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Solan News: नौणी विवि के वैज्ञानिकों ने राष्ट्रीय संगोष्ठी में जीते शीर्ष सम्मान
Sun, 25 Oct 2026 12:53 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sun, 25 Oct 2026 12:53 AM IST
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पाद्प रोग विज्ञान विभाग ने पोस्टर और मौखिक प्रस्तुति दोनों श्रेणियों में लहराया परचम
सीपीआरआई शिमला में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश भर के वैज्ञानिकों ने लिया हिस्सा
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नौणी विवि के पादप रोग विज्ञान विभाग ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया है। विभाग ने पोस्टर और मौखिक प्रस्तुति, दोनों श्रेणियों में शीर्ष सम्मान हासिल किए। ये प्रतिष्ठित पुरस्कार 22 और 23 अक्तूबर, 2026 को आईसीएआर-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘जलवायु सहनशीलता, खाद्य सुरक्षा एवं सतत कृषि के लिए पादप स्वास्थ्य की भावी रणनीतियां’ के दौरान प्रदान किए गए।
दो दिवसीय इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर से प्रख्यात वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों, किसानों, उद्योग प्रतिनिधियों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान पादप स्वास्थ्य से जुड़ी उभरती चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। साथ ही, जलवायु-अनुकूल कृषि, खाद्य सुरक्षा और सतत फसल संरक्षण के लिए नवीन रणनीतियों पर भी चर्चा हुई।
इस संगोष्ठी का संयुक्त आयोजन इंडियन फाइटोपैथोलॉजिकल सोसाइटी, इंडियन पोटैटो एसोसिएशन, इंडियन सोसाइटी ऑफ प्लांट पैथोलॉजिस्ट्स और हिमालयन फाइटोपैथोलॉजिकल सोसायटी ने आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (क्षेत्रीय केंद्र, शिमला) के सहयोग से किया।
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विश्वविद्यालय लौटने पर कुलपति प्रो. एचएस बवेजा ने पुरस्कार विजेता वैज्ञानिकों से मुलाकात कर उन्हें इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने विशेष रूप से पादप रोग विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल हांडा और उनकी पूरी वैज्ञानिक टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित मंच पर उच्च गुणवत्ता वाला वैज्ञानिक शोध प्रस्तुत कर टीम ने विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है।
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सीपीआरआई शिमला में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश भर के वैज्ञानिकों ने लिया हिस्सा
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नौणी विवि के पादप रोग विज्ञान विभाग ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया है। विभाग ने पोस्टर और मौखिक प्रस्तुति, दोनों श्रेणियों में शीर्ष सम्मान हासिल किए। ये प्रतिष्ठित पुरस्कार 22 और 23 अक्तूबर, 2026 को आईसीएआर-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘जलवायु सहनशीलता, खाद्य सुरक्षा एवं सतत कृषि के लिए पादप स्वास्थ्य की भावी रणनीतियां’ के दौरान प्रदान किए गए।
दो दिवसीय इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर से प्रख्यात वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों, किसानों, उद्योग प्रतिनिधियों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान पादप स्वास्थ्य से जुड़ी उभरती चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। साथ ही, जलवायु-अनुकूल कृषि, खाद्य सुरक्षा और सतत फसल संरक्षण के लिए नवीन रणनीतियों पर भी चर्चा हुई।
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इस संगोष्ठी का संयुक्त आयोजन इंडियन फाइटोपैथोलॉजिकल सोसाइटी, इंडियन पोटैटो एसोसिएशन, इंडियन सोसाइटी ऑफ प्लांट पैथोलॉजिस्ट्स और हिमालयन फाइटोपैथोलॉजिकल सोसायटी ने आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (क्षेत्रीय केंद्र, शिमला) के सहयोग से किया।
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विश्वविद्यालय लौटने पर कुलपति प्रो. एचएस बवेजा ने पुरस्कार विजेता वैज्ञानिकों से मुलाकात कर उन्हें इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने विशेष रूप से पादप रोग विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल हांडा और उनकी पूरी वैज्ञानिक टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित मंच पर उच्च गुणवत्ता वाला वैज्ञानिक शोध प्रस्तुत कर टीम ने विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है।