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Andhra Pradesh: कौशल विकास घोटाला केस में चंद्रबाबू नायडू को मिली जमानत, अभी अंतरिम जमानत पर हैं बाहर
Mon, 20 Nov 2023 03:16 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, विशाखापत्तनम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, विशाखापत्तनम
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 20 Nov 2023 03:16 PM IST
सार
चंद्रबाबू नायडू को 371 करोड़ रुपये के कौशल विकास घोटाले में नौ सितंबर को गिरफ्तार किया गया था।
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आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू (फाइल फोटो)
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और तेलुगुदेशम पार्टी के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू को कौशल विकास घोटाला केस में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट की तरफ से नियमित जमानत दे दी गई है। इससे पहले उच्च न्यायालय ने उन्हें 24 नवंबर तक के लिए अंतरिम जमानत दी थी। तब उनके वकील ने आंखों के ऑपरेशन का हवाला देकर नायडू के लिए अंतरिम जमानत देने की अपील की थी।
अंतरिम जमानत में कोर्ट ने लगाई थीं कई शर्तें
कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत देने के दौरान निर्देश दिए थे कि अस्पताल जाने के अलावा नायडू किसी भी अन्य तरह के कार्यक्रम में न जाएं। उन्हें खास तौर पर मीडिया और राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहने के लिए कहा था।
गौरतलब है कि चंद्रबाबू नायडू को 371 करोड़ रुपये के कौशल विकास घोटाले में नौ सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। राज्य के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने उन्हें नौ सितंबर को सुबह करीब छह बजे ज्ञानपुरम में बस में सोते वक्त गिरफ्तार किया था। सीआईडी का दावा है कि नायडू के ही नेतृत्व में मुखौटा कंपनियों के जरिये सरकारी धन को निजी संस्थाओं में हस्तांतरित करने की साजिश रची गई।
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भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने वर्ष 2018 में इस घोटाले की शिकायत की थी। मौजूदा सरकार की जांच से पहले जीएसटी इंटेलिजेंस विंग और आयकर विभाग भी घोटाले की जांच कर रहे थे।
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अंतरिम जमानत में कोर्ट ने लगाई थीं कई शर्तें
कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत देने के दौरान निर्देश दिए थे कि अस्पताल जाने के अलावा नायडू किसी भी अन्य तरह के कार्यक्रम में न जाएं। उन्हें खास तौर पर मीडिया और राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहने के लिए कहा था।
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गौरतलब है कि चंद्रबाबू नायडू को 371 करोड़ रुपये के कौशल विकास घोटाले में नौ सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। राज्य के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने उन्हें नौ सितंबर को सुबह करीब छह बजे ज्ञानपुरम में बस में सोते वक्त गिरफ्तार किया था। सीआईडी का दावा है कि नायडू के ही नेतृत्व में मुखौटा कंपनियों के जरिये सरकारी धन को निजी संस्थाओं में हस्तांतरित करने की साजिश रची गई।
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भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने वर्ष 2018 में इस घोटाले की शिकायत की थी। मौजूदा सरकार की जांच से पहले जीएसटी इंटेलिजेंस विंग और आयकर विभाग भी घोटाले की जांच कर रहे थे।