जिसने मामले को और जटिल बना दिया। बोर्ड ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में गवाही का विश्वसनीय और सुसंगत होना अत्यंत आवश्यक है।
यह है पूरा मामला
पीड़ित की मां के अनुसार, उनके बड़े बेटे को 2-3 दिनों से पेट दर्द की शिकायत थी। उससे इस बारे में पूछा, तो वह डर गया और रोने लगा। बाद में पीड़ित बच्चे ने मां को बताया कि 13 फरवरी को शाम 6:30 बजे वह अपने घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान पड़ोस का एक लड़का उसे बहला-फुसलाकर एक निर्माणाधीन मकान में ले गया, जहां पर उसके साथ दुष्कर्म किया। साथ ही घटना की जानकारी किसी और को बताने पर धमकी दी थी।
संवाद