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एआईएडीएमके में रार: 'पलानीस्वामी और अन्य विधायकों को अयोग्य घोषित करें', षणमुगम-वेलुमणि गुट की मांग
पीटीआई, मैसूर (कर्नाटक)।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 14 May 2026 02:58 PM IST
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सार
एआईएडीएमके में षणमुगम-वेलुमणि गुट और पलानीस्वामी गुट के बीच टकराव बढ़ता दिख रहा है। षणमुगम-वेलुमणि गुट ने दावा कि उनके पास विधायकों का बहुमत है। उन्होंने पलानीस्वामी गुट पर विश्वास मत के दौरान पार्टी के मतदान निर्देश का पालन न करने का आरोप लगाया है। पढ़िए रिपोर्ट-
एआईएडीएमके के बागी नेता सी वी षणमुगम
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेताओं सीवी षणमुगम और एसपी वेलुमणि के नेतृत्व वाले गुट ने गुरुवार को दावा किया कि पार्टी के ज्यादातर विधायक उनके साथ हैं। उन्होंने पार्टी प्रमुख ईके पलानीस्वामी और उनके समर्थक विधायकों पर टीवीके सरकार के विश्वास मत के दौरान पार्टी के निर्देश का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की।
इस गुट के व्हिप सी विजयभास्कर ने पत्रकारों से कहा, विधानसभा दल का फैसला बहुमत के आधार पर होता है और षणमुगम-वेलुमणि गुट के पास बहुमत है। उन्होंने कहा कि बुधवार को सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार के विश्वास मत के समर्थन में वोट देने का निर्देश सभी एआईएडीएमके विधायकों को व्हाट्सएप और ई-मेल के जरिये भेजा गया था।
उन्होंने कहा, 47 विधायकों में से 25 ने निर्देश का पालन किया। वहीं, 22 विधायकों ने मेरे मतदान निर्देश का पालन नहीं किया और उसके खिलाफ गए। इनमें पलानीस्वामी भी शामिल हैं। इसलिए हमने आज विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर दलबदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की है।
उन्होंने कहा, वेलुमणि के साथ ज्यादातर विधायकों ने मतदान निर्देश का पालन किया। इसलिए बहुमत ही मान्य है। वेलुमणि ने पुराने उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि जब किसी पार्टी में मतभेद के कारण विभाजन होता है, तब कोई फैसला नहीं लिया जा सकता। न किसी को पार्टी के पद पर नियुक्त किया जा सकता है और न हटाया जा सकता है।
उन्होंने कहा, हमारी मांग साफ है कि पलानीस्वामी पार्टी की हार के कारणों पर चर्चा के लिए बड़ी बैठक बुलाएं। वह पार्टी के महासचिव हैं। उन्होंने पार्टी प्रमुख पर हमला करते हुए कहा कि पार्टी पदाधिकारियों को हटाने और नई नियुक्तियां करने से जुड़े उनके फैसले 'अमान्य' हैं।
पूर्व मंत्री वेलुमणि ने कहा, हमारा उद्देश्य पार्टी को मजबूत करना है। जो लोग पार्टी छोड़कर गए या निकाले गए, उन्हें वापस लाया जाए। एमजीआर (एम.जी. रामचंद्रन) ने पार्टी क्यों शुरू की थी? डीएमके का विरोध करने के लिए। उन्होंने कहा कि पलानीस्वामी की ओर से लोगों को पार्टी के पदों से हटाने के फैसले अमान्य हैं और वे लोग अभी भी अपने पदों पर बने हुए हैं।
टीवीके सरकार के विश्वास मत के दौरान क्रॉस मतदान और विवाद के बाद पलानीस्वामी ने षणमुगम, वेलुमणि और अन्य नेताओं को पार्टी पदों से हटा दिया था। इस बीच, पलानीस्वामी ने आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की।
एआईएडीएमके मुख्यालय के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात
एआईएडीएमके में बढ़ते तनाव के बीच पार्टी मुख्यालय 'पुराची थलैवर एमजीआर मालिगई' के बाहर भारी पुलिस सुरक्षा तैनात किया गया है। माना जा रहा है कि किसी विवाद की आशंका के कारण यह सुरक्षा बढ़ाई गई। 2022 में पलानीस्वामी और तत्कालीन नेता ओ पनीसेल्वम के बीच नेतृत्व को लेकर लड़ाई के दौरान पार्टी मुख्यालय में हिंसा और तोड़फोड़ हुई थी।
ये भी पढ़ें: AIADMK के समर्थन से असहज हुई कांग्रेस: चिदंबरम बोले- TVK को किसी सहारे की जरूरत नहीं, NEET पर केंद्र को घेरा
षणमगुम ने क्या कहा?
षणमुगम ने मीडिया से कहा कि जब तक उनके गुट को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनके समर्थक विधायक और वरिष्ठ नेता पार्टी मुख्यालय नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा, मैं किसी भी हालत में पार्टी कार्यालय नहीं आऊंगा। साथ ही उन्होंने कहा कि दोनों गुटों के बीच किसी तरह का टकराव नहीं होने दिया जाएगा।
पलानीस्वामी ने भी अपने समर्थक विधायकों के साथ अपने घर पर बैठक की, ताकि बागी गुट का जवाब दिया जा सके। बड़ी संख्या में एआईएडीएमके कार्यकर्ता फूलों के गुलदस्ते लेकर पूर्व मुख्यमंत्री के घर पहुंचे और अपना समर्थन जताया। नए नियुक्त पदाधिकारियों ने भी उनसे मुलाकात की।
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उन्होंने कहा, 47 विधायकों में से 25 ने निर्देश का पालन किया। वहीं, 22 विधायकों ने मेरे मतदान निर्देश का पालन नहीं किया और उसके खिलाफ गए। इनमें पलानीस्वामी भी शामिल हैं। इसलिए हमने आज विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर दलबदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की है।
उन्होंने कहा, वेलुमणि के साथ ज्यादातर विधायकों ने मतदान निर्देश का पालन किया। इसलिए बहुमत ही मान्य है। वेलुमणि ने पुराने उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि जब किसी पार्टी में मतभेद के कारण विभाजन होता है, तब कोई फैसला नहीं लिया जा सकता। न किसी को पार्टी के पद पर नियुक्त किया जा सकता है और न हटाया जा सकता है।
उन्होंने कहा, हमारी मांग साफ है कि पलानीस्वामी पार्टी की हार के कारणों पर चर्चा के लिए बड़ी बैठक बुलाएं। वह पार्टी के महासचिव हैं। उन्होंने पार्टी प्रमुख पर हमला करते हुए कहा कि पार्टी पदाधिकारियों को हटाने और नई नियुक्तियां करने से जुड़े उनके फैसले 'अमान्य' हैं।
पूर्व मंत्री वेलुमणि ने कहा, हमारा उद्देश्य पार्टी को मजबूत करना है। जो लोग पार्टी छोड़कर गए या निकाले गए, उन्हें वापस लाया जाए। एमजीआर (एम.जी. रामचंद्रन) ने पार्टी क्यों शुरू की थी? डीएमके का विरोध करने के लिए। उन्होंने कहा कि पलानीस्वामी की ओर से लोगों को पार्टी के पदों से हटाने के फैसले अमान्य हैं और वे लोग अभी भी अपने पदों पर बने हुए हैं।
टीवीके सरकार के विश्वास मत के दौरान क्रॉस मतदान और विवाद के बाद पलानीस्वामी ने षणमुगम, वेलुमणि और अन्य नेताओं को पार्टी पदों से हटा दिया था। इस बीच, पलानीस्वामी ने आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की।
एआईएडीएमके मुख्यालय के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात
एआईएडीएमके में बढ़ते तनाव के बीच पार्टी मुख्यालय 'पुराची थलैवर एमजीआर मालिगई' के बाहर भारी पुलिस सुरक्षा तैनात किया गया है। माना जा रहा है कि किसी विवाद की आशंका के कारण यह सुरक्षा बढ़ाई गई। 2022 में पलानीस्वामी और तत्कालीन नेता ओ पनीसेल्वम के बीच नेतृत्व को लेकर लड़ाई के दौरान पार्टी मुख्यालय में हिंसा और तोड़फोड़ हुई थी।
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षणमगुम ने क्या कहा?
षणमुगम ने मीडिया से कहा कि जब तक उनके गुट को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनके समर्थक विधायक और वरिष्ठ नेता पार्टी मुख्यालय नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा, मैं किसी भी हालत में पार्टी कार्यालय नहीं आऊंगा। साथ ही उन्होंने कहा कि दोनों गुटों के बीच किसी तरह का टकराव नहीं होने दिया जाएगा।
पलानीस्वामी ने भी अपने समर्थक विधायकों के साथ अपने घर पर बैठक की, ताकि बागी गुट का जवाब दिया जा सके। बड़ी संख्या में एआईएडीएमके कार्यकर्ता फूलों के गुलदस्ते लेकर पूर्व मुख्यमंत्री के घर पहुंचे और अपना समर्थन जताया। नए नियुक्त पदाधिकारियों ने भी उनसे मुलाकात की।
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