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Hindi News ›   India News ›   24year-long separation ends; know how 2002 SIR voter list reunited a long-lost sister with her family in Thane

महाराष्ट्र: 24 साल का वनवास खत्म, 2002 की एसआईआर वोटर लिस्ट ने ठाणे में बिछड़ी बहन को परिवार से ऐसे मिलाया

Mon, 12 Oct 2026 02:22 PM IST
Sunil Mehrotra सुनील मेहरोत्रा
Updated Mon, 12 Oct 2026 02:22 PM IST
सार

24 साल पहले परिवार से बिछड़ी भारती अश्रू कदम को ठाणे पुलिस की चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट ने उनके भाई-बहनों से मिलाया। साल 2002 की वोटर लिस्ट, पुराने पुलिस रिकॉर्ड और हाथ पर बने टैटू की मदद से परिवार का पता चला। वीडियो कॉल पर भाई-बहनों ने उन्हें पहचान लिया।

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24year-long separation ends; know how 2002 SIR voter list reunited a long-lost sister with her family in Thane
भारती अश्रू कदम को ठाणे पुलिस ने परिवार से मिलाया। - फोटो : मुंबई पुलिस

विस्तार

कुछ रिश्ते वक्त के साथ धुंधले नहीं पड़ते, बल्कि दिल के किसी कोने में हमेशा जिंदा रहते हैं। समय कितना भी बीत जाए और दूरियां कितनी भी बढ़ जाएं, अपने परिवार से दोबारा मिलने की उम्मीद कभी खत्म नहीं होती। ठाणे पुलिस की चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट ने ऐसी ही एक भावुक घटना में 24 साल पहले अपने परिवार से बिछड़ी भारती अश्रू कदम को उनके भाई-बहनों से दोबारा मिलाने में अहम भूमिका निभाई है। इस मामले में साल 2002 की एसआईआर वोटर लिस्ट परिवार तक पहुंचने का अहम जरिया बनी।

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बात साल 2002 की है। उस समय भारती अश्रू कदम काफी छोटी थीं। नवी मुंबई में अपने मामा के घर जाते समय वह अचानक रास्ते में बिछड़ गईं। बाद में वह बेलापुर पुलिस को मिलीं। उस समय उनके परिजनों का पता नहीं चल सका, जिसके चलते उन्हें चाइल्ड होम भेज दिया गया। धीरे-धीरे समय बीतता गया और जिंदगी आगे बढ़ती रही। सही उम्र होने पर उनकी शादी हो गई। शादी के बाद भारती का नाम बदलकर जान्हवी वैभव झांबरे हो गया और वह सोलापुर में रहने लगीं। अब वे एक बेटा और एक बेटी की मां भी हैं।
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जिंदगी में आगे बढ़ने के बावजूद बचपन की यादें, माता-पिता का प्यार और भाई-बहनों का साथ पाने की चाह उनके मन में बनी रही। करीब 24 साल तक अपने परिवार से दूर रहने के बाद भी भारती ने अपनों को खोजने की उम्मीद नहीं छोड़ी। वह लगातार अपने माता-पिता और भाई-बहनों का पता लगाने की कोशिश करती रहीं। उनकी इच्छा थी कि किसी तरह अपने परिवार का पता चल जाए और बचपन में छूटा हुआ साथ फिर से जुड़ सके।
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दूसरी ओर, उनके भाई विजय अश्रू कदम ने भी अपनी खोई हुई बहन को तलाशने की कोशिशें जारी रखीं। एक बार उन्हें जानकारी मिली कि भारती को दिल्ली या हरियाणा के आसपास देखा गया है। इसके बाद वह खुद वहां पहुंचे और कई दिनों तक तलाश की, लेकिन बहन का कोई सुराग नहीं मिला। एक तरफ भारती अपने परिवार से मिलने की आस लगाए थीं, तो दूसरी तरफ उनका भाई उन्हें खोजने में जुटा था। हालांकि, दोनों की कोशिशों के बावजूद इतने वर्षों तक नहीं मिल सके।

आखिरकार 8 अक्तूबर 2026 को दोपहर करीब 12 बजे भारती ने ठाणे पुलिस की चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट से संपर्क किया। उन्होंने पुलिस से अपने परिवार को खोजने में मदद मांगी। पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ एक गुमशुदा महिला के परिजनों का पता लगाने की नहीं थी, बल्कि 24 साल पुरानी घटना से जुड़े रिकॉर्ड और अधूरी जानकारियों के आधार पर उनके परिवार तक पहुंचने की थी।

ठाणे पुलिस की चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट ने मामले की जांच शुरू की। पुराने पुलिस रिकॉर्ड खंगाले गए और नवी मुंबई पुलिस से संपर्क किया गया। इसके अलावा मोड्स ऑपरेंडी ब्यूरो ऑफिस और नवी मुंबई के सीबीडी बेलापुर स्थित मिसिंग सेल के रिकॉर्ड की भी जांच की गई। घटना काफी पुरानी होने के कारण दस्तावेजों और उपलब्ध जानकारियों के आधार पर सही परिवार की पहचान करना आसान नहीं था। इसके बावजूद पुलिस टीम ने अलग-अलग रिकॉर्ड की पड़ताल जारी रखी।

जांच के दौरान महाराष्ट्र की जिला-वार वोटर लिस्ट खंगालने का सुराग मिला। साल 2002 की वोटर लिस्ट की जांच की गई, तो भारती के भाई के नाम से जुड़ा एक रिकॉर्ड सामने आया। इसके बाद संबंधित इलाके के बीएलओ ( बूथ लेवल ऑफिसर) से संपर्क किया गया। वोटर लिस्ट से मिली जानकारी के आधार पर परिवार का पता लगाने की कोशिशें तेज कर दी गईं। परिवार का एड्रेस और फोन नंबर बीएलओ के जरिए पुलिस को मिल गया।


इस दौरान भारती के हाथ पर बने 'भारती अश्रू कदम' नाम के टैटू ने भी उनकी पहचान स्थापित करने में मदद की। पुलिस ने बीएलओ के जरिए मिले फोन नंबर से भारती के दो भाई प्रकाश और विजय तथा बहन शालिनी से संपर्क किया। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए भारती की उनके भाई-बहनों से बात कराई गई। गुरुवार को हुई इस वीडियो बातचीत में भारती ने जब अपने हाथ में बना टैटू दिखाया, तो सभी भाई बहनों ने तत्काल उसे अपनी खोई हुई बहन के रूप में पहचान लिया। करीब 24 साल बाद परिवार से दोबारा जुड़ने का यह पल खुद पुलिस कर्मियों को बेहद भावुक कर गया।
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