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Andhra Fuel Crisis: सीएम ने पेट्रोल-डीजल की किल्लत पर रिपोर्ट मांगी, मंत्री बोले- कालाबाजारी पर होगी कार्रवाई

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरावती Published by: Shubham Kumar Updated Mon, 27 Apr 2026 09:17 AM IST
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सार

आंध्र प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की किल्लत ने हालात बिगाड़ दिए हैं। 400 से ज्यादा पंप बंद होने से शहरों में लंबी कतारें लग गईं। असल वजह सप्लाई नहीं, बल्कि अफवाहों के कारण हुई पैनिक बाइंग है, जिसे ईरान-अमेरिका तनाव से जोड़ा जा रहा है। हालांकि अब इस मामले में सीएम ने तुरंत एक्शन लेते हुए रिपोर्ट तलब की है।

Andhra Pradesh Petrol-Diesel Crisis CM Naidu Seeks Report News In Hindi
आंध्र प्रदेश में पेट्रोल-डीजल संकट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

आंध्र प्रदेश में पेट्रोल और डीजल को लेकर अचानक बने हालात ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए सभी जिला कलेक्टरों को तुरंत एक्शन प्लान लागू करने के निर्देश दिए हैं। रविवार को मिली रिपोर्ट्स में बताया गया कि राज्य के कई पेट्रोल पंप पेट्रोल और डीजल की कमी के कारण बंद हो गए हैं। यह स्थिति मुख्य रूप से लोगों द्वारा घबराहट में ज्यादा ईंधन खरीदने (पैनिक बाइंग) की वजह से पैदा हुई है।

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मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि इस समस्या को जल्दी सुलझाने के लिए सभी विभाग मिलकर काम करें और किए गए कदमों की रिपोर्ट जल्द सौंपें। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव जी. साई प्रसाद और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक भी की। अधिकारियों ने जानकारी दी कि राज्य में कुल 4,510 पेट्रोल पंप हैं, जिनमें से करीब 421 पंप अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं।

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आम दिनों के मुताबिक अचनाक बढ़ी पेट्रोल की खपत
अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार को 10,345 किलोलीटर पेट्रोल और 14,156 किलोलीटर डीजल की सप्लाई दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कई जगहों पर भारी भीड़ देखने को मिली। आम दिनों में जहां पेट्रोल की रोजाना खपत करीब 6,330 किलोलीटर और डीजल की 9,048 किलोलीटर होती है, वहीं शनिवार को पेट्रोल की बिक्री बढ़कर 8,489 किलोलीटर और डीजल की 10,556 किलोलीटर तक पहुंच गई। अधिकारियों ने बताया कि अचानक बढ़ी मांग के कारण कई पेट्रोल पंपों पर स्टॉक जल्दी खत्म हो गया। इसके अलावा, एक्वा (मत्स्य) क्षेत्र द्वारा ड्रम में बड़े स्तर पर ईंधन खरीदने से भी सप्लाई पर दबाव बढ़ा है।


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मंत्री बोले- राज्य में प्रेट्रोल डीजल की कोई कमी नहीं
हालांकि, राज्य के नागरिक आपूर्ति मंत्री नादेंडला मनोहर ने साफ किया है कि राज्य में पेट्रोल और डीजल की कोई वास्तविक कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ पंप सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों के कारण बंद हुए हैं, लेकिन लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। मंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि जो लोग कालाबाजारी (ब्लैक मार्केटिंग) करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के अनुसार ही ईंधन खरीदें, ताकि स्थिति सामान्य बनी रहे।

लोगों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है, कैसे बढ़ रही परेशानियां?

आंध्र प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की किल्लत की खबरों ने कई शहरों में लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। विजयवाड़ा, गुंटूर, राजमुंद्री, कुरनूल और नेल्लोर जैसे शहरों में हालात ऐसे हो गए कि लोगों को घंटों लाइन में लगकर ईंधन लेना पड़ा। कई पेट्रोल पंपों पर स्टॉक खत्म के बोर्ड लगा दिए गए, जिससे वाहन चालकों और कर्मचारियों के बीच बहस और झड़प की स्थिति भी बन गई। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल तिरुमाला में भी इसका असर देखने को मिला, जहां दो पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म हो गया और परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई। कई लोगों ने बताया कि उन्हें अपनी बाइक में पेट्रोल भरवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा।

अब समझिए क्यों आई यह समस्या?
सूत्रों के मुताबिक, वीकेंड के दौरान सोशल मीडिया पर कई अफवाहें फैलने लगीं कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध बढ़ सकता है, जिससे ईंधन की कमी हो जाएगी। इन खबरों से घबराकर लोगों ने जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल खरीदना शुरू कर दिया। कई जगहों पर हजारों लोग पेट्रोल पंपों के बाहर जमा हो गए, जिससे अचानक मांग बहुत बढ़ गई और सप्लाई पर दबाव पड़ गया। मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि रविवार तक जो पेट्रोल पंप बंद हुए, उनमें से ज्यादातर में ईंधन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था, बल्कि पैनिक बाइंग को रोकने के लिए एहतियात के तौर पर पंप बंद किए गए थे।

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अंतरराष्ट्रीय कारणों की भी बड़ी भूमिका, समझिए कैसे?
इस पूरी स्थिति के पीछे एक बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय हालात भी बताए जा रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी से जारी तनाव के कारण दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। सामान्य स्थिति में दुनिया के करीब 20% तेल का व्यापार इसी रास्ते से होता है। भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, और इसका बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है। ऐसे में इस रास्ते पर असर पड़ने से ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ जाती है।

हालांकि, केंद्र सरकार ने साफ किया है कि देश में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। सरकार वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाने की कोशिश कर रही है और लोगों से अपील कर रही है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराकर खरीदारी न करें, ताकि स्थिति सामान्य बनी रहे।

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