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Maharashtra: GST विभाग का वरिष्ठ अफसर 45 दिन बाद पुणे से गिरफ्तार, सहकर्मी को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीड (महाराष्ट्र)।
Published by: Nirmal Kant
Updated Wed, 04 Mar 2026 08:00 PM IST
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सार
Maharashtra: जीएसटी अधिकारी सचिन जाधव की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के डेढ़ महीने बाद पुलिस ने उनके ही विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी को पुणे से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि कार्यस्थल पर लगातार उत्पीड़न और दबाव ने जाधव को आत्महत्या के लिए मजबूर किया था। पढ़ें रिपोर्ट-
हथकड़ी, arrest
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पुलिस ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी को पुणे से गिरफ्तार किया है। उन्हें उनके विभाग के एक अधिकारी की कथित आत्महत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि डेढ़ महीने से अधिक समय तक फरार रहने के बाद यह गिरफ्तारी की गई है। वरिष्ठ अधिकारी पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है।
जीएसटी अधिकारी सचिन नारायण जाधव17 जनवरी को धुले-सोलापुर राजमार्ग के कपिलाधरवाड़ी इलाके में एक कार के अंदर मृत पाए गए थे। उस समय पुलिस ने बताया था कि घटनास्थल से एक सुसाइड नोट मिला था, जिसमें काम से जुड़ी परेशानियों का जिक्र था।
वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप फाटे पिछले चालीस दिनों से अधिक समय से फरार थे। उनको पुणे जिले के लोणीकंद इलाके में एक संयुक्त अभियान के दौरान पकड़ा गया। एक अधिकारी ने बताया, यह मामला 16 जनवरी 2026 का है, जब सचिन जाधवर यह कहकर घर से निकले थे कि वे काम पर जा रहे हैं। लेकिन वापस नहीं लौटे। 17 जनवरी को उनका शव धुले-सोलापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर उनकी ही कार के अंदर संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। इस घटना से जिले और राज्य प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया।
जांच को नई दिशा कैसे मिली?
जांच में तब तेजी आई, जब मृतक की पत्नी मयूरी जाधवर ने कार्यस्थल पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए विस्तृत शिकायत दर्ज कराई। प्राथमिकी के अनुसार, अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे फाटे ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जाधवर को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
शिकायत में क्या कहा गया है?
शिकायत में कहा गया है कि फाटे अक्सर सहकर्मियों के सामने जाधवर को अपमानित करते थे और उन्हें गैरकानूनी कामों से जुड़ी फाइलें पास करने या कुछ निजी कंपनियों के विशेष काम करने का दबाव डालते थे। दबाव और अनैतिक काम करने के लिए मजबूरी को सहन न कर पाने के कारण जाधवर ने यह कदम उठाया।
ये भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव: 'MVA उम्मीदवार के रूप में शरद पवार का समर्थन करेगी कांग्रेस', रमेश चेन्निथला का बयान
गिरफ्तारी में देरी पर विरोध क्यों हुआ?
13 जनवरी को मामला दर्ज होने के बाद फाटे भूमिगत हो गए। उन्होंने अग्रिम जमानत लेने की कोशिश की। लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। गिरफ्तारी में देरी से लोगों में नाराजगी बढ़ी। 25 फरवरी को जाधवर की पत्नी और परिवार के सदस्यों ने तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए भूख हड़ताल भी की।
आखिर आरोपी तक पुलिस कैसे पहुंची?
पुलिस अधिकारी ने कहा, तकनीकी जांच और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर हमारी टीम ने आरोपी पता पुणे में लगाया। लोणीकंद में जाल बिछाकर उन्हें सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया गया।
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जीएसटी अधिकारी सचिन नारायण जाधव17 जनवरी को धुले-सोलापुर राजमार्ग के कपिलाधरवाड़ी इलाके में एक कार के अंदर मृत पाए गए थे। उस समय पुलिस ने बताया था कि घटनास्थल से एक सुसाइड नोट मिला था, जिसमें काम से जुड़ी परेशानियों का जिक्र था।
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वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप फाटे पिछले चालीस दिनों से अधिक समय से फरार थे। उनको पुणे जिले के लोणीकंद इलाके में एक संयुक्त अभियान के दौरान पकड़ा गया। एक अधिकारी ने बताया, यह मामला 16 जनवरी 2026 का है, जब सचिन जाधवर यह कहकर घर से निकले थे कि वे काम पर जा रहे हैं। लेकिन वापस नहीं लौटे। 17 जनवरी को उनका शव धुले-सोलापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर उनकी ही कार के अंदर संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। इस घटना से जिले और राज्य प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया।
जांच को नई दिशा कैसे मिली?
जांच में तब तेजी आई, जब मृतक की पत्नी मयूरी जाधवर ने कार्यस्थल पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए विस्तृत शिकायत दर्ज कराई। प्राथमिकी के अनुसार, अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे फाटे ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जाधवर को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
शिकायत में क्या कहा गया है?
शिकायत में कहा गया है कि फाटे अक्सर सहकर्मियों के सामने जाधवर को अपमानित करते थे और उन्हें गैरकानूनी कामों से जुड़ी फाइलें पास करने या कुछ निजी कंपनियों के विशेष काम करने का दबाव डालते थे। दबाव और अनैतिक काम करने के लिए मजबूरी को सहन न कर पाने के कारण जाधवर ने यह कदम उठाया।
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गिरफ्तारी में देरी पर विरोध क्यों हुआ?
13 जनवरी को मामला दर्ज होने के बाद फाटे भूमिगत हो गए। उन्होंने अग्रिम जमानत लेने की कोशिश की। लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। गिरफ्तारी में देरी से लोगों में नाराजगी बढ़ी। 25 फरवरी को जाधवर की पत्नी और परिवार के सदस्यों ने तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए भूख हड़ताल भी की।
आखिर आरोपी तक पुलिस कैसे पहुंची?
पुलिस अधिकारी ने कहा, तकनीकी जांच और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर हमारी टीम ने आरोपी पता पुणे में लगाया। लोणीकंद में जाल बिछाकर उन्हें सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया गया।
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