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राहुल गांधी का छात्रों से संवाद: कहा- भारत को बहुत सावधान रहना होगा; दुनिया के हालात, RSS और एआई पर क्या बोले?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इडुक्की (केरल)
Published by: Nirmal Kant
Updated Fri, 06 Mar 2026 07:11 PM IST
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सार
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि जमीन पर दिखने वाला युद्ध सिर्फ अमेरिका, इस्राइल और ईरान का नहीं, बल्कि अमेरिका, चीन और रूस के बीच टकराव का हिस्सा है। उन्होंने एआई, डाटा और तकनीक के मोर्चे पर भारत की स्थिति को लेकर चिंता जताई और कहा कि देश को अपनी नीति स्पष्ट करनी होगी। पढ़ें पूरी रिपोर्ट-
राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एक्स/आईएनसी
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विस्तार
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को केरल के कुट्टिकानम स्थित मारियन कॉलेज के छात्रों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कई ज्वलंत मुद्दों पर अपनी राय रखी, जिसमें अंतरराष्ट्रीय संबंधों की जटिलताएं, भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में स्थिति, उच्च शिक्षा पर कथित वैचारिक हमले, मीडिया का हथियार के रूप में इस्तेमाल और राजनीति की प्रकृति जैसे मुद्दे शामिल थे।
राहुल गांधी ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालातों को चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा, जमीन पर देखने पर यह अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध जैसा लगता है, लेकिन वास्तव में यह अमेरिका, चीन और रूस के बीच का संघर्ष है।
पश्चिम एशिया में संघर्ष पर राहुल गांधी ने क्या कहा?
अमेरिका महाशक्ति बने रहने का प्रयास कर रहा है, जबकि चीन धीरे-धीरे इसके करीब पहुंच रहा है। पश्चिम एशिया उर्जा उत्पादन का केंद्र है। पश्चिम एशिया पर हमारी निर्भरता के कारण भारत को इसका सीधा नुकसान उठाना पड़ेगा। भारत में ईंधन और महंगा होने जा रहा है। भारत में आर्थिक विकास धीमा होने जा रहा है। तो हमें इसको लेकर बहुत सावधान रहने की जरूरत है। इस तरह के संघर्षों के बढ़ने की आशंका है। भारत को समझना होगा कि हम एक हिंसक और खतरनाक समय में प्रवेश कर रहे हैं। इसलिए भारत की अपनी नीति स्पष्ट होनी चाहिए। इसलिए भारत को अपनी नीति और इस खतरनाक दौर से निपटने के तरीकों को लेकर स्पष्ट रहना होगा। चीन हमारी सीमा पर है और अमेरिका हमारा सहयोगी है। वे युद्ध के लिए तैयार हो रहे हैं। हमें बहुत सावधानी बरतनी होगी कि हम अचानक इस संघर्ष में न फंस जाएं।
भारत में आर्टिफिशियल एंटेलिजेंस पर क्या कहा?
भारत में एआई की स्थिति को लेकर कांग्रेस नेता ने कहा, अगर हम अपना डाटा अमेरिका को सौंप देते हैं। अगर हम कुछ भी उत्पादन नहीं करते हैं और अगर हमारे लोग आपस में लड़ते रहते हैं, तो हम मुसीबत में पड़ जाएंगे। हमारी समस्या यही है कि हम इसी रास्ते पर चल रहे हैं। हम कुछ भी उत्पादन नहीं कर रहे हैं और अपनी सबसे बड़ी संपत्ति अमेरिका को सौंप रहे हैं। मेरी राजनीतिक लड़ाई इसी मुद्दे पर केंद्रित है।
लोकसभा सांसद राहुल गांधी ने आगे कहा, भारत एआई के क्षेत्र में सफल नहीं हुआ है। एआई के खेल में दो ही खिलाड़ी हैं- अमेरिका और चीन। दुर्भाग्य से भारत अमेरिका या चीन की तुलना में रोबोटिक्स, एआई या आधुनिक तकनीक, किसी भी क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी नहीं है। आपने देखा कि एआई शिखर सम्मेलन में एक चीनी रोबोट को भारतीय बताकर दिखाया गया था। अगर आप एआई में ताकतवर बनना चाहते हैं, तो आपको अपने डाटा पर नियंत्रण रखना होगा। प्रधानमंत्री की ओर से हाल ही में अमेरिका के साथ किए गए समझौते के तहत हमारा पूरा डाटा अमेरिका को सौंप दिया गया है। हमने पिछले कुछ हफ्तों में एआई में अपनी क्षमता को बहुत नुकसान पहुंचाया है। सेवा और सॉफ्टवेयर उद्योग में नौकरियां एआई के कारण खत्म हो जाएंगी, जो हमारी रीढ़ थीं। उन्होंने आगे कहा, मुझे चिंता है कि डाटा, विनिर्माण और गतिशीलता के क्षेत्र में एक बदलाव हो रहा है और हम बस देख रहे हैं।
देश की उच्च शिक्षा प्रणाली की स्थिति को लेकर क्या कहा?
