पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
फ्री ई-पेपर
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Alzheimer Disease can now be detected via blood test; specific RNA marker linked to brain cells identified

Alzheimer: अब खून की जांच से पकड़ में आ सकता है अल्जाइमर, दिमाग की कोशिकाओं से जुड़े खास RNA मार्कर की पहचान

Wed, 01 Jul 2026 09:04 AM IST
Himanshu Mishra हिमांशु मिश्रा
Updated Wed, 01 Jul 2026 09:04 AM IST
सार

5.5 करोड़ से अधिक लोग इस बीमारी से ग्रसित दुनिया में
महंगे ब्रेन स्कैन और स्पाइनल टेस्ट की जरूरत हो सकती है कम
समय के साथ मरीज रोजमर्रा के सामान्य काम भी नहीं कर पाता
धीरे-धीरे याददाश्त कमजोर हो जाती है।

विज्ञापन
Alzheimer Disease can now be detected via blood test; specific RNA marker linked to brain cells identified
अल्जाइमर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

भूलने की अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी की पहचान अब सिर्फ एक साधारण ब्लड टेस्ट से शुरुआती चरण में हो सकेगी। वैज्ञानिकों ने ऐसी नई तकनीक विकसित की है, जो खून में मौजूद दिमाग से जुड़े खास आरएनए बायोमार्कर की पहचान कर बीमारी का पता लगा सकती है।
विज्ञापन


   अगर, आगे के बड़े क्लीनिकल परीक्षण सफल रहे तो भविष्य में मरीजों को महंगे ब्रेन स्कैन या रीढ़ की हड्डी से द्रव (स्पाइनल टैप/लंबर पंचर) निकालने जैसी दर्दनाक जांच की जरूरत काफी कम हो सकती है। यह रिसर्च रिपोर्ट नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में प्रकाशित हुई है। बता दें, अल्जाइमर डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) का सबसे आम प्रकार है। इसमें धीरे-धीरे याददाश्त कमजोर होने लगती है। सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है। समय के साथ मरीज रोजमर्रा के सामान्य काम भी नहीं कर पाता। दुनिया में 5.5 करोड़ से अधिक लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं।
विज्ञापन


   अनुमान है कि 2050 तक यह संख्या 15 करोड़ से अधिक हो सकती है। बहरहाल, वैज्ञानिकों ने खून में मौजूद बेहद छोटे कणों का अध्ययन किया। ये कण शरीर की कोशिकाओं से निकलते और दिमाग से जुड़ी जानकारी भी खून तक पहुंचा सकते हैं। शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने एक नए प्रकार के सूक्ष्म कण की पहचान की, जिसे सीकमर नाम दिया गया। यह कण दिमाग की कोशिकाओं से निकलने वाले आरएनए को अपने साथ लेकर खून में पहुंचाता है। इन्हीं आरएनए में ऐसे विशेष बदलाव मिले, जो अल्जाइमर से जुड़े हुए थे। यानी भविष्य में सिर्फ ब्लड सैंपल लेकर बीमारी के शुरुआती संकेतों की पहचान संभव हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मौजूदा जांच से कैसे अलग?
आमतौर पर अल्जाइमर की पुष्टि के लिए पीईटी स्कैन या अन्य महंगे ब्रेन स्कैन या फिर लंबर पंचर के जरिये स्पाइनल फ्लूड की जांच करनी पड़ती है। पिछले कुछ वर्षों में कुछ ब्लड टेस्ट भी आए हैं, लेकिन वे मुख्य रूप से एमिलॉयड-बीटा और टाऊ प्रोटीन जैसे प्रोटीन की जांच करते हैं। नई रिसर्च का दावा है कि आरएनए में होने वाले बदलाव प्रोटीन बनने से पहले ही दिखाई दे सकते हैं। मतलब बीमारी का पता और भी शुरुआती अवस्था में लगाया जा सकता है, जब दिमाग को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा होता।


क्या कहते हैं शोधकर्ता?
शोधकर्ताओं के अनुसार उनका अगला लक्ष्य ऐसा कम लागत वाला पीसीआर आधारित ब्लड टेस्ट विकसित करना है, जिससे सामान्य रक्त जांच के जरिये आरएनए में होने वाले बदलाव आसानी से पहचाने जा सकें। यह सफल हुआ तो अल्जाइमर की जांच पहले की तुलना में कहीं अधिक सस्ती, आसान और सुलभ हो सकती है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed