Maharashtra: आरक्षण रद्द करने के फैसले पर बोले AIMIM नेता- सरकार चाहती है कि मुसलामान आईएएस और आईपीएस ना बनें
एआईएमआईएम नेता ने बुधवार को महाराष्ट्र सरकार के एक फैसले पर कहा कि सरकार नहीं चाहती कि मुसलमानों समुदाय के लोग आईएएस और आईपीएस बने।
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एआईएमआईएम नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने बुधवार को भाजपा के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार के एक फैसले की आलोचना की। दरअसल, महाराष्टमुसलमानों के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण रद्द करने के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं को आईएएस और आईपीएस अधिकारी बनने देना नहीं चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि वे मुस्लिम युवाओं से केवल ऑटो रिक्शा चलाने, कार धोने और इस तरह के छोटे-मोटे काम करवाने की उम्मीद रखते हैं।
सरकार ने पांच प्रतिशत आरक्षण रद्द किया
देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने नौकरियों और शिक्षा में मुस्लिम समुदाय के सदस्यों के लिए निर्धारित पांच प्रतिशत आरक्षण को रद्द कर दिया है। मंगलवार को इस संबंध में एक सरकारी संकल्प (जीआर) जारी किया गया। क्योंकि पांच प्रतिशत आरक्षण से संबंधित पिछला अध्यादेश समाप्त हो चुका है और उस निर्णय पर अदालत द्वारा अंतरिम रोक लगाई गई है। पिछली कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने मराठों को 16 प्रतिशत और मुसलमानों को पांच प्रतिशत कोटा देने के लिए एक अध्यादेश जारी किया था।
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सरकार नहीं चाहती कि वे आईएसएस बने
छत्रपति संभाजीनगर में पत्रकारों से सरकार के इस फैसले पर बात करते हुए जलील ने कहा, "सत्ताधारी दल के नेताओं की मानसिकता अभी भी मुस्लिम समुदाय को उस स्तर पर रखने की है जहां उसके सदस्य कार धोते हैं, पकौड़े तलते हैं और ऑटो रिक्शा चलाते हैं। दलित समुदाय के प्रति भी उनका यही रवैया है। वे नहीं चाहते कि मुस्लिम समुदाय के युवा आईएएस और आईपीएस अधिकारी बनें।" हालांकि, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रदेश अध्यक्ष ने आगे कहा कि (मुस्लिम) समुदाय अब चतुर हो गया है और जानता है कि क्या करना है।
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जकात की राशि को शिक्षा पर खर्च करें
उन्होंने मुस्लिम समुदाय से यह भी अपील की कि वे अपनी जकात (वार्षिक दान) की राशि धार्मिक स्थलों के निर्माण के बजाय शिक्षा पर खर्च करें। उन्होंने कहा, “नेतृत्व को अपनी मानसिकता बदलनी चाहिए क्योंकि आरक्षण न मिलने पर भी हम प्रतिस्पर्धा करेंगे और समुदाय अपने बच्चों को शिक्षित करना जानता है। रमजान नजदीक है, इसलिए मुस्लिम समुदाय को जकात की राशि धार्मिक स्थलों के निर्माण के बजाय शिक्षा पर खर्च करनी चाहिए।”