AI Summit: हर पल आपके साथ रहेगा एआई डॉक्टर, गरीबों को मिलेगी सस्ती-सुलभ स्वास्थ्य सेवा
कृत्रिम बुद्धिमत्ता स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाएगी। इससे गरीब देशों में सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं संभव होंगी, जबकि विकसित देशों में हर व्यक्ति के पास 24 घंटे निगरानी करने वाला डिजिटल डॉक्टर होगा, जो आपात स्थिति में प्राथमिक सहायता और अस्पताल पहुंचाने में मदद करेगा।
विस्तार
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) दुनिया के सभी प्रमुख क्षेत्रों के कामकाज में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। यह बदलाव स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी आएगा और इसका दुनिया भर के लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। एआई से गरीब देशों के नागरिकों को सस्ता और सुलभ स्वास्थ्य सेवा देना संभव होगा तो आर्थिक तौर पर बेहतर स्थिति के देशों के हर नागरिक के पास चौबीसों घंटे उनका अपना डॉक्टर होगा जो हर पल उनके स्वास्थ्य पर न केवल निगरानी रखेगा, बल्कि आपातकालीन सेवा में प्राथमिक उपचार करने, नजदीकी अस्पतालों तक पहुंचाने और पीड़ित के संबंधियों को सूचना देने तक के काम में सहायता करेगा।
हर पल कैसे साथ रहेगा एआई डॉक्टर
इस समय किसी भी स्मार्टफोन में एआई सहायक की सहायता से चिकित्सीय सलाह ली जा सकती है। इसमें कुछ लक्षण होने पर संभावित खतरे के बारे में जानकारी पाई जा सकती है। किसी दवा के बारे में जानकारी न होने पर उसके विषय, एजेंट्स और उसके उपयोग के बारे में पूरी जानकारी पाई जा सकती है। मरीजों को कई बार इस बात की शिकायत रहती है कि बीमार होने पर अस्पताल या डॉक्टर ने उन्हें गलत टेस्ट करने के लिए कहा जिससे उनका इलाज खर्च बढ़ा। लेकिन एआई अब यह बताने में सक्षम है कि कोई टेस्ट किसी बीमारी के इलाज से संबंधित है, या नहीं। अभी चिकित्सा के क्षेत्र में एआई का यह शुरुआती उपयोग है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि एआई की चिकित्सा क्षेत्र में दक्षता बढ़ने से इसका उपयोग हार्ट अटैक जैसी परिस्थितियों में पहले से अलर्ट भेजने तक के लिए किया जा सकेगा।
डॉक्टरों की गलती कम करने में करेगा सहायता
इस समय इलाज के दौरान डॉक्टरों से हुई चिकित्सकीय लापरवाही के कारण अनेक मरीजों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। इसके कारण मरीजों के परिवार पर आर्थिक भार और संकट बढ़ता है। लेकिन एआई और रोबोटिक सर्जरी के आने से डॉक्टरों की गलतियां कम की जा सकेंगी और इससे मरीजों को बेहतर इलाज देने में सहायता मिलेगी।
व्यक्ति आधारित इलाज
हर व्यक्ति का शरीर एक ही दवा पर एक जैसा परिणाम नहीं देता। किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति का शरीर किसी दवा को लेने पर सकारात्मक परिणाम दे सकता है तो ठीक उसी बीमारी से पीड़ित किसी दूसरे व्यक्ति का शरीर उस दवा पर बेअसर साबित हो सकता है। यही कारण है कि डॉक्टरों को मरीजों को चेक करते हुए बार-बार दवाओं में बदलाव करना पड़ता है। लेकिन एआई किसी व्यक्ति के शरीर विज्ञान का सही विश्लेषण कर उसके लिए सही दवा बताने में डॉक्टरों की सहायता कर सकता है। इससे किसी बीमारी से ठीक होने में लगने वाला समय कम किया जा सकता है।
आनुवांशिक बीमारियों को ठीक करने में मिलेगी सहायता
अनेक ऐसी बीमारियां होती हैं जो किसी व्यक्ति को उनके माता-पिता से आनुवांशिक तौर पर प्राप्त होती हैं। सामान्य तौर पर ऐसी बीमारियों का उपचार कर पाना संभव नहीं होता। लेकिन डीएनए आधारित इलाज करके ऐसे रोगियों को ठीक किया जा सकता है। साथ ही बच्चे के जन्म के समय ही उसके डीएनए का सही विश्लेषण कर उसे भविष्य में होने वाली बीमारियों से बचाया जा सकता है।
दूर-दराज इलाकों में मिलेगी स्वास्थ्य सुविधा
इस समय अफ्रीकी गरीब देशों में लोगों को इलाज दे पाना बहुत मुश्किल हो रहा है। इसी तरह भारत के दुर्गम और पहाड़ी इलाकों तक चिकित्सा सुविधा पहुंचा पाना असंभव जैसा कार्य हो गया है। लेकिन एआई इस असंभव कार्य को भी आसानी से कर सकता है। इस समय टेलीमेडिसिन से दूर-दराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवा दी जा रही है। लेकिन एआई इसे और ज्यादा आसान और प्रभावी बना सकता है। एआई तकनीक से लैस रोबोटिक डॉक्टर-सर्जन सुदूर इलाकों में भेजकर लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है।
रिसर्च में लगेगा कम समय
इस समय किसी बीमारी का इलाज खोजने में सबसे अधिक समय लगता है। किसी बीमारी के बारे में प्राथमिक स्तर की इलाज प्रक्रिया सुनिश्चित करने के बाद उनका मरीजों पर परीक्षण किया जाता है। यह परीक्षण तीन स्तरों पर होता है। इसमें पहले चरण में छः महीने से लेकर एक-दो वर्ष तक का समय लगता है, वहीं मरीजों पर इसका लंबे समय में असर देखने के लिए बीसों वर्ष तक का आंकड़ा जुटाना पड़ता है। एआई के आने से यह काम साल-दो साल में पूरा किया जा सकता है क्योंकि एआई एक साथ लाखों मरीजों का आंकड़ा जुटाने, उनका विश्लेषण कर गुणदोष के आधार पर निष्कर्ष निकालने में सक्षम है।
'चिकित्सा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव की उम्मीद'
एक वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ममता त्यागी ने अमर उजाला से कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोट के उपयोग से चिकित्सा के क्षेत्र में बड़े क्रांतिकारी परिवर्तन होने की संभावना है। अभी अनेक मरीज आपातकालीन परिस्थिति में अस्पताल या डॉक्टर तक पहुंचने से पहले ही अपना दम तोड़ देते हैं, लेकिन एआई और रोबोटिक सर्जरी का इस्तेमाल बढ़ने से लोगों की जान बचाने में सहायता मिलेगी।
डॉ. ममता त्यागी ने कहा कि अब तक गंभीर बीमारियों के जटिल ऑपरेशन के लिए विशेष चिकित्सकों को विदेश से बुलाने की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन एआई और रोबोटिक सर्जरी अब ऐसी सुविधा देने जा रहे हैं कि भारत में बैठकर कोई डॉक्टर अमेरिका या अफ्रीकी देशों में लोगों का इलाज या ऑपरेशन कर सकेगा। इसी तरह देश के दूर-दराज क्षेत्रों में भी मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना बड़ी चुनौती होता है। लेकिन तकनीक अब इस समस्या को हमेशा के लिए समाप्त करने जा रही है।