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धर्मपुर सीएचसी के हाल : 20 हजार से ज्यादा आबादी, केवल दो चिकित्सकों के सहारे
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धर्मपुर अस्पताल। संवाद
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परवाणू-शिमला फोरलेन पर आपात में दुर्घटना के दौरान है एकमात्र सहारा
परवाणू-शिमला फोरलेन पर दुर्घटनाओं का पहला सहारा बने अस्पताल से मरीजों को किया जा रहा रेफर
डॉक्टरों की कमी, अल्ट्रासाउंड और सिटी स्कैन जैसी सुविधाएं न होने से मरीज बेहाल
सुरेंद्र ठाकुर
धर्मपुर(सोलन)। सोलन जिले के परवाणू-शिमला फोरलेन पर स्थित एकमात्र कसौली विधानसभा क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धर्मपुर डॉक्टरों और उपकरणों की भारी कमी से जूझ रहा है। यह अस्पताल क्षेत्र की लगभग 20 हजार आबादी की स्वास्थ्य सेवाओं का जिम्मा संभालता है। चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा और अस्पताल केवल एक रेफरल बनकर रह गया है। हाईवे पर स्थित यह अस्पताल अति संवेदनशील माना जाता है क्योंकि अकसर दुर्घटना होने पर सबसे पहले मरीज को यही पर लाया जाता है। मगर यहां पर प्राथमिक उपचार के बाद मरीज को रेफर करना डॉक्टरों की मजबूरी बन जाती है। वर्तमान में अस्पताल में सात चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं मगर दो चिकित्सक ही तैनात हैं, जबकि इसे आदर्श अस्पताल का दर्जा प्राप्त है। जहां कम से कम चार चिकित्सकों की आवश्यकता है। यहां तक की अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ चिकित्सक का पद भी स्वीकृत नहीं है, जिससे क्षेत्र की महिलाओं को भारी परेशानी होती है। महिलाओं को इलाज के लिए सोलन, शिमला या चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों में जाना पड़ता है। कई बार उन्हें महंगे निजी क्लीनिकों में इलाज कराने को मजबूर होना पड़ता है। इसके अलावा नर्सों और फील्ड स्टाफ के भी एक दर्जन से ज्यादा पद रिक्त चल रहे हैं। अस्पताल में आने वाले लगभग सभी मरीजों को आगे रेफर कर दिया जाता है। एक्सरे सुविधा भी कम वोल्टेज में काम नहीं करती, जिससे मरीजों को और दिक्कत होती है। संवाद
अस्पताल में सिर्फ एक्सरे मशीन
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में केवल एक एक्सरे मशीन हैं जो लो वोल्टेज होने पर ठप हो जाती है। इसके अलावा न तो यहां पर अल्ट्रासाउंड होता है और न ही सिटी स्कैन की सुविधा है। अन्य कई जरूरी टेस्ट के लिए भी मरीजों को सोलन भेजा जाता है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं व आपात में आए मरीजों को होती है क्योंकि उन्हें अल्ट्रासाउंड या अन्य टेस्ट निजी क्लीनिकों में महंगे दामों पर करवाने पड़ते हैं।
सरकारों की अनदेखी का शिकार अस्पताल
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन किसी ने भी अस्पताल में डॉक्टरों व उपकरणों की कमी दूर करने का प्रयास नहीं किया। भाजपा सरकार के कार्यकाल में इस अस्पताल को 50 बिस्तर वाले नागरिक अस्पताल में बदलने की अधिसूचना जारी हुई थी। इसके भवन निर्माण के लिए शिलान्यास भी किया गया था। हालांकि, सरकार बदलने के बाद यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। स्थानीय लोगों की मांगें हर सरकार के सामने नाकाम साबित हुई हैं।
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केस स्टडी-1
धर्मपुर में 7 मार्च 2023 को 9 मजदूरों को एक इनोवा कार ने कुचल दिया था। इसमें पांच मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि चार अन्य मजदूरों को यहां पर पूरी सुविधाएं न मिलने से एमएमयू व पीजीआई रेफर कर दिया गया था। वहीं मृतकों के पोस्टमार्टम करने के लिए दूसरे अस्पताल से टीम को मौके पर पहुंचना पड़ा था।
केस स्टडी-2
19 जुलाई 2024 को सनवारा के समीप हरियाणा रोडवेज की बस की टक्कर टिपर से हो गई थी, जिसमें 15 सवारियां घायल हो गई थी। दो की हालत गंभीर हो गई थी और उनका सिटी स्कैन किया जाना था। अस्पताल में सुविधा न मिलने पर इन दोनों मरीजों को सोलन अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया था।
कोट
अस्पताल में सात में से केवल दो ही चिकित्सक तैनात हैं। कुछ मशीनों की भी कमी है, ऐसे में कई बार गंभीर स्थिति में मरीज को रेफर करना पड़ता है। हालांकि कोशिश की जाती है कि मरीज को यहां पर सुविधाएं दी जाएं। मशीनों व रिक्त पदों का मामला उच्च अधिकारियों व सरकार के समक्ष उठाया जा रहा है।
