मुश्किल: नौणी विश्वविद्यालय में आर्थिक संकट, गैर-जरूरी खर्चों पर लगी रोक; वित्त पोषित योजनाएं भी स्थगित
हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी आर्थिक संकट से जूझ रहा है। सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं मिलने और वेतन-पेंशन के बढ़ते बोझ के चलते विश्वविद्यालय प्रशासन ने खर्चों में कटौती का फैसला लिया है। पढ़ें पूरी खबर...
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प्रदेश सरकार से समय पर पर्याप्त फंड नहीं मिलने के कारण डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसके मुख्य परिसर समेत प्रदेशभर में संचालित सभी केंद्रों में गैर-जरूरी खर्चों पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही प्रशासन की ओर से संचालित वित्त पोषित योजनाओं को भी स्थगित कर दिया गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के भुगतान में लगातार वित्तीय कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय पर महत्वपूर्ण वैधानिक और न्यायालय के निर्देशों के तहत देनदारियां भी हैं। इस संबंध में 30 अक्तूबर को अधिसूचना जारी की गई है।
आदेश में सभी विभागाध्यक्षों, डीन, निदेशकों, कार्यालय प्रमुखों और बाहरी केंद्रों व कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के अनुसंधान सह-निदेशकों (एडीआर) को निर्देश दिए गए हैं कि उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का उपयोग करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। सभी गैर-जरूरी खर्चों में तत्काल प्रभाव से कड़ाई से कटौती की जाएगी।
इनमें कार्यालय आकस्मिक व्यय, सामान एवं उपकरणों की खरीद, उपभोग्य वस्तुएं तथा मरम्मत और रखरखाव पर होने वाला खर्च शामिल है। अन्य व्यय भी कम किया जाएगा। खर्च केवल बेहद जरूरी परिचालन आवश्यकताओं के लिए ही किया जा सकेगा। अधिकारियों की पूर्व स्वीकृति के बिना गैर-जरूरी मदों पर कोई खर्च नहीं किया जाएगा।
राज्य सरकार से समय पर अतिरिक्त वित्तीय सहायता नहीं मिलने के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन को यह कदम उठाना पड़ा है। बताया जा रहा है कि जुलाई में राज्य सरकार ने नौणी विश्वविद्यालय को दिए जाने वाले फंड (121 करोड़) में भी करीब आठ प्रतिशत की कटौती की थी। साथ ही ग्रांट इन एड भी नहीं मिल पाई है। हालांकि, उपलब्ध राशि से मासिक वेतन और पेंशन का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना मुश्किल हो रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले फीस में बढ़ोतरी की थी, लेकिन विरोध के बाद इसे कम कर दिया गया था। वर्तमान में शिमला, सोलन, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और हमीरपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में नौणी विश्वविद्यालय के कॉलेज और कृषि विज्ञान केंद्र संचालित हो रहे हैं।
विश्वविद्यालय के आदेश के अनुसार सभी विभागाध्यक्ष, डीन, निदेशक, कार्यालय प्रमुख और एडीआर इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करेंगे। संबंधित विभागाध्यक्ष और प्रभारी अपने प्रशासनिक नियंत्रण के तहत किसी भी अनावश्यक या अनधिकृत खर्च को रोकने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। निर्देशों से किसी भी तरह के विचलन के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
विवि के समक्ष वेतन एवं पेंशन सहित नियमित वित्तीय दायित्वों के अलावा लंबित देनदारियों और न्यायालयों के निर्देशों के अनुपालन से उत्पन्न अतिरिक्त वित्तीय दायित्वों को पूरा करने की जिम्मेदारी भी है। इसी को ध्यान में रखते हुए अनावश्यक खर्चों में कटौती की गई है। -प्रो. हरमिंदर सिंह बवेजा, कुलपति, नौणी विश्वविद्यालय