शिमला: पर्यटकों की पसंद बना मशोबरा राष्ट्रपति निवास, दीदार करने हर साल देश-विदेश से पहुंच रहे एक लाख लोग
शिमला का मशोबरा स्थित राष्ट्रपति निवास पर्यटकों की पसंद बनता जा रहा है। हर साल करीब एक लाख लोग यहां पहुंच रहे हैं। अप्रैल 2023 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस ऐतिहासिक भवन को यह कहकर आम जनता के लिए खोलने के आदेश दिए थे कि यह राष्ट्रपति निवास नहीं, बल्कि राष्ट्र का निवास है।
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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला का मशोबरा स्थित राष्ट्रपति निवास पर्यटकों की पसंद बनता जा रहा है। हर साल करीब एक लाख लोग यहां पहुंच रहे हैं। अप्रैल 2023 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस ऐतिहासिक भवन को यह कहकर आम जनता के लिए खोलने के आदेश दिए थे कि यह राष्ट्रपति निवास नहीं, बल्कि राष्ट्र का निवास है। इस इमारत को आम जनता के लिए खोलने का राष्ट्रपति का मकसद यह था कि देश-दुनिया के लोग इस ऐतिहासिक इमारत को नजदीक से देख सकें। इसके इतिहास को जान सकें। राष्ट्रपति के आधिकारिक ग्रीष्मकालीन निवास का अप्रैल 2023 से सितंबर 2026 तक देश-विदेश से आए तीन लाख से ज्यादा लोग दीदार कर चुके हैं। अप्रैल 2023 से पहले इस इमारत तक आम जनता या पर्यटक नहीं पहुंच पाते थे।
176 साल पुराना है आलीशान भवन
176 साल पुराने लकड़ी और मिट्टी से बने इस आलीशान भवन की सुरक्षा सेना के हाथ में है। वर्ष 1850 में कोटी के राजा राणा ने इसे एक मंजिला इमारत के रूप में तैयार करवाया था। बाद में यह भवन ब्रिटिश अधिकारियों और वायसरायों का पसंदीदा विश्राम स्थल बन गया। 1890 के दशक में इसे वायसराय लॉर्ड एलिग्न ने ब्रिटिश भारत के लिए स्थायी लीज पर ले लिया था। देश आजाद हुआ तो यह भवन भारत सरकार को सौंप दिया गया। वर्ष 1951 में भारत के पहले राष्ट्रपति डाॅ. राजेंद्र प्रसाद भी यहां आ चुके हैं। देश के राष्ट्रपति अब हर साल यहां ग्रीष्मकालीन प्रवास पर आते हैं और उस दौरान राष्ट्रपति सचिवालय कुछ समय के लिए यहीं से संचालित होता है। राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान इस भवन को आम जनता के लिए बंद कर दिया जाता है।
पिछले तीन माह से चल रहा रखरखाव, पर्यटक नहीं कर पा रहे नजदीक से दीदार
हिमाचल की पारंपरिक धज्जी दीवार निर्माण शैली में बने भूकंपरोधी इस भवन का पिछले करीब तीन माह से रखरखाव चल रहा है। इस कारण देश-विदेश से आए पर्यटक इन दिनों भवन का नजदीक से दीदार नहीं कर पा रहे हैं। पर्यटकों को फुलवारी से आगे जाने की अनुमति नहीं है। इससे पर्यटक मायूस भी हो रहे हैं। हालांकि भीतर जाने फुलवारी के पास ही एक शेड में टीवी स्क्रीन के माध्यम से पर्यटकों को इस भवन के बाहरी और भीतर की खूबियों को एक गाइड के माध्यम से बता दिया जाता है। इस फुलवारी से ही पर्यटकों को वापस बाहर भेज दिया जाता है। अभी और तीन-चार महीने भवन का काम चलेगा। उसके बाद पर्यटक दोबारा भवन का दीदार कर सकेंगे।