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UPSC: यूपीएससी ने दो दशक में केवल चार बार IPS के 200 पद भरे, बाकी वर्षों में 150 से आगे नहीं बढ़ा यह आंकड़ा
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सार
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा के जरिए हर साल आईपीएस अफसर चुने जाते हैं। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि पिछले 20 वर्षों में सिर्फ चार बार ही 200 आईपीएस पदों पर भर्ती हुई। ज्यादातर वर्षों में यह संख्या 150 से आगे नहीं बढ़ी।
UPSC
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
UPSC: संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा शुक्रवार को 'सिविल सर्विस एग्जामिनेशन-2025' का रिजल्ट घोषित किया गया है। 958 उम्मीदवारों को रिक्तियों के अनुसार पद मिलेंगे। इस बार खासतौर पर, आईपीएस के पदों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद की जा रही थी। वजह, सरकार ने केंद्र में आईपीएस प्रतिनियुक्ति के लिए रिजर्व पदों की संख्या बढ़ा दी है। राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे आईपीएस अफसरों को केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर भेजें। केंद्र में आईपीएस प्रतिनियुक्ति के लिए तय पद खाली पड़े हैं। अब यह संख्या सात सौ का आंकड़ा पार कर गई है। पिछले साल जून में आईपीएस प्रतिनियुक्ति के लिए तय पदों की संख्या 678 थी। यूपीएससी ने दो दशक में केवल चार बार ही आईपीएस के 200 पद भरे हैं, बाकी वर्षों में यह संख्या 150 से आगे नहीं बढ़ सकी। इस बार के यूपीएससी रिजल्ट में भी आईपीएस के 150 पद भरे जाएंगे।
बता दें कि सिविल सर्विस एग्जामिनेशन-2024 के रिजल्ट में कुल 1009 आवेदकों को विभिन्न पदों पर भर्ती किया गया था। आईपीएस के पदों पर कैंची चलती हुई दिखाई दी थी। आईपीएस के लिए 147 उम्मीदवारों का चयन किया गया। यूपीएससी के 2023 के परिणाम के जरिए आईपीएस के 200 पद भरे गए थे। तब आईपीएस अफसरों के लगभग 586 पद खाली थे। आईपीएस के कुल 5,055 स्वीकृत पदों के मुकाबले 4,469 अधिकारी ही तैनात थे।
सिविल सर्विस एग्जामिनेशन-2023 के रिजल्ट में आईपीएस के 200 पदों के लिए उम्मीदवारों का चयन किया गया था। साल 2022 के दौरान भी आईपीएस के लिए 200 पद रखे गए थे। 2021 और 2020 में भी आईपीएस के 200-200 पदों पर भर्ती की गई थी। अगर 2019 की बात करें तो आईपीएस के लिए 150 पद रखे गए थे।
इसके बाद सिविल सर्विस एग्जामिनेशन-2009 से लेकर सिविल सर्विस एग्जामिनेशन-2019 तक के सभी परिणामों में आईपीएस के 150 पदों को ही भरा गया था। सिविल सर्विस एग्जामिनेशन-2008 में आईपीएस के 130 पद रखे गए थे।
इससे पहले आईपीएस का आंकड़ा और भी अधिक कम रहा था। 2007 में आईपीएस के 103 पद ही भरे जा सके थे। 2006 में 103 और 2005 में भी इतने ही पदों को मंजूरी प्रदान की गई थी। एक जनवरी 2025 के अनुसार, देश में आईपीएस में 5,099 स्वीकृत पदों के मुकाबले 4,594 अधिकारी कार्यरत थे। यानी आईपीएस के 505 पद खाली थे।
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बता दें कि सिविल सर्विस एग्जामिनेशन-2024 के रिजल्ट में कुल 1009 आवेदकों को विभिन्न पदों पर भर्ती किया गया था। आईपीएस के पदों पर कैंची चलती हुई दिखाई दी थी। आईपीएस के लिए 147 उम्मीदवारों का चयन किया गया। यूपीएससी के 2023 के परिणाम के जरिए आईपीएस के 200 पद भरे गए थे। तब आईपीएस अफसरों के लगभग 586 पद खाली थे। आईपीएस के कुल 5,055 स्वीकृत पदों के मुकाबले 4,469 अधिकारी ही तैनात थे।
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सिविल सर्विस एग्जामिनेशन-2023 के रिजल्ट में आईपीएस के 200 पदों के लिए उम्मीदवारों का चयन किया गया था। साल 2022 के दौरान भी आईपीएस के लिए 200 पद रखे गए थे। 2021 और 2020 में भी आईपीएस के 200-200 पदों पर भर्ती की गई थी। अगर 2019 की बात करें तो आईपीएस के लिए 150 पद रखे गए थे।
इसके बाद सिविल सर्विस एग्जामिनेशन-2009 से लेकर सिविल सर्विस एग्जामिनेशन-2019 तक के सभी परिणामों में आईपीएस के 150 पदों को ही भरा गया था। सिविल सर्विस एग्जामिनेशन-2008 में आईपीएस के 130 पद रखे गए थे।
इससे पहले आईपीएस का आंकड़ा और भी अधिक कम रहा था। 2007 में आईपीएस के 103 पद ही भरे जा सके थे। 2006 में 103 और 2005 में भी इतने ही पदों को मंजूरी प्रदान की गई थी। एक जनवरी 2025 के अनुसार, देश में आईपीएस में 5,099 स्वीकृत पदों के मुकाबले 4,594 अधिकारी कार्यरत थे। यानी आईपीएस के 505 पद खाली थे।
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