फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

सुप्रीम कोर्ट के ये हैं वो 7 ऐतिहासिक फैसले, जो तय करेंगे भारत का भविष्य

Sat, 29 Sep 2018 10:31 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 29 Sep 2018 10:31 AM IST
विज्ञापन
7 landmark verdicts of Supreme Court that will change future of India for better tomorrow

सर्वोच्य न्यायालय ने इस साल कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। बीते एक महीने में ही ऐसे चार बड़े फैसले लिए गए जिनसे देश के नागरिकों को राहत मिली है। इन सभी फैसलों ने न केवल न्याय को सुनिश्चित किया है बल्कि उन मुद्दों पर भी फैसला सुनाया है जिसे समाज का बड़ा तबका मानने और स्वीकार करने से इंकार करता रहा है। देश में आने वाले सालों में ये फैसले एक बेहतर बदलाव लाने के लिए काफी महत्वपूर्ण भी साबित होंगे। चलिए बताते हैं आपको उन सात बड़े और ऐतिहासिक फैसलों के बारे में-

loader

पहला फैसला- धारा 377 को अपराध की श्रेणी से बाहर करना

7 landmark verdicts of Supreme Court that will change future of India for better tomorrow
सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने 6 सितंबर को समलैंगिकता पर बने कानून धारा 377 पर बड़ा फैसला लिया और इसे अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया। यानि सहमति से दो वयस्कों के बीच बने समलैंगिक यौन संबंध को एक मत से अपराध के दायरे से बाहर किया गया। कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के एक हिस्से को, जो सहमति से अप्राकृतिक यौन संबंध को अपराध बताता है, तर्कहीन, बचाव नहीं करने वाला और मनमाना करार दिया। कोर्ट ने धारा 377 को आंशिक रूप से निरस्त कर दिया क्योंकि इससे समानता के अधिकार का उल्लंघन होता है।

एलजीबीटीक्यू समुदाय को प्यार करने की स्वतंत्रता दिलाने के लिए कार्यकर्ताओं ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी। पांच जजों की बेंच ने अंग्रेजों के समय में  बनाए गए इस 157 साल पुराने कानून को खत्म कर दिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन

दूसरा फैसला- आधार की वैधता

7 landmark verdicts of Supreme Court that will change future of India for better tomorrow
कुछ ही दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड की कानूनी संवैधानिकता को वैध करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने बहुत सारी सेवाओं के लिए इसका प्रयोग बरकरार रखा है। हालांकि कोर्ट ने कई सेवाओं में आधार नंबर का प्रयोग करना अवैध करार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि राशन, पैन कार्ड, आयकर रिटर्न, वृद्धावस्था पेंशन, दिव्यांग पेंशन, नेत्रहीन पेंशन के लिए आधार कार्ड की आवश्यकता होगी। साथ ही कोर्ट ने कहा कि इससे लोगों के आम जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। आधार कार्ड अब स्कूल में दाखिले, सीबीएसई परीक्षा, बैंक खाता, मोबाइल सिम खरीदने, जेईई, कैट और नेट जैसी परीक्षाओं के लिए जरूरी नहीं होगा। साथ ही कोर्ट ने कहा कि कोई भी बैंक अपने ग्राहकों को आधार नंबर अकाउंट से लिंक कराने के बारे में नहीं कह सकता।

तीसरा फैसला- व्यभिचार अब अपराध नहीं

7 landmark verdicts of Supreme Court that will change future of India for better tomorrow
ब्रिटिश काल में करीब 158 साल पहला बना व्यभिचार कानून यानि आईपीसी की धारा 497 को भी सुप्रीम कोर्ट ने अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 27 सितंबर को अपने फैसले में व्यभिचार से संबंधित दंडात्मक प्रावधान को असंवैधानिक घोषित करते हुए कहा कि यह स्पष्ट रूप से मनमाना है और महिला की वैयक्तिकता को ठेस पहुंचाता है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से व्यभिचार से संबंधित 158 साल पुरानी भारतीय दंड संहिता को असंवैधानिक करार देते हुए इस दंडात्मक प्रावधान को निरस्त कर दिया। इस कानून के तहत केवल पुरुषों को ही दोषी माना जाता रहा है जिससे समानता के अधिकार का उल्लंघन होता है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि पति की सहमति से संबंध बनाना अपराध क्यों नहीं ?

पीठ ने इस प्रावधान पर भी आश्चर्य जताया था कि यदि पति की सहमति से महिला किसी गैर मर्द के साथ संबंध बनाती है तो वह अपराध नहीं है? पीठ ने इस प्रावधान को मनमाना और भेदभावपूर्ण बताया। यह प्रावधान शादीशुदा महिला को पति की जागीर मानता है क्योंकि पत्नी का गैर मर्द के साथ संबंध उसके पति की इच्छा पर निर्भर है।
विज्ञापन

चौथा फैसला- तीन तलाक अवैध घोषित

7 landmark verdicts of Supreme Court that will change future of India for better tomorrow
सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर फैसला सुनाते हुए कहा कि मुस्लिम महिलाओं को उनके पतियों द्वारा एक ही बार में तीन बार तलाक कहकर तलाक दे देना गैरकानूनी है। बीते साल अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला सुनाया। करीब तीन दशकों से अटके इस मुद्दे पर कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक कहा गया। सरकार हाल की में तीन तलाक विधेयक भी लेकर आई है जिसमें केंद्रीय कैबिनेट ने एक बार में तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने के अध्यादेश को मंजूरी दी थी। जिस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी मुहर लगा दी है। अब सरकार को 6 महीने में इस बिल को पास कराना होगा।
विज्ञापन
अगली फोटो गैलरी देखें

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

Followed