सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   India News ›   West Asia tensions Amid oil crisis India changes import strategy increase crude purchase from us russia Africa

पश्चिम एशिया तनाव: तेल संकट के बीच भारत ने बदली आयात रणनीति, अफ्रीका समेत इन देशों से बढ़ाई कच्चे तेल की खरीद

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Mon, 09 Mar 2026 06:10 AM IST
विज्ञापन
सार

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने तेल आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका, रूस, लैटिन अमेरिका और पश्चिम अफ्रीका से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। गैर-होर्मुज स्रोतों से आयात की हिस्सेदारी बढ़कर 70 प्रतिशत हो गई है। देश के पास लगभग 74 दिनों की जरूरतों के बराबर तेल भंडार मौजूद है।

West Asia tensions Amid oil crisis India changes import strategy increase crude purchase from us russia Africa
कच्चा तेल आयात। - फोटो : पीटीआई
विज्ञापन

विस्तार

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर बढ़ते खतरे के बीच भारत ने अपनी तेल आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने अब अमेरिका, लैटिन अमेरिका, रूस और पश्चिम अफ्रीका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। इसका उद्देश्य देश में ईंधन की आपूर्ति को स्थिर रखना और किसी संभावित संकट से बचाव करना है।
Trending Videos


 ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के अनुसार भारतीय रिफाइनरियों ने अपनी खरीद रणनीति में बदलाव किया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचपीसीएल और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड जैसी कंपनियों ने पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका और लैटिन अमेरिका के साथ-साथ रूस से भी अतिरिक्त कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया है। अमेरिका की ओर से रूसी तेल के लिए दी गई 30 दिन की अस्थायी छूट ने भी भारत के लिए तेल आयात का एक नया रास्ता खोल दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


गैर-होर्मुज स्रोतों से तेल आयात क्यों बढ़ाया गया?
पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार भारत अब ऐसे क्षेत्रों से अधिक तेल खरीद रहा है जो मौजूदा संघर्ष के दायरे से बाहर हैं। इसका असर यह हुआ कि गैर-होर्मुज स्रोतों से आने वाले तेल की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 70 प्रतिशत हो गई है। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा लगभग 60 प्रतिशत था। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है, इसलिए आपूर्ति के कई स्रोत बनाए रखना जरूरी माना जा रहा है।

ये भी पढ़ें- एमिरेट्स ने दुबई से क्यों की अपनी सभी उड़ानें निलंबित? यात्रियों को एयरपोर्ट न आने की सलाह

भारत के पास अभी कितना तेल भंडार है?
पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार देश के पास फिलहाल करीब 14.4 करोड़ बैरल कच्चे तेल का भंडार मौजूद है। यह भंडार लगभग 50 दिनों की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। इसके अलावा सामरिक पेट्रोलियम भंडार में भी करीब 9.5 दिनों की शुद्ध आयात जरूरतों को पूरा करने लायक कच्चा तेल सुरक्षित रखा गया है।

सरकारी कंपनियों के पास कुल कितना भंडार है?
सरकारी तेल कंपनियों के पास भी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा भंडार मौजूद है। अधिकारियों के अनुसार इन कंपनियों के पास करीब 64.5 दिनों की शुद्ध आयात जरूरतों के बराबर भंडार है। सामरिक भंडार को जोड़कर देखा जाए तो देश के पास कुल मिलाकर लगभग 74 दिनों की जरूरतों को पूरा करने लायक तेल उपलब्ध है।

वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी बीच कुवैत ने एहतियात के तौर पर तेल उत्पादन और रिफाइनिंग में कटौती की घोषणा की है। इस स्थिति के कारण एक सप्ताह में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 35 प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया है।

अन्य वीडियो-

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article