फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   1984 Anti-Sikh Riot Victims to Protest Against Rahul Gandhi Rally on November 1, Alka Lamba react

राहुल की रैली पर रार: 1984 दंगा पीड़ित विरोध में शाह को लिखेंगे पत्र; 1 नवंबर को रामलीला मैदान में क्या होगा?

Sun, 25 Oct 2026 01:14 AM IST
शिवम गर्ग आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Sun, 25 Oct 2026 01:14 AM IST
सार

1984 सिख विरोधी दंगों से प्रभावित परिवारों ने राहुल गांधी की 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली के खिलाफ विरोध का एलान किया है। पीड़ित परिवार अमित शाह को पत्र लिखकर रैली की अनुमति नहीं देने की मांग करेंगे। वहीं, कांग्रेस नेता अलका लांबा ने रैली की तारीख बदलने से इनकार किया है। व्यापारियों ने दीपावली के मद्देनजर रैली टालने की अपील की है।

विज्ञापन
1984 Anti-Sikh Riot Victims to Protest Against Rahul Gandhi Rally on November 1, Alka Lamba react
राहुल गांधी की रैली पर 1984 दंगा पीड़ितों का विरोध - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों से प्रभावित कुछ परिवारों के प्रतिनिधियों ने रैली के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का एलान किया है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर रैली की अनुमति नहीं देने की मांग करेंगे।
विज्ञापन


पीड़ितों के मुताबिक, 1984 की हिंसा में अपने परिजनों को खोने वाले परिवार आज भी उस त्रासदी का दर्द झेल रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम के आयोजन से पहले उन लोगों की भावनाओं और न्याय की लंबे समय से चली आ रही मांगों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
विज्ञापन


वहीं, कांग्रेस की ओर से प्रस्तावित रैली को स्थगित नहीं करने की बात कही गई है। इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद के साथ-साथ दिल्ली के व्यापारियों ने भी चिंता जताई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


राहुल गांधी की रैली का विरोध क्यों कर रहे हैं 1984 दंगा पीड़ित?
रैली के खिलाफ विरोध का एलान करने वाले कुछ पीड़ित प्रतिनिधियों ने कांग्रेस नेतृत्व की राजनीतिक भूमिका और राहुल गांधी के पुराने बयानों पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सिख समुदाय की भावनाओं और 1984 की हिंसा से जुड़ी पीड़ा को राजनीतिक चर्चाओं में पर्याप्त संवेदनशीलता के साथ नहीं देखा गया।

पीड़ितों ने हिंसा के दौरान हुई हत्याओं, गुरुद्वारों को नुकसान पहुंचाए जाने और महिलाओं के साथ कथित ज्यादतियों का उल्लेख करते हुए न्याय की मांग दोहराई। उनका कहना है कि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया, उनके लिए यह केवल इतिहास की एक घटना नहीं, बल्कि जीवनभर साथ रहने वाला दुख है। प्रदर्शन का समर्थन करने वाले परिवारों ने कांग्रेस नेतृत्व से अपील की है कि वह पीड़ितों की भावनाओं को समझे और उनकी शिकायतों को गंभीरता से ले।

मुआवजे और न्याय को लेकर पीड़ित परिवारों की नाराजगी
1984 की हिंसा से प्रभावित परिवारों के प्रतिनिधियों ने मुआवजे और न्याय की प्रक्रिया पर भी असंतोष जताया है। उनका आरोप है कि कई परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिली और कुछ मामलों में शिकायतें दर्ज कराने तथा पीड़ितों की पहचान से जुड़ी प्रक्रियाओं में कमियां रहीं।

पीड़ितों का कहना है कि हिंसा के कारण कई परिवारों ने अपने सदस्यों के साथ घर, संपत्ति और आजीविका के साधन भी खो दिए। इसके बाद उन्हें आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।

उनका सवाल है कि दशकों बीत जाने के बावजूद प्रभावित परिवारों की समस्याओं और न्याय की मांगों को पर्याप्त महत्व क्यों नहीं मिल पाया। पीड़ितों के अनुसार, राजनीतिक दलों को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर कार्यक्रम आयोजित करते समय प्रभावित समुदायों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

महिला पीड़िता ने भी विरोध का समर्थन किया
1984 के दंगों से प्रभावित एक महिला ने भी प्रस्तावित रैली के विरोध का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि हिंसा में अपने परिवार के सदस्यों को खोने वाले लोगों के लिए उस समय की यादें आज भी दर्दनाक हैं।

महिला के मुताबिक, राजनीतिक कार्यक्रमों और चुनावी गतिविधियों से पहले उन परिवारों की स्थिति को समझना जरूरी है, जिन्होंने हिंसा में अपने प्रियजनों को खोया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि रैली आयोजित होती है, तो प्रभावित परिवार अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं।

पीड़ित परिवारों की मांग है कि उनके दुख और न्याय से जुड़े सवालों को केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रखा जाए।

इंडिया ब्लॉक की रैली 1 नवंबर को ही होगी: अलका लांबा
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता अलका लांबा ने स्पष्ट किया है कि इंडिया ब्लॉक की प्रस्तावित रैली 1 नवंबर को ही आयोजित की जाएगी। दिल्ली के व्यापारियों ने दीपावली के बाद तक कार्यक्रम टालने की अपील की है, लेकिन लांबा ने तारीख बदलने से इनकार किया है।

लांबा के मुताबिक, इस रैली में देशभर से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली पहुंच सकते हैं। उन्होंने करीब 10 लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया है। हालांकि, यह संख्या कांग्रेस नेता का अनुमानित दावा है।

कांग्रेस ने रैली के प्रमुख मुद्दों में कथित वोट चोरी, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को शामिल बताया है।

दिल्ली के व्यापारियों ने क्यों की रैली टालने की मांग?
दिल्ली के व्यापारियों ने दीपावली से पहले के व्यस्त कारोबारी समय का हवाला देते हुए रैली की तारीख बदलने की मांग की है। व्यापारिक संगठनों की चिंता है कि बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के कारण यातायात में बदलाव, बैरिकेडिंग और संभावित भीड़ का असर बाजारों तक ग्राहकों की पहुंच पर पड़ सकता है।



व्यापारियों की चिंता पर अलका लांबा ने क्या कहा?
अलका लांबा ने व्यापारियों की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रैली में शामिल होने के लिए विभिन्न राज्यों से आने वाले लोग दिल्ली में खरीदारी भी कर सकते हैं। उनके अनुसार, इससे सदर बाजार, चांदनी चौक और अन्य बाजारों में कारोबार को फायदा मिलने की संभावना है।

उन्होंने होटल, रेस्तरां और खानपान से जुड़े कारोबार में भी गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद जताई। लांबा ने व्यापारियों से रैली को लेकर चिंता नहीं करने की अपील की और कहा कि कार्यक्रम की तारीख में बदलाव नहीं किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed