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KG George: 1965 भारत-पाकिस्तान युद्ध के नायक केजी जॉर्ज का 95 वर्ष की उम्र में निधन, केरल में ली अंतिम सांस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Sun, 08 Mar 2026 03:37 PM IST
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सार
1962 भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय सेना की कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स इकाई में तैनात रहे लांस नायक केजी जॉर्ज का निधन हो गया है। वे 95 वर्ष के थे और केरल के कोट्टायम में अपने घर पर रह रहे थे। केजी जॉर्ज ने 1965 के युद्ध में भारतीय सेना के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के नायक केजी जॉर्ज का निधन
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के वीर चक्र विजेता लांस हवलदार (सेवानिवृत्त) के.जी. जॉर्ज का केरल में 95 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। परिवार के अनुसार उनका निधन शनिवार सुबह उनके घर पर हुआ। वे केरल के कोट्टायम में रहते थे और उम्र से जुड़ी बीमारियों के कारण उनका देहांत हुआ। उनका जन्म फरवरी 1931 में हुआ था और उन्होंने 1965 के युद्ध में भारतीय सेना के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स इकाई में थे तैनात
लांस हवलदार के.जी. जॉर्ज भारतीय सेना की कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स इकाई में तैनात थे। यह सेना की वह इकाई है जो युद्ध के दौरान संचार व्यवस्था को बनाए रखने का काम करती है। 1965 के युद्ध में जॉर्ज ने बेहद बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया था।
वाघा सेक्टर में गोलाबारी और हवाई हमलों के बीच दिखाया अदम्य साहत
वीर चक्र के लिए जारी प्रशस्ति-पत्र के अनुसार, 6 से 10 सितंबर 1965 के बीच वाघा सेक्टर में लगातार दुश्मन की गोलाबारी और हवाई हमलों के बावजूद जॉर्ज ने अपने दल का नेतृत्व करते हुए संचार लाइनों को बार-बार ठीक किया। 8 और 9 सितंबर की रात दुश्मन के हमले के दौरान उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर ब्रिगेड मुख्यालय और अग्रिम मोर्चे पर तैनात बटालियनों के बीच संचार लाइन स्थापित की। उनके इस साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
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कोट्टायम में पूरे सैन्य सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
जॉर्ज के पोते रेमो जॉन ने बताया कि परिवार के कुछ सदस्य फिलहाल दुबई में हैं और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण अभी भारत नहीं आ पाए हैं। उम्मीद है कि वे मंगलवार तक भारत पहुंच जाएंगे। तब तक जॉर्ज के पार्थिव शरीर को सुरक्षित रखने के लिए स्थानीय मोर्चरी में रखा गया है। परिवार के सदस्य भारत लौटने के बाद कोट्टायम में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार और अंतिम विदाई दी जाएगी। के.जी. जॉर्ज को देश के लिए उनकी बहादुरी और सेवा के लिए हमेशा याद किया जाएगा।
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कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स इकाई में थे तैनात
लांस हवलदार के.जी. जॉर्ज भारतीय सेना की कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स इकाई में तैनात थे। यह सेना की वह इकाई है जो युद्ध के दौरान संचार व्यवस्था को बनाए रखने का काम करती है। 1965 के युद्ध में जॉर्ज ने बेहद बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया था।
वाघा सेक्टर में गोलाबारी और हवाई हमलों के बीच दिखाया अदम्य साहत
वीर चक्र के लिए जारी प्रशस्ति-पत्र के अनुसार, 6 से 10 सितंबर 1965 के बीच वाघा सेक्टर में लगातार दुश्मन की गोलाबारी और हवाई हमलों के बावजूद जॉर्ज ने अपने दल का नेतृत्व करते हुए संचार लाइनों को बार-बार ठीक किया। 8 और 9 सितंबर की रात दुश्मन के हमले के दौरान उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर ब्रिगेड मुख्यालय और अग्रिम मोर्चे पर तैनात बटालियनों के बीच संचार लाइन स्थापित की। उनके इस साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
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कोट्टायम में पूरे सैन्य सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
जॉर्ज के पोते रेमो जॉन ने बताया कि परिवार के कुछ सदस्य फिलहाल दुबई में हैं और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण अभी भारत नहीं आ पाए हैं। उम्मीद है कि वे मंगलवार तक भारत पहुंच जाएंगे। तब तक जॉर्ज के पार्थिव शरीर को सुरक्षित रखने के लिए स्थानीय मोर्चरी में रखा गया है। परिवार के सदस्य भारत लौटने के बाद कोट्टायम में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार और अंतिम विदाई दी जाएगी। के.जी. जॉर्ज को देश के लिए उनकी बहादुरी और सेवा के लिए हमेशा याद किया जाएगा।
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