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आंदोलनकारियों के तेवर: इस्तीफा पहली शर्त, इसके बिना वार्ता बेमानी... पक्के राजनेता जैसी थीं जेन-जी की बातें

Tue, 28 Jul 2026 08:04 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 28 Jul 2026 08:04 AM IST
सार

नीट पेपर लीक के बाद जंतर मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन और सोनम वांगचुक का अनशन लगातार चर्चा में है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो चुका है। अब सरकार की बैठक का हिस्सा रहे एक वार्ताकार ने बताया है कि आंदोलनकारियों के तेवर और केंद्रीय मंत्रियों के साथ बातचीत के समय सीजेपी के प्रतिनिधियों की भाव-भंगिमा कैसी थी?

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CJP stance talk with nadda and jitendra singh Edu Min Resignation primary Gen-Z words like seasoned politician
नड्डा से मिले सीजेपी के नेता (फाइल) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

वे (सौरव दास व आशुतोष रांका) टफ नेगोशिएटर थे जो बातचीत के दौरान एकदम घुटे हुए राजनेता की तरह मोलभाव कर रहे थे। आत्मविश्वास से लबरेज दोनों प्रतिनिधियों ने दूसरी बातचीत में यह कहकर सरकार के लिए गुंजाइश खत्म कर दी थी कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा पहली और सबसे अहम शर्त है। इसके बिना बातचीत ही बेमानी है। इस दौरान दोनों प्रतिनिधि अपनी मांग से रत्ती भर भी नहीं भटके। ये टिप्पणी इस वार्ता में शामिल एक केंद्रीय मंत्री की है।
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सरकार को 24 जुलाई की वार्ता में अपने पक्ष में कुछ सकारात्मक होने की उम्मीद थी क्योंकि 20 जुलाई की पहली मुलाकात के बाद सरकार ने कई स्तर पर कार्रवाई के साथ सोनम वांगचुक तक अपनी पहुंच बना ली थी।
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सकारात्मक रुख भी अपनाया
बातचीत के दौरान आंतरिक सुरक्षा और बातचीत के लिए कमेटी गठन मामले में प्रतिनिधियों ने बेहद सकारात्मक रुख अपनाया। जब उन्हें आंदोलन में असामाजिक तत्वों की घुसपैठ की जानकारी दी गई तो दोनों ने ऐसे तत्वों के खिलाफ न सिर्फ कार्रवाई का समर्थन किया, बल्कि यह भी कहा कि सीजेपी इसके आड़े नहीं आएगी। इसके अलावा युवाओं ने बातचीत के लिए सरकार और सीजेपी की कमेटी गठित करने की मांग पर समझाने के बाद जोर नहीं दिया।
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इस दिन वार्ता के दौरान सीजेपी के वार्ताकारों को सरकार की कार्रवाई के संदर्भ में बताया गया, खासकर उच्च शिक्षा सचिव को हटाने और एनटीए के 47 अधिकारियों को बर्खास्त करने की जानकारी दी गई।इस पर सीजेपी के प्रतिनिधियों का कहना था कि शिक्षा सचिव या अन्य नहीं हमारी मुख्य मांग तो शिक्षा मंत्री को पद से हटाने की है।

सरकार से प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई न करने की हामी भराई
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, दोनों वार्ताकार अपनी मांगों के इतर कुछ सुनने के लिए तैयार नहीं थे। जब प्रदर्शकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई न करने पर हामी भरी गई तो इन्होंने समझौते में जुड़वाया कि सिर्फ जंतर-मंतर ही नहीं भाजपा शासित किसी राज्य में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।


24 जुलाई की बैठक में दोनों ने संदेश दे दिया था कि वांगचुक के अनशन तोड़ने या किसी तरह की अन्य कार्रवाई से बीच का रास्ता नहीं निकलने वाला। इसके बाद सरकार में शीर्ष स्तर पर मंथन के बाद परिणाम सामने आया।
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