फिल्म, टीवी और मीडिया का हो रहा गलत इस्तेमाल: राहुल गांधी
उन्होंने कहा कि केरल स्टोरी को कोई खास तवज्जो नहीं दे रहा है और इसे कोई देख भी नहीं रहा है। इससे पता चलता है कि इस देश में ऐसे लोग हैं, जो देश की बहुसंख्यक आबादी हैं, जिन्हें केरल की वास्तविकता एहसास है। आप बिल्कुल सही कर रहे हैं। फिल्म, टेलीविजन और मीडिया का गलत इस्तेमाल हो रहा है। इनका इस्तेमाल लोगों को बदनाम कने, उन्हें समाज से अलग करने और समाज में फूट डालने के लिए किया जा राह है, ताकि कुछ खास लोगों को फायदा पहुंच सके। अगर कोई व्यक्ति किसी खास तरह की फिल्म बनाना चाहता है, मीडिया कुछ कहना चाहता है या किसी विचार का बचाव करना चाहता है, तो उस पर हमला किया जाएगा और उसे बोलने नहीं दिया जाएगा। मुझे हर बार इस स्थिति का सामना करना पड़ता है। जबकि कुछ अन्य विचारों को आप जितना चाहें फैला सकते हैं। उनका प्रचार कर सकते हैं और कुछ नहीं होगा। ऐसा बहुत हो रहा है और भारत में इसके लिए बड़ी मात्रा में पैसे का इस्तेमाल किया जा रहा है।
'राजनीति करना आसान नहीं'
कांग्रेस नेता ने आगे कहा, अगर आप राजनेता बनना चाहते हैं, तो यह एक अप्रिय काम है। अगर आप इसे गंभीरता से करना चाहते हैं और आपके कुछ निश्चित मूल्य हैं, तो यह बहुत मुश्किल काम है। अगर आप सही मकसद से राजनीति में उतर रहे हैं, तो कष्ट सहने, मार खाने और धक्के खाने के लिए तैयार रहें। अगर आप गलत मकसद से राजनीति में उतर रहे हैं, तो यह आसान है। क्या मैं यह अपने लिए कर रहा हूं? क्या मैं यह अपने फायदे के लिए कर रहा हूं? तब आपके पास एक और रास्ता है? फिर आप क्या सोचते हैं..क्या मैं किसी खास विचार या मूल्यों को लाभ पहुंचाने या उनकी रक्षा करने के लिए कर रहा हूं? यह रास्ता बिल्कुल अलग हो सकता है। यह एक अप्रिय और मुश्किल रास्ता है, लेकिन आप बहुत कुछ सीखते हैं और वास्तव में काफी उपयोगी साबित होते हैं। दूसरा रास्ता आसान है। हो सकता है आप उतना न सीखें। हो सकता है आपके पास एक बड़ा घर न हो, बहुत सारा पैसा हो। अगर आप इस रास्ते पर चलते हैं, तो वह रास्ता बंद हो जाता है। अगर आप उस रास्ते पर जाएंगे, तो यह रास्ता बंद हो जाएगा। मेरे अनुभव के अनुसार जब मैंने राजनीति में कदम रखा तो आमतौर पर लोग यही कहते थे कि राजनीति में ईमानदारी नहीं हो सकती। मैं इस बात को मानन से इनकार करता हूं। इस बात की पड़ताल कर रहा हूं कि क्या राजनीति में ईमानदारी संभव है। आप कितने पारदर्शी हो सकते हैं? और इसकी सीमाएं कहां तक हैं?
