News Updates: बंगाल पहुंचे सीईसी ज्ञानेश कुमार; सहपाठियों पर छात्र के हमले में एक की मौत, सात घायल
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में निर्वाचन आयोग के शीर्ष अधिकारी 9 और 10 मार्च को पश्चिम बंगाल में चुनाव की तैयारियों का जायजा लेंगे। अगले दो दिन तक राजनीतिक दलों, नागरिक और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक के लिए सीईसी रविवार शाम कोलकाता पहुंच गए। सीईसी ज्ञानेश कुमार जब कोलकाता हवाईअड्डे से अपने होटल जा रहे थे, तब रास्ते में कुछ लोगों ने काले झंडे लहराए और नारे लगाए। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के विधायक तापस चटर्जी ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन में सभी वर्गों के लोग शामिल रहे। चटर्जी ने बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के खिलाफ न्यू टाउन में एक प्रदर्शन का नेतृत्व किया।
वन में हाथी के टक्कर से 80 वर्षीय महिला की मौत
अंथियूर के वन क्षेत्र में 80 वर्षीय महिला मीना हाथी के टक्कर से मर गई। स्थानीय निवासी रामकुमार (20) ने रविवार को महिला का शव पाया और पुलिस व वन अधिकारियों को सूचना दी। वन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और महिला को मृत पाया, जिस पर चोट के निशान थे। इलाके के लोगों के अनुसार मीना अक्सर जंगल में इमली इकट्ठा करने जाती थीं। महिला का शव अंथियूर सरकारी अस्पताल भेजा गया, जहां पोस्टमार्टम में पुष्टि हुई कि उसकी मौत हाथी के टक्कर से हुई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ममता राज में राष्ट्रपति का विरोध व घुसपैठियों का स्वागत: अनुराग ठाकुर
1,000 महिला पायलटों वाली देश की पहली एयरलाइन बनी इंडिगो
एक देश, एक नेता-एक पार्टी की होड़ में भाजपा: ममता बनर्जी
सीएम ममता ने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान मतदाताओं के नाम मनमाने तरीके से हटाए जा रहे हैं। अगर यही मतदाता सूची 2024 में थी, जिसके आधार पर मोदी प्रधानमंत्री बने, तो फिर अब उसी सूची से लोगों को वोट देने से क्यों रोका जा रहा है। ममता ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पीएम से इस्तीफा मांगना चाहिए।
महिला वकीलों को जज बनाने पर विचार करें हाईकोर्ट कॉलेजियम : सीजेआई
जस्टिस सूर्यकांत ने उच्च न्यायालयों के कॉलेजियम से अनुरोध किया कि वे अपने विचार क्षेत्र का विस्तार करें और सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रही अपने-अपने राज्यों की महिला अधिवक्ताओं को पदोन्नति के लिए शामिल करें। यदि प्रगति को सार्थक बनाना है, तो उसे संस्थागत रूप देना होगा। उन्होंने कहा कि कहानी यह नहीं होनी चाहिए कि किसी एक व्यक्ति को अधिक प्रतिनिधित्व मिला, बल्कि यह होनी चाहिए कि उच्चतम न्यायालय और देश भर के उच्च न्यायालयों ने समझ-बूझकर निष्पक्षता को अपनी प्रक्रियाओं में समाहित किया।
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