Gujarat: समंदर के रास्ते 330Kg हेरोइन की तस्करी पड़ी भारी? NIA कोर्ट ने छह PAK नागरिकों को सुनाई आठ साल की सजा
गुजरात के जखाऊ तट पर वर्ष 2019 में पकड़ी गई 330 किलो ब्राउन हेरोइन तस्करी मामले में विशेष एनआईए अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने छह पाकिस्तानी नागरिकों को आठ-आठ साल के कठोर कारावास की सजा दी।
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गुजरात के जखाऊ तट पर वर्ष 2019 में पकड़ी गई 330 किलो ब्राउन हेरोइन तस्करी मामले में विशेष एनआईए अदालत ने छह पाकिस्तानी नागरिकों को आठ-आठ वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, कथित रूप से खेप लेने वाले भारतीय आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
विशेष एनआईए अदालत के न्यायाधीश हेमांग रावल ने छह पाकिस्तानी नागरिकों को आठ वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उन्हें पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) नियम, 1950 के तहत पांच वर्ष की सजा भी दी गई, जो साथ-साथ चलेगी। विदेशी अधिनियम के तहत प्रत्येक दोषी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। हालांकि, अदालत ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम की धाराओं में पर्याप्त साक्ष्य न होने के कारण उन्हें बरी कर दिया।
भारतीय आरोपी को क्यों मिली राहत?
अदालत ने उस भारतीय व्यक्ति को भी संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया, जिस पर समुद्र के बीच मादक पदार्थों की खेप लेने का आरोप था। जांच एजेंसी का दावा था कि वह भारतीय नाव के जरिए खेप प्राप्त करने वाला था।
2019 में कैसे पकड़ी गई थी हेरोइन की खेप?
एनआईए के अनुसार, 20 मई 2019 को राजस्व खुफिया निदेशालय को सूचना मिली थी कि पाकिस्तान की एक मछली पकड़ने वाली नाव गुजरात के जखाऊ तट के पास भारतीय समुद्री सीमा में मादक पदार्थों की खेप पहुंचाने वाली है।
21 मई को भारतीय तटरक्षक बल के जहाज 'अरिंजय' ने पाकिस्तान के झंडे वाली नाव को घेर लिया। इस दौरान नाव पर मौजूद लोगों ने संदिग्ध बैग समुद्र में फेंक दिए। बाद में भारतीय तटरक्षक बल ने 194 पैकेट बरामद किए। इसके बाद विभिन्न एजेंसियों ने अलग-अलग समय पर 17 और पैकेट भी बरामद किए।
जांच में क्या सामने आया?
जांच के दौरान पाकिस्तान की नाव 'अल-मदीना' और भारतीय नाव 'फेजाने किरमानी' को पकड़ा गया। पूछताछ में पाकिस्तानी नाव के कप्तान सफदर अली ने मादक पदार्थों की खेप भारतीय व्यक्ति तक पहुंचाने की जानकारी होने की बात स्वीकार की। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी, भुज की जांच में बरामद पदार्थ को ब्राउन हेरोइन बताया गया। जांच में सामने आया कि छह पाकिस्तानी नागरिक 11 पॉलीप्रोपाइलीन बैग में पैक 330 पैकेट मादक पदार्थ लेकर भारत पहुंचे थे।
NIA ने क्या आरोप लगाए थे?
गृह मंत्रालय ने मामले की गंभीरता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को देखते हुए 22 मई 2020 को जांच एनआईए को सौंप दी थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि सात आरोपियों ने नौ अन्य वांछित आरोपियों के साथ मिलकर भारत में बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों की तस्करी की साजिश रची थी। आरोपपत्र के अनुसार, कराची से गुजरात तक खेप पहुंचाने के लिए पाकिस्तानी नाव 'अल-मदीना' का इस्तेमाल किया गया था।