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किताब में खुलासा: 1993 के मुंबई ब्लास्ट के बाद पाकिस्तान जाना चाहता था छोटा राजन, दाऊद ने मना कर दिया

Wed, 01 Jul 2026 06:38 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र सुनील मेहरोत्रा, मुंबई
सुनील मेहरोत्रा, मुंबई Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 01 Jul 2026 06:38 PM IST
सार

बबलू श्रीवास्तव कभी दाऊद का बहुत खास हुआ करता था । बाद में दाऊद ने ही उसे धोखा दिया। बबलू को लगता है कि सिंगापुर में उसकी कई साल पहले जो गिरफ्तारी हुई, उसकी टिप लोकल पुलिस को दाऊद ने ही दी थी।

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1993 Mumbai Blast Chhota Rajan wanted to flee to Pakistan Dawood Ibrahim refused Book Excerpt Babloo Shrivast
दाऊद इब्राहिम - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

मुंबई में 12 मार्च 1993 को हुए सिलसिलेवार बम धमाकों की साजिश, उसके लिए धन जुटाने, दाऊद इब्राहिम, आईएसआई और डी-कंपनी की भूमिका से जुड़े कई अहम पहलुओं का सनसनीखेज खुलासा पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय ने अपनी नई पुस्तक ‘अंतहीन’ में किया है। पुस्तक के अनुसार यह जानकारी उन्हें उस समय मिली थी, जब वह बरेली के आईजी थे और उन्होंने बरेली जिला जेल में बंद अंडरवर्ल्ड डॉन बबलू श्रीवास्तव से लंबी बातचीत की थी। उसी बातचीत में बबलू श्रीवास्तव ने 1993 के मुंबई बम धमाकों से जुड़े कई ऐसे तथ्य बताए, जिन्हें राजेश पांडेय ने अपनी पुस्तक में विस्तार से दर्ज किया है।
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बबलू श्रीवास्तव कभी दाऊद का बहुत खास हुआ करता था । बाद में दाऊद ने ही उसे धोखा दिया। बबलू को लगता है कि सिंगापुर में उसकी कई साल पहले जो गिरफ्तारी हुई, उसकी टिप लोकल पुलिस को दाऊद ने ही दी थी। पुस्तक के अनुसार, 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी ढांचा गिराए जाने के बाद देशभर में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। मुंबई भी इसकी चपेट में आई, जहां बड़े पैमाने पर हिंदू-मुस्लिम दंगे हुए। बबलू श्रीवास्तव ने राजेश पांडेय को बताया कि इन्हीं दंगों के बाद मुंबई में बदले की साजिश रची जाने लगी।
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बैठक में इन लोगों ने जुटाया था ऑपरेशन का फंड
राजेश पांडेय ने अपनी किताब अंतहीन में लिखा है कि इसी दौरान खाड़ी देशों से धन जुटाने के लिए बहरीन में एक बेहद गोपनीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मुंबई और दुबई के कई प्रभावशाली कारोबारी तथा अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोग मौजूद थे।

पांडेय के अनुसार बैठक में हाजी अहमद, जो मुंबई का बड़ा कारोबारी था और दुबई में सोने का कारोबार करता था, मोहम्मद डोसा, मुस्तफा डोसा, जिसका जहाजरानी का कारोबार था, जीकर भाई, जो मुंबई में स्मैक के कारोबार से जुड़ा था और दुबई में रहता था, और फिरोज मर्चेंट, जो सोने का बड़ा कारोबारी था, शामिल थे। इनके अलावा हाजी कसाई, हाजी अशरफ, छोटा शकील, अनीस इब्राहिम, टाइगर मेमन सहित कई लोगों ने इस ऑपरेशन के लिए धन जुटाया।

बबलू श्रीवास्तव के मुताबिक, इस बैठक की जानकारी आईएसआई को मिल गई। इसके बाद आईएसआई ने दाऊद इब्राहिम को पूरे ऑपरेशन की कमान संभालने के लिए कहा। आईएसआई ने भरोसा दिलाया कि चंदे से जुटाई गई रकम के अलावा जितना भी अतिरिक्त खर्च होगा, वह पाकिस्तान की ओर से उपलब्ध कराया जाएगा।

बैठक में मौजूद सभी लोगों की राय थी कि दाऊद इब्राहिम का नेटवर्क सबसे मजबूत और संगठित है, इसलिए उसी के जरिए इस योजना को अंजाम दिया जाए। आईएसआई ने दाऊद को आरडीएक्स, एके-47 राइफलें और अन्य विस्फोटक सामग्री उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ली। बबलू श्रीवास्तव के अनुसार, पूरे ऑपरेशन के लिए लगभग 250 करोड़ रुपए जुटाए गए थे और आईएसआई पूरे अभियान की लगातार निगरानी कर रही थी। 33 साल पहले यह रकम बहुत बड़ी थी। आज भी यह रकम बहुत बड़ी है।

राजेश पांडेय ने बबलू श्रीवास्तव के हवाले से लिखा है कि आईएसआई से मिले हथियार दाऊद इब्राहिम ने छोटा शकील के माध्यम से मुंबई पहुंचवाए। ऑपरेशन में शामिल सभी लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं और निर्देश दिया गया कि धमाके उन स्थानों पर किए जाएं, जहां हिंदुओं की संख्या अधिक रहती है।
 
