Kargil: कारगिल में फाइटर जेट को लेकर ठनी थी एयरफोर्स चीफ और थलसेना प्रमुख में, जानें जीत के बाद क्या हुआ
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विस्तार
कारगिल की लड़ाई के दौरान भारतीय वायु सेना की भूमिका कैसी रही, क्या वायुसेना का सीमित इस्तेमाल हुआ, क्या उसे भेजने में देरी हुई, एयरफोर्स भेजने का निर्णय ठीक था या गलत, लोगों के दिमाग में ऐसे दर्जनों सवाल घूम रहे थे। 24 मई 1999 को राजनीतिक नेतृत्व की स्वीकृति मिलने के बाद वायुसेना कारगिल पहुंच गई। प्रारंभ में ही एमआई-35 हेलिकॉप्टर मौसम खराब होने के कारण उड़ नहीं सका। दो दिन बाद एमआई-17 गिर गया। इसके बाद दो मिग मार गिराए गए। चिंता होने लगी कि वायुसेना को कारगिल भेजना कहीं गलत निर्णय तो नहीं था। हालांकि बाद में वायुसेना ने जबरदस्त बमबारी की तो पाकिस्तान की सेना को खदेड़ दिया गया। वायुसेना अध्यक्ष अनिल यशवंत टिपनिस और थल सेना प्रमुख जन. वीपी मलिक के बीच सहमति न बनने की खबरें आईं। कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक में भी ये दोनों चीफ एयरफोर्स को कारगिल भेजने के मुद्दे पर अलग विचार लेकर चल रहे थे। लड़ाई जीतने के बाद, इन दोनों प्रमुखों ने एक दूसरे के साथ जो पत्राचार किया, उसने भारत का दिल जीत लिया।
वायुसेना प्रमुख टिपनिस ने क्या कहा
कारगिल की लड़ाई जीतने के बाद वायुसेना प्रमुख अनिल यशवंत टिपनिस ने 7 जुलाई 1999 को थलसेना प्रमुख जन. वीपी मलिक को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने मलिक को 'माय डियर चीफ' कह कर संबोधित किया। पूरा देश कारगिल में हमारे आर्मी अफसरों और जवानों की बहादुरी, तप और उनकी एकचित्त भक्ति का गवाह है। भारतीय वायुसेना के समस्त अधिकारियों और जवानों की तरफ से हमारी सेना की अदम्य भावना की सराहना करते हैं। हमें इस बात की खुशी है कि हम भी इस संयुक्त प्रयास में अपना योगदान देने के काबिल रहे। हम भारतीय सेना के उन बहादुरों को सेल्यूट करते हैं, जिन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए आत्म त्याग का चमकता हुआ उदाहरण पेश किया है। तत्कालीन सेनाध्यक्ष जन. वीपी मलिक ने अपनी किताब 'फ्रॉम सरप्राइज टू विक्टरी' में पत्राचार का हवाला दिया है।

थल सेना प्रमुख वीपी मलिक ने दिया ये जवाब
लड़ाई के दौरान एयरफोर्स प्रमुख जन. वीपी मलिक ने साफ तौर से कह दिया था कि कारगिल व लद्दाख में लड़ रही भारतीय सेना के लिए वायुसेना की मदद पहुंचना जरूरी है। मैं इसके लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) के सामने आपका यानी अनिल यशवंत टिपनिस का विरोध करूंगा। यह बात उन्होंने तब कही थी, जब वायुसेना अध्यक्ष अनिल यशवंत टिपनिस, इस पहल को कोई खास तव्वजो नहीं दे रहे थे। दूसरी ओर, तत्कालीन वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ चंद्रशेखर ने कारगिल में वायुसेना भेजने की पैरवी की थी। हालांकि बाद में राजनीतिक नेतृत्व ने एयरफोर्स को कारगिल में भेजने के लिए अपनी मंजूरी दे दी थी। कारगिल की लड़ाई के बाद वीपी मलिक ने एयर चीफ टिपनिस को पत्र लिखा। मलिक ने लिखा, 'डियर टिप्पी', कारगिल में आर्मी की भूमिका की सराहना के लिए आपका पत्र मिला है। जैसा कि आप जानते हैं, यह सफलता हमारे संयुक्त प्रयासों का नतीजा है। कारगिल विजय में पूर्णत: तालमेल के साथ एयरफोर्स की बराबर की बहादुरी और प्रतिबद्धता देखने को मिली है। मैं आर्मी के सभी रैंकों की तरफ से आपका आभार जताता हूं। कारगिल विजय में एयरफोर्स ने एक अहम हिस्से की भूमिका निभाई है।