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अब भारत में ही बनेंगे राफेल: फ्रांस ने भेजा ₹3.25 लाख करोड़ का प्रस्ताव, कितनी बढ़ेगी IAF की ताकत?
Thu, 06 Aug 2026 09:32 PM IST
राकेश कुमार
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 06 Aug 2026 09:32 PM IST
सार
3.25 लाख करोड़ रुपये का यह राफेल सौदा भारतीय वायुसेना को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। 94 विमानों का निर्माण भारत में होने से न केवल देश का रक्षा ढांचा मजबूत होगा, बल्कि 'मेक इन इंडिया' को पंख लगेंगे और भारत वैश्विक रक्षा निर्माण का नया केंद्र बनेगा। फ्रांस ने क्या प्रस्ताव भेजा है? जानिए...
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राफेल डील
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारतीय वायुसेना की ताकत में अब तक का सबसे बड़ा इजाफा होने जा रहा है। फ्रांस ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए भारत को अपना विस्तृत तकनीकी और व्यावसायिक प्रस्ताव सौंप दिया है। यह विशाल सौदा लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये का है। इस प्रस्ताव की सबसे बड़ी खासियत भारत में ही बड़े पैमाने पर इन लड़ाकू विमानों का निर्माण करना है। फिलहाल रक्षा मंत्रालय का अधिग्रहण विंग और भारतीय वायुसेना फ्रांसीसी प्रस्ताव का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं।
देश में कैसे बनेंगे 94 राफेल?
इस डील की सबसे मजबूत कड़ी भारत की आत्मनिर्भरता है। फ्रांस को 114 में से 94 राफेल जेट भारत में ही तैयार करने होंगे। इसके लिए फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन भारतीय औद्योगिक साझेदारों के साथ हाथ मिलाएगी। इस पूरे प्रोजेक्ट में फ्रांस की शीर्ष रक्षा कंपनियां, मिसाइल निर्माता एमबीडीए, इंजन निर्माता सफरान और इलेक्ट्रॉनिक्स दिग्गज थेल्स मिलकर काम करेंगी।
इस सौदे की पांच बड़ी बातें
क्यों पड़ी 114 नए राफेल की जरूरत?
भारतीय वायुसेना इस समय फाइटर स्क्वाड्रन की कमी का सामना कर रही है। पुराने हो चुके रूसी मिग जेट्स को तेजी से हटाया जा रहा है। दूसरी ओर, स्वदेशी एलसीए तेजस मार्क-1ए और एलसीए मार्क-2 के निर्माण में देरी हो रही है। ऐसे में अपनी सीमाओं की सुरक्षा और परिचालन क्षमताओं को मजबूत बनाए रखने के लिए 114 नए मल्टी-रोल लड़ाकू विमानों का शामिल होना बेहद जरूरी हो गया है।
यह भी पढ़ें: क्या भारतीय नियमों के आगे झुकेगा मेटा?: सरकार ने AI और डीपफेक पर कसी लगाम, कहा- अमेरिकी कानून नहीं चलेंगे
रक्षा मंत्रालय का क्या है मास्टरप्लान ?
वर्ष 2024 में पदभार संभालने के बाद रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए एक विस्तृत अध्ययन किया गया था। इसके बाद रक्षा अधिग्रहण परिषद ने लगभग पांच महीने पहले ही 114 राफेल जेट खरीदने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी थी। अब फ्रांसीसी प्रस्ताव का मूल्यांकन पूरा होते ही इसे अंतिम मंजूरी दी जाएगी। 3.25 लाख करोड़ रुपये का यह राफेल सौदा भारतीय वायुसेना को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। 94 विमानों का निर्माण भारत में होने से न केवल देश का रक्षा ढांचा मजबूत होगा, बल्कि 'मेक इन इंडिया' को पंख लगेंगे और भारत वैश्विक रक्षा निर्माण का नया केंद्र बनेगा।
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देश में कैसे बनेंगे 94 राफेल?
इस डील की सबसे मजबूत कड़ी भारत की आत्मनिर्भरता है। फ्रांस को 114 में से 94 राफेल जेट भारत में ही तैयार करने होंगे। इसके लिए फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन भारतीय औद्योगिक साझेदारों के साथ हाथ मिलाएगी। इस पूरे प्रोजेक्ट में फ्रांस की शीर्ष रक्षा कंपनियां, मिसाइल निर्माता एमबीडीए, इंजन निर्माता सफरान और इलेक्ट्रॉनिक्स दिग्गज थेल्स मिलकर काम करेंगी।
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इस सौदे की पांच बड़ी बातें
- भारत की घरेलू कंपनियों के लिए करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये के नए व्यावसायिक अवसर पैदा होंगे।
- टाटा और लार्सन एंड टुब्रो जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियां इस उत्पादन प्रक्रिया में मुख्य भागीदार बनेंगी।
- भारतीय वायुसेना विमानों में अपनी स्वदेशी 'अस्त्र' एयर-टू-एयर मिसाइल और भारतीय तकनीक को एकीकृत करने पर जोर दे रही है।
- भारत ने इसी साल मई 2026 में फ्रांस को इस सरकारी सौदे (G2G) के लिए 'लेटर ऑफ रिक्वेस्ट' (LoR) भेजा था।
- भारत पहले ही 62 राफेल का ऑर्डर दे चुका है। 114 नए जेट्स और नौसेना के 31 प्रस्तावित विमानों को मिलाकर भारत में राफेल की कुल संख्या 200 के पार पहुंच जाएगी।
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क्यों पड़ी 114 नए राफेल की जरूरत?
भारतीय वायुसेना इस समय फाइटर स्क्वाड्रन की कमी का सामना कर रही है। पुराने हो चुके रूसी मिग जेट्स को तेजी से हटाया जा रहा है। दूसरी ओर, स्वदेशी एलसीए तेजस मार्क-1ए और एलसीए मार्क-2 के निर्माण में देरी हो रही है। ऐसे में अपनी सीमाओं की सुरक्षा और परिचालन क्षमताओं को मजबूत बनाए रखने के लिए 114 नए मल्टी-रोल लड़ाकू विमानों का शामिल होना बेहद जरूरी हो गया है।
यह भी पढ़ें: क्या भारतीय नियमों के आगे झुकेगा मेटा?: सरकार ने AI और डीपफेक पर कसी लगाम, कहा- अमेरिकी कानून नहीं चलेंगे
रक्षा मंत्रालय का क्या है मास्टरप्लान ?
वर्ष 2024 में पदभार संभालने के बाद रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए एक विस्तृत अध्ययन किया गया था। इसके बाद रक्षा अधिग्रहण परिषद ने लगभग पांच महीने पहले ही 114 राफेल जेट खरीदने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी थी। अब फ्रांसीसी प्रस्ताव का मूल्यांकन पूरा होते ही इसे अंतिम मंजूरी दी जाएगी। 3.25 लाख करोड़ रुपये का यह राफेल सौदा भारतीय वायुसेना को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। 94 विमानों का निर्माण भारत में होने से न केवल देश का रक्षा ढांचा मजबूत होगा, बल्कि 'मेक इन इंडिया' को पंख लगेंगे और भारत वैश्विक रक्षा निर्माण का नया केंद्र बनेगा।