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दुबई से टीवी पर पूरा घटनाक्रम दे रहा था दाऊद
इसके बाद 12 मार्च 1993, शुक्रवार का दिन जानबूझकर चुना गया। सिलसिलेवार बम धमाकों में 257 लोगों की मौत हुई, जिनमें पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल थे।
बबलू श्रीवास्तव ने राजेश पांडेय को बताया कि जब मुंबई में एक के बाद एक धमाके हो रहे थे, उस समय दाऊद इब्राहिम, छोटा शकील और उसके अन्य सहयोगी दुबई के डेरा इलाके में शरद शेट्टी उर्फ अन्ना  के 'मॉडर्न' गेस्ट हाउस में बैठे टीवी पर पूरा घटनाक्रम देख रहे थे।

कुछ ही देर बाद टीवी चैनलों पर दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील का नाम मुंबई बम धमाकों के मास्टरमाइंड के रूप में आने लगा। यह देखकर दाऊद के लिए काम करने वाले हिंदू गैंग के सदस्य हैरान रह गए। इनमें छोटा राजन, अनिल परब, अनिल कोठारी, अनिल लंबू और कई अन्य लोग शामिल थे। बबलू श्रीवास्तव ने राजेश पांडेय को बताया कि टीवी पर दाऊद का नाम आते ही छोटा राजन ने सीधे उससे सवाल किया, 'तुमने ही तो ये नहीं कराया है?'

दाऊद ने जवाब दिया, 'इसमें मेरा कोई हाथ नहीं है।' उसने पूरे ऑपरेशन की जिम्मेदारी टाइगर मेमन पर डालते हुए कहा कि यह सब टाइगर मेमन ने कराया है।
पुस्तक के अनुसार, उस समय मुंबई के कई अधिकारी दुबई में दाऊद की पार्टियों में जाया करते थे और मुंबई पुलिस तथा दाऊद गैंग के बीच दोस्ताना संबंधों की चर्चा आम थी। बम धमाकों के बाद इन्हीं संपर्कों का इस्तेमाल कर दाऊद और उसके नेटवर्क से जुड़ी जानकारियां जुटाने का प्रयास शुरू हुआ। मुंबई पुलिस ने दाऊद और उसके करीबी लोगों की विस्तृत प्रोफाइल तैयार करनी शुरू कर दी।

इस वजह से छोटा राजन को दाऊद ने पाकिस्तान ले जाने से कर दिया इनकार
बबलू श्रीवास्तव ने बताया कि आईएसआई को जब यह आभास हुआ कि मुंबई पुलिस दाऊद के नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, तब उसने दाऊद इब्राहिम और पूरे ऑपरेशन में शामिल लोगों को तत्काल पाकिस्तान आने का निर्देश दिया। आईएसआई ने दाऊद से कहा कि भारत सरकार और दुबई के बीच बातचीत चल रही है तथा किसी भी समय दुबई पुलिस कार्रवाई कर सकती है। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि किसी भी गैर-मुस्लिम को पाकिस्तान साथ लेकर न आए।

बबलू श्रीवास्तव के अनुसार, जैसे ही यह संदेश 'मॉडर्न' गेस्ट हाउस में पहुंचा, दाऊद ने अपने साथियों से कहा कि अगली सुबह की फ्लाइट से पाकिस्तान रवाना होना है। उसी समय वहां मौजूद छोटा राजन ने भी दाऊद से कहा, 'दूतावास से मेरे भी पासपोर्ट दिलवा दो, मैं भी पाकिस्तान निकल लूं। लेकिन दाऊद ने उसे साफ मना कर दिया। उसने कहा, इतनी जल्दी नहीं हो सकता है और अभी तुम्हारी जरूरत भी नहीं है। तुम अपने लोगों के साथ यहीं रहो। यहां कोई काम पड़ेगा तो मैं बता दूंगा।'

इसके बाद दाऊद इब्राहिम, छोटा शकील और आईएसआई द्वारा नामित छह अन्य लोग जल्दबाजी में वहां से निकल गए और अगले दिन पाकिस्तान के लिए रवाना हो गए। बबलू श्रीवास्तव ने राजेश पांडेय को बताया कि अगले दिन छोटा राजन ने अपने साथियों के साथ बैठक की और पहली बार खुलकर शक जाहिर किया। उसने कहा, 'हो न हो मुंबई का ब्लास्ट दाऊद ने ही कराया है। अगर ऐसा नहीं होता तो वह कभी पाकिस्तान नहीं जाता। मैं उसकी रग-रग से वाकिफ हूं। वह पाकिस्तान का रुख कभी नहीं कर सकता था। भागने के लिए खाड़ी के और भी देश थे।'

बबलू श्रीवास्तव के अनुसार, छोटा राजन यह भी समझ चुका था कि दाऊद इब्राहिम उसके बढ़ते प्रभाव से असहज था। वह गैंग के लड़कों को अपनी ओर बनाए रखने के लिए लगातार बड़ी-बड़ी पार्टियां देता था, उनके खाने-पीने और मनोरंजन का पूरा इंतजाम करता था। मुंबई बम धमाकों के बाद पाकिस्तान भागने की घटना ने छोटा राजन के मन में दाऊद की भूमिका को लेकर संदेह और गहरा कर दिया।
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