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अनुच्छेद 370: जम्मू कश्मीर में पाबंदियों के खिलाफ याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Thu, 28 Nov 2019 04:26 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के हटाने के बाद संचार और अन्य प्रतिबंधों को लेकर कश्मीर टाइम्स के संपादक अनुराधा भसीन और कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने घाटी में प्रतिबंधों पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
सिब्बल ने इस मामले पर बोलते हुए कहा कि तकनीक का बेजा इस्तेमाल होता है। मेरी भी तस्वीर से छेड़छाड़ की जाती है। इसका यह मतलब नहीं है कि माध्यम पर ही पाबंदी लगा दी जाए। हम तकनीक के युग में है। यह नाभिकीय ऊर्जा की तरह है। इससे हिरोशिमा भी होता है और बिजली भी बनती है। उन्होंने कहा, धारा-144 लगाने के तमाम आदेश अदालत के समक्ष पेश किए जाना चाहिए।
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इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, हमने हलफनामे में बताया है कि धारा-144 अब सिर्फ रात में है और ऐसे 100 आदेश हैं। दरअसल, मंगलवार को सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने घाटी में इंटरनेट पर पाबंदी को सही बताते हुए कहा था कि आतंकवाद बढ़ाने के लिए इंटरनेट सबसे सरल माध्यम है। सोशल मीडिया का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।