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पश्चिम बंगाल एसआईआर विवाद: अंतिम मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ याचिका, सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Mon, 09 Mar 2026 01:01 PM IST
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सार

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से मतदाताओं के नाम हटाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा। चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के दौरान ये नाम हटाए थे।

Supreme Court will hear petition challenging the deletion of names from the final voter list in West Bengal
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों के खिलाफ एक नई याचिका पर मंगलवार को विचार करने को सहमत हुआ। यह याचिका उन लोगों ने दायर की है जिनके नाम चुनाव आयोग ने हटा दिए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने बताया कि यह याचिका पहले के मतदाताओं के नाम हटाने से संबंधित है।
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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने अधिवक्ता की दलीलें सुनीं। अधिवक्ता ने कहा कि ये वे मतदाता हैं जिन्होंने पहले मतदान किया था, लेकिन अब उनके दस्तावेज नहीं लिए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि वे न्यायिक अधिकारियों के निर्णयों पर अपील में नहीं बैठ सकते। हालांकि, वरिष्ठ अधिवक्ता ने अपील को सुनवाई योग्य बताया, जिसके बाद पीठ ने मंगलवार को सुनवाई करने का फैसला किया।
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24 फरवरी को शीर्ष अदालत ने एसआईआर अभ्यास के लिए पश्चिम बंगाल के सिविल जजों की तैनाती की अनुमति दी थी। इसके अतिरिक्त 250 जिला जज और झारखंड व ओडिशा के न्यायिक अधिकारी भी तैनात किए गए थे। इनका काम मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का सामना कर रहे 80 लाख दावों और आपत्तियों को निपटाना था। कोलकाता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने 22 फरवरी को एक पत्र में बताया था कि 250 जिला जजों को भी इन दावों को निपटाने में करीब 80 दिन लगेंगे।

2002 की मतदाता सूची से वंशानुक्रम को जोड़ने में तार्किक विसंगतियां पाई गई हैं। इनमें माता-पिता के नाम का बेमेल होना शामिल है। साथ ही, मतदाता और उसके माता-पिता की उम्र का अंतर 15 साल से कम या 50 साल से अधिक होना भी एक विसंगति है। मुख्य न्यायाधीश कांत ने कहा कि अगर प्रत्येक न्यायिक अधिकारी प्रतिदिन 250 दावों को निपटाता है, तो भी इस प्रक्रिया में लगभग 80 दिन लगेंगे। पश्चिम बंगाल एसआईआर की समय सीमा 28 फरवरी थी।

नौ फरवरी को शीर्ष अदालत ने राज्यों को स्पष्ट किया था कि वह एसआईआर को पूरा करने में किसी को भी बाधा डालने की अनुमति नहीं देगा। अदालत ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया था। यह निर्देश चुनाव आयोग के नोटिस जलाने के आरोपों पर एक हलफनामा दाखिल करने के लिए था। कुछ व्यक्तियों पर चुनाव आयोग के नोटिस जलाने का आरोप लगा था।

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