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राहुल गांधी ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालातों को चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा, जमीन पर देखने पर यह अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध जैसा लगता है, लेकिन वास्तव में यह अमेरिका, चीन और रूस के बीच का संघर्ष है।
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पश्चिम एशिया में संघर्ष पर राहुल गांधी ने क्या कहा?
अमेरिका महाशक्ति बने रहने का प्रयास कर रहा है, जबकि चीन धीरे-धीरे इसके करीब पहुंच रहा है। पश्चिम एशिया उर्जा उत्पादन का केंद्र है। पश्चिम एशिया पर हमारी निर्भरता के कारण भारत को इसका सीधा नुकसान उठाना पड़ेगा। भारत में ईंधन और महंगा होने जा रहा है। भारत में आर्थिक विकास धीमा होने जा रहा है। तो हमें इसको लेकर बहुत सावधान रहने की जरूरत है। इस तरह के संघर्षों के बढ़ने की आशंका है। भारत को समझना होगा कि हम एक हिंसक और खतरनाक समय में प्रवेश कर रहे हैं। इसलिए भारत की अपनी नीति स्पष्ट होनी चाहिए। इसलिए भारत को अपनी नीति और इस खतरनाक दौर से निपटने के तरीकों को लेकर स्पष्ट रहना होगा। चीन हमारी सीमा पर है और अमेरिका हमारा सहयोगी है। वे युद्ध के लिए तैयार हो रहे हैं। हमें बहुत सावधानी बरतनी होगी कि हम अचानक इस संघर्ष में न फंस जाएं।
भारत में आर्टिफिशियल एंटेलिजेंस पर क्या कहा?
भारत में एआई की स्थिति को लेकर कांग्रेस नेता ने कहा, अगर हम अपना डाटा अमेरिका को सौंप देते हैं। अगर हम कुछ भी उत्पादन नहीं करते हैं और अगर हमारे लोग आपस में लड़ते रहते हैं, तो हम मुसीबत में पड़ जाएंगे। हमारी समस्या यही है कि हम इसी रास्ते पर चल रहे हैं। हम कुछ भी उत्पादन नहीं कर रहे हैं और अपनी सबसे बड़ी संपत्ति अमेरिका को सौंप रहे हैं। मेरी राजनीतिक लड़ाई इसी मुद्दे पर केंद्रित है।
लोकसभा सांसद राहुल गांधी ने आगे कहा, भारत एआई के क्षेत्र में सफल नहीं हुआ है। एआई के खेल में दो ही खिलाड़ी हैं- अमेरिका और चीन। दुर्भाग्य से भारत अमेरिका या चीन की तुलना में रोबोटिक्स, एआई या आधुनिक तकनीक, किसी भी क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी नहीं है। आपने देखा कि एआई शिखर सम्मेलन में एक चीनी रोबोट को भारतीय बताकर दिखाया गया था। अगर आप एआई में ताकतवर बनना चाहते हैं, तो आपको अपने डाटा पर नियंत्रण रखना होगा। प्रधानमंत्री की ओर से हाल ही में अमेरिका के साथ किए गए समझौते के तहत हमारा पूरा डाटा अमेरिका को सौंप दिया गया है। हमने पिछले कुछ हफ्तों में एआई में अपनी क्षमता को बहुत नुकसान पहुंचाया है। सेवा और सॉफ्टवेयर उद्योग में नौकरियां एआई के कारण खत्म हो जाएंगी, जो हमारी रीढ़ थीं। उन्होंने आगे कहा, मुझे चिंता है कि डाटा, विनिर्माण और गतिशीलता के क्षेत्र में एक बदलाव हो रहा है और हम बस देख रहे हैं।
देश की उच्च शिक्षा प्रणाली की स्थिति को लेकर क्या कहा?
- कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि हमारी उच्च शिक्षा प्रणाली वैचारिक हमले की चपेट में है।
- उन्होंने आगे कहा कि अगर आप हमारे सभी कुलपतियों को देखें, तो उनमें से बड़ी संख्या में कुलपति केवल इसलिए बनाए जा रहे हैं, क्योंकि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े हैं और एक खास विचारधारा का समर्थन करते हैं। सबसे पहले इसे रोकना होगा।
- उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा प्रणाली को आरएसएस के विभाजनकारी दृष्टिकोण तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
फिल्म, टीवी और मीडिया का हो रहा गलत इस्तेमाल: राहुल गांधी
उन्होंने कहा कि केरल स्टोरी को कोई खास तवज्जो नहीं दे रहा है और इसे कोई देख भी नहीं रहा है। इससे पता चलता है कि इस देश में ऐसे लोग हैं, जो देश की बहुसंख्यक आबादी हैं, जिन्हें केरल की वास्तविकता एहसास है। आप बिल्कुल सही कर रहे हैं। फिल्म, टेलीविजन और मीडिया का गलत इस्तेमाल हो रहा है। इनका इस्तेमाल लोगों को बदनाम कने, उन्हें समाज से अलग करने और समाज में फूट डालने के लिए किया जा राह है, ताकि कुछ खास लोगों को फायदा पहुंच सके। अगर कोई व्यक्ति किसी खास तरह की फिल्म बनाना चाहता है, मीडिया कुछ कहना चाहता है या किसी विचार का बचाव करना चाहता है, तो उस पर हमला किया जाएगा और उसे बोलने नहीं दिया जाएगा। मुझे हर बार इस स्थिति का सामना करना पड़ता है। जबकि कुछ अन्य विचारों को आप जितना चाहें फैला सकते हैं। उनका प्रचार कर सकते हैं और कुछ नहीं होगा। ऐसा बहुत हो रहा है और भारत में इसके लिए बड़ी मात्रा में पैसे का इस्तेमाल किया जा रहा है।
'राजनीति करना आसान नहीं'
कांग्रेस नेता ने आगे कहा, अगर आप राजनेता बनना चाहते हैं, तो यह एक अप्रिय काम है। अगर आप इसे गंभीरता से करना चाहते हैं और आपके कुछ निश्चित मूल्य हैं, तो यह बहुत मुश्किल काम है। अगर आप सही मकसद से राजनीति में उतर रहे हैं, तो कष्ट सहने, मार खाने और धक्के खाने के लिए तैयार रहें। अगर आप गलत मकसद से राजनीति में उतर रहे हैं, तो यह आसान है। क्या मैं यह अपने लिए कर रहा हूं? क्या मैं यह अपने फायदे के लिए कर रहा हूं? तब आपके पास एक और रास्ता है? फिर आप क्या सोचते हैं..क्या मैं किसी खास विचार या मूल्यों को लाभ पहुंचाने या उनकी रक्षा करने के लिए कर रहा हूं? यह रास्ता बिल्कुल अलग हो सकता है। यह एक अप्रिय और मुश्किल रास्ता है, लेकिन आप बहुत कुछ सीखते हैं और वास्तव में काफी उपयोगी साबित होते हैं। दूसरा रास्ता आसान है। हो सकता है आप उतना न सीखें। हो सकता है आपके पास एक बड़ा घर न हो, बहुत सारा पैसा हो। अगर आप इस रास्ते पर चलते हैं, तो वह रास्ता बंद हो जाता है। अगर आप उस रास्ते पर जाएंगे, तो यह रास्ता बंद हो जाएगा। मेरे अनुभव के अनुसार जब मैंने राजनीति में कदम रखा तो आमतौर पर लोग यही कहते थे कि राजनीति में ईमानदारी नहीं हो सकती। मैं इस बात को मानन से इनकार करता हूं। इस बात की पड़ताल कर रहा हूं कि क्या राजनीति में ईमानदारी संभव है। आप कितने पारदर्शी हो सकते हैं? और इसकी सीमाएं कहां तक हैं?
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