डॉ. परविंदर सिंह, खंड चिकित्सा अधिकारी
परवाणू-शिमला फोरलेन पर दुर्घटनाओं का पहला सहारा बने अस्पताल से मरीजों को किया जा रहा रेफर
डॉक्टरों की कमी, अल्ट्रासाउंड और सिटी स्कैन जैसी सुविधाएं न होने से मरीज बेहाल
सुरेंद्र ठाकुर
धर्मपुर(सोलन)। सोलन जिले के परवाणू-शिमला फोरलेन पर स्थित एकमात्र कसौली विधानसभा क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धर्मपुर डॉक्टरों और उपकरणों की भारी कमी से जूझ रहा है। यह अस्पताल क्षेत्र की लगभग 20 हजार आबादी की स्वास्थ्य सेवाओं का जिम्मा संभालता है। चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा और अस्पताल केवल एक रेफरल बनकर रह गया है। हाईवे पर स्थित यह अस्पताल अति संवेदनशील माना जाता है क्योंकि अकसर दुर्घटना होने पर सबसे पहले मरीज को यही पर लाया जाता है। मगर यहां पर प्राथमिक उपचार के बाद मरीज को रेफर करना डॉक्टरों की मजबूरी बन जाती है। वर्तमान में अस्पताल में सात चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं मगर दो चिकित्सक ही तैनात हैं, जबकि इसे आदर्श अस्पताल का दर्जा प्राप्त है। जहां कम से कम चार चिकित्सकों की आवश्यकता है। यहां तक की अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ चिकित्सक का पद भी स्वीकृत नहीं है, जिससे क्षेत्र की महिलाओं को भारी परेशानी होती है। महिलाओं को इलाज के लिए सोलन, शिमला या चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों में जाना पड़ता है। कई बार उन्हें महंगे निजी क्लीनिकों में इलाज कराने को मजबूर होना पड़ता है। इसके अलावा नर्सों और फील्ड स्टाफ के भी एक दर्जन से ज्यादा पद रिक्त चल रहे हैं। अस्पताल में आने वाले लगभग सभी मरीजों को आगे रेफर कर दिया जाता है। एक्सरे सुविधा भी कम वोल्टेज में काम नहीं करती, जिससे मरीजों को और दिक्कत होती है। संवाद
अस्पताल में सिर्फ एक्सरे मशीन
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में केवल एक एक्सरे मशीन हैं जो लो वोल्टेज होने पर ठप हो जाती है। इसके अलावा न तो यहां पर अल्ट्रासाउंड होता है और न ही सिटी स्कैन की सुविधा है। अन्य कई जरूरी टेस्ट के लिए भी मरीजों को सोलन भेजा जाता है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं व आपात में आए मरीजों को होती है क्योंकि उन्हें अल्ट्रासाउंड या अन्य टेस्ट निजी क्लीनिकों में महंगे दामों पर करवाने पड़ते हैं।
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सरकारों की अनदेखी का शिकार अस्पताल
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन किसी ने भी अस्पताल में डॉक्टरों व उपकरणों की कमी दूर करने का प्रयास नहीं किया। भाजपा सरकार के कार्यकाल में इस अस्पताल को 50 बिस्तर वाले नागरिक अस्पताल में बदलने की अधिसूचना जारी हुई थी। इसके भवन निर्माण के लिए शिलान्यास भी किया गया था। हालांकि, सरकार बदलने के बाद यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। स्थानीय लोगों की मांगें हर सरकार के सामने नाकाम साबित हुई हैं।
केस स्टडी-1
धर्मपुर में 7 मार्च 2023 को 9 मजदूरों को एक इनोवा कार ने कुचल दिया था। इसमें पांच मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि चार अन्य मजदूरों को यहां पर पूरी सुविधाएं न मिलने से एमएमयू व पीजीआई रेफर कर दिया गया था। वहीं मृतकों के पोस्टमार्टम करने के लिए दूसरे अस्पताल से टीम को मौके पर पहुंचना पड़ा था।
केस स्टडी-2
19 जुलाई 2024 को सनवारा के समीप हरियाणा रोडवेज की बस की टक्कर टिपर से हो गई थी, जिसमें 15 सवारियां घायल हो गई थी। दो की हालत गंभीर हो गई थी और उनका सिटी स्कैन किया जाना था। अस्पताल में सुविधा न मिलने पर इन दोनों मरीजों को सोलन अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया था।
कोट
अस्पताल में सात में से केवल दो ही चिकित्सक तैनात हैं। कुछ मशीनों की भी कमी है, ऐसे में कई बार गंभीर स्थिति में मरीज को रेफर करना पड़ता है। हालांकि कोशिश की जाती है कि मरीज को यहां पर सुविधाएं दी जाएं। मशीनों व रिक्त पदों का मामला उच्च अधिकारियों व सरकार के समक्ष उठाया जा रहा है।
डॉ. परविंदर सिंह, खंड चिकित्सा अधिकारी