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हिमाचल: 11 दिसंबर से पहले होगा मंत्रिमंडल विस्तार, सीएम सुक्खू बोले- विभागों में फेरबदल पर भी चर्चा जारी
Fri, 25 Sep 2026 03:40 PM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन।
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Fri, 25 Sep 2026 03:40 PM IST
सार
Himachal Cabinet Reshuffle Sukhu Solan: सोलन के कोठों में आयोजित शैक्षणिक सम्मेलन के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि 11 दिसंबर से पहले मंत्रिमंडल विस्तार करने की पूरी कोशिश है। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल और विभागों में फेरबदल को लेकर चर्चा जारी रहनी चाहिए।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बड़ा संकेत दिया है। सोलन के कोठों में आयोजित शैक्षणिक सम्मेलन सत्र में भाग लेने के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि 11 दिसंबर से पहले मंत्रिमंडल का विस्तार करने की पूरी कोशिश की जा रही है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों में फेरबदल को लेकर चर्चा चलती रहनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार के चार साल का कार्यकाल 11 दिसंबर को पूरा हो रहा है और प्रयास है कि उससे पहले मंत्रिमंडल विस्तार कर दिया जाए।
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एक मंत्री और डिप्टी स्पीकर का पद खाली
सुक्खू ने बताया कि वर्तमान में मंत्रिमंडल में एक पद रिक्त है। इसके अलावा डिप्टी स्पीकर का पद भी खाली चल रहा है। मंत्रिमंडल विस्तार में किन विधायकों को जगह मिल सकती है या विभागों में किन स्तरों पर बदलाव होगा, मुख्यमंत्री ने इस संबंध में कोई नाम या विस्तृत जानकारी नहीं दी। ऐसे में संभावित नए मंत्रियों और विभागों के बंटवारे को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब सरकार के चार साल पूरे होने में करीब ढाई महीने का समय बचा है।
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विभागों में फेरबदल पर भी चर्चा
मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही विभागों में फेरबदल को लेकर भी चर्चा जारी रहने की बात कही। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन विभागों में बदलाव प्रस्तावित है। मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के पुनर्वितरण का अंतिम फैसला मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व के स्तर पर होने की संभावना है। फिलहाल सरकार की ओर से किसी संभावित नाम या विभाग की आधिकारिक सूची सामने नहीं आई है।
किशाऊ परियोजना पर भी बोले मुख्यमंत्री
पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश में भाजपा की सरकार होती तो परियोजना के मामले में हिमाचल के साथ भी उत्तराखंड जैसा व्यवहार होता।
किशाऊ परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश समेत छह राज्यों—हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली—ने सितंबर 2026 में समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। केंद्र सरकार के अनुसार परियोजना टोंस नदी पर हिमाचल-उत्तराखंड सीमा के पास 232.6 मीटर ऊंचे बांध के निर्माण से जुड़ी है। इसकी जल भंडारण क्षमता 1,562 मिलियन घन मीटर होगी और परियोजना से 1,476 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का प्रावधान है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने अलग-अलग मौकों पर कहा है कि नए समझौते के तहत हिमाचल को परियोजना से करीब 1,200 से 1,500 करोड़ रुपये के वार्षिक लाभ की उम्मीद है और राज्य पर परियोजना की लागत का अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। हालांकि किशाऊ समझौते को लेकर भाजपा की ओर से अलग सवाल उठाए गए हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने मुख्यमंत्री के आर्थिक लाभ संबंधी दावों पर सवाल उठाते हुए श्वेतपत्र की मांग की है।
चार साल पूरे होने से पहले विस्तार पर नजर
मुख्यमंत्री के ताजा बयान के बाद अब प्रदेश की राजनीति में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। खास तौर पर एक मंत्री पद और डिप्टी स्पीकर का पद रिक्त होने के कारण संभावित नियुक्तियों को लेकर राजनीतिक हलकों में नजर बनी हुई है। हालांकि मुख्यमंत्री ने केवल 11 दिसंबर से पहले विस्तार करने की कोशिश की बात कही है। उन्होंने यह नहीं बताया कि विस्तार की तारीख क्या होगी और किन विधायकों को इसमें शामिल किया जाएगा।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश में भाजपा की सरकार होती तो परियोजना के मामले में हिमाचल के साथ भी उत्तराखंड जैसा व्यवहार होता।
किशाऊ परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश समेत छह राज्यों—हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली—ने सितंबर 2026 में समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। केंद्र सरकार के अनुसार परियोजना टोंस नदी पर हिमाचल-उत्तराखंड सीमा के पास 232.6 मीटर ऊंचे बांध के निर्माण से जुड़ी है। इसकी जल भंडारण क्षमता 1,562 मिलियन घन मीटर होगी और परियोजना से 1,476 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का प्रावधान है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने अलग-अलग मौकों पर कहा है कि नए समझौते के तहत हिमाचल को परियोजना से करीब 1,200 से 1,500 करोड़ रुपये के वार्षिक लाभ की उम्मीद है और राज्य पर परियोजना की लागत का अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। हालांकि किशाऊ समझौते को लेकर भाजपा की ओर से अलग सवाल उठाए गए हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने मुख्यमंत्री के आर्थिक लाभ संबंधी दावों पर सवाल उठाते हुए श्वेतपत्र की मांग की है।
चार साल पूरे होने से पहले विस्तार पर नजर
मुख्यमंत्री के ताजा बयान के बाद अब प्रदेश की राजनीति में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। खास तौर पर एक मंत्री पद और डिप्टी स्पीकर का पद रिक्त होने के कारण संभावित नियुक्तियों को लेकर राजनीतिक हलकों में नजर बनी हुई है। हालांकि मुख्यमंत्री ने केवल 11 दिसंबर से पहले विस्तार करने की कोशिश की बात कही है। उन्होंने यह नहीं बताया कि विस्तार की तारीख क्या होगी और किन विधायकों को इसमें शामिल किया जाएगा।