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शोध में खुलासा: धूम्रपान से मोतियाबिंद का खतरा तीन गुना ज्यादा, 30 की उम्र में दिख रहे लक्षण

Thu, 15 Oct 2026 06:30 AM IST
Krishan Singh निशिल मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन।
निशिल मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 15 Oct 2026 06:30 AM IST
सार

क्षेत्रीय अस्पताल सोलन की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सीमा नेगी ने बताया कि व्यक्ति की आयु बढ़ने के साथ आंखों में सफेदपन आना सामान्य है। 40 से 50 वर्ष की आयु तक हर व्यक्ति में मोतियाबिंद के सामान्य लक्षण नजर आने लगते हैं।

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Study reveals: Smoking triples the risk of cataracts; symptoms appearing at age 30.
मोतियाबिंद की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI

विस्तार

धूम्रपान करने वालों में अब मोतियाबिंद होने का खतरा दो से तीन गुना तक बढ़ गया है। ऐसे कई मरीज अब सामने आने लगे हैं, जिनमें धूम्रपान करने के कारण मोतियाबिंद की शिकायत हुई है। वहीं, प्रदेशभर में अब युवाओं में भी मोतियाबिंद के शुरुआती लक्षण दिखाई दे रहे हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार मोतियाबिंद ऐसी बीमारी है, जो समय के साथ कई लोगों को होती है। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सीमा नेगी ने बताया कि व्यक्ति की आयु बढ़ने के साथ आंखों में सफेदपन आना सामान्य है। 40 से 50 वर्ष की आयु तक हर व्यक्ति में मोतियाबिंद के सामान्य लक्षण नजर आने लगते हैं। 

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डब्ल्यूएचओ के शोध में भी खुलासा
उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से किए गए शोध में भी यह बात सामने आई है कि धूम्रपान करने वाले लोगों में सामान्य लोगों से पांच से छह साल पहले ही मोतियाबिंद के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं। अब 30 से 35 साल के लोगों में भी मोतियाबिंद के लक्षण दिखने लगे हैं। इसमें लापरवाही बरतना भारी पड़ सकता है। डॉ. नेगी ने बताया कि अस्पताल में हर महीने 15 से 20 युवा इस तरह की शिकायत ले आ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार मोतियाबिंद पर कोई भी दवा का असर नहीं होता है। इसे ठीक करने के लिए मात्र ऑपरेशन ही एकमात्र विकल्प मौजूद है। 

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धूम्रपान ऐसे बढ़ा रहा मोतियाबिंद का खतरा
धूम्रपान शरीर में फ्री रेडिकल्स को बढ़ाता है। फ्री रेडिकल्स आंखों को मिलने वाले जरूरी प्रोटीन को नष्ट करने लगता है। धूम्रपान के कारण बीमार होने पर व्यक्ति को ठीक होने में काफी लंबा समय लग जाता है। इससे आंखों को समय पर जरूरी पोषक तत्व भी नहीं मिल पाते। ऐसे में मोतियाबिंद होने का खतरा बढ़ता है।

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ऐसे होता है मोतियाबिंद
मोतियाबिंद एक प्राकृतिक बीमारी है। इससे बचाव नहीं किया जा सकता, लेकिन समय से पहले होने से रोका जा सकता है। इसके लिए शरीर को स्वस्थ रखना जरूरी है। वहीं धूम्रपान छोड़ना समय से पहले मोतियाबिंद होने के खतरे को रोक सकता है।

धूम्रपान करने वाले लोगों में समय से पहले मोतियाबिंद होने लगा है। इसके कई मरीज सामने आ रहे हैं। धूम्रपान करने वालों में सामान्य लोगों से पहले मोतियाबिंद का असर हो रहा है। युवाओं में भी इसके लक्षण दिखना शुरू हो गए हैं। इसका उपचार केवल ऑपरेशन से ही हो सकता है।- डॉ. सुमित सूद, नेत्र रोग विशेषज्ञ, क्षेत्रीय अस्पताल सोलन

धूम्रपान से रहता है मोतियाबिंद का खतरा
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल आईजीएमसी के नेत्र रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर डॉ. प्रवीण ने बताया कि धूम्रपान से मोतियाबिंद का खतरा रहता है। ऐसे में लोगों को धूम्रपान से बचाव करना चाहिए। अगर धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को मोतियाबिंद के लक्षण लगते हैं तो उसे तुरंत अस्पताल आना चाहिए। 

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