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अरुणाचल की आर्थिक नाकेबंदी हटी: चार आरोपियों को 48 घंटे में पकड़ने का TMPK ने दिया अल्टीमेटम, क्या है मामला?
Thu, 13 Aug 2026 10:51 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई,उत्तरी लखीमपुर।
पीटीआई,उत्तरी लखीमपुर।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 13 Aug 2026 10:51 PM IST
सार
नाकेबंदी फिलहाल हट गई है, लेकिन टीएमपीके ने 48 घंटे की समयसीमा तय कर दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या चारों आरोपियों की गिरफ्तारी होती है। अगर मांग पूरी नहीं हुई तो सीमा विवाद को लेकर तनाव फिर बढ़ सकता है।
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टीएमपीके
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
असम के मिंसिंग समुदाय के शीर्ष छात्र संगठन तकम मिसिंग पोरिन केबांग (टीएमपीके) ने गुरुवार रात अरुणाचल प्रदेश की आर्थिक नाकेबंदी फिलहाल हटा दी। संगठन ने 10 अगस्त की गोलीबारी की घटना के चार आरोपियों को 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर असम पुलिस को सौंपने की मांग की है।
टीएमपीके और दूसरे स्थानीय संगठनों ने बुधवार को अरुणाचल प्रदेश की अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी शुरू की थी। इसका विरोध 10 अगस्त की गोलीबारी की घटना को लेकर था। इस घटना में असम के 12 मूल निवासी घायल हुए थे।
क्या बातचीत के बाद हटाई गई नाकेबंदी?
टीएमपीके ने कहा कि उसने असम सरकार और अरुणाचल प्रदेश के कई सामाजिक संगठनों के साथ बातचीत के बाद यह फैसला लिया है। संगठन ने साफ किया कि उसका निशाना पड़ोसी राज्य की आम जनता नहीं है। टीएमपीके के अध्यक्ष तिलक डोले ने कहा कि उनकी मुख्य मांगों पर तत्काल कार्रवाई का भरोसा दिया गया है। आम लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए नाकेबंदी अस्थायी रूप से हटाई गई है।
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गुरुवार दोपहर टीएमपीके ने धेमाजी जिला आयुक्त कार्यालय में असम सरकार के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में शिक्षा मंत्री रणोज पेगू और सीमा संरक्षण एवं विकास मंत्री अतुल बोरा शामिल थे। इसके बाद धेमाजी के लिकाबाली में भी बैठक हुई। इसका आयोजन अरुणाचल प्रदेश के आदिसू और एबीकेवाईडब्ल्यू की पहल पर किया गया था। बैठक में टीएमपीके, गालो वेलफेयर सोसाइटी, जीवाईओ, गालो स्टूडेंट्स यूनियन और एएलएसडीएसयू के प्रतिनिधि शामिल हुए।
यह भी पढ़ें: नालसार के 2026 बैच पर BCI का यू-टर्न: सीजेआई विवाद के बीच कुछ घंटों में हटाई एनरोलमेंट रोक; अब आगे क्या होगा?
चार आरोपियों पर क्या है टीएमपीके की मांग?
टीएमपीके ने गोलीबारी के मामले में चार आरोपियों के नाम बताए हैं। संगठन ने संबंधित अधिकारियों से इन सभी को अगले 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने की मांग की है।
क्या सीमा विवाद के कारण बढ़ा तनाव?
सोमवार को धेमाजी जिले में असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास जमीन पर अतिक्रमण के विवाद को लेकर कथित तौर पर अरुणाचल प्रदेश के उपद्रवियों ने गोलीबारी की थी। इसमें असम के कम से कम 12 लोग घायल हुए थे। इसके बाद टीएमपीके के साथ मिसिंग मिमाग केबांग (एमएमके) और तकम मिसिंग महिला केबांग (टीएमएमके) जैसे स्थानीय सामाजिक संगठनों ने आर्थिक नाकेबंदी का समर्थन किया। संगठनों ने अरुणाचल प्रदेश आने-जाने वाले वाहनों को प्रवेश बिंदुओं पर रोक दिया था। हालांकि, आपातकालीन सेवाओं और स्कूली वाहनों को इससे बाहर रखा गया था।
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टीएमपीके और दूसरे स्थानीय संगठनों ने बुधवार को अरुणाचल प्रदेश की अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी शुरू की थी। इसका विरोध 10 अगस्त की गोलीबारी की घटना को लेकर था। इस घटना में असम के 12 मूल निवासी घायल हुए थे।
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क्या बातचीत के बाद हटाई गई नाकेबंदी?
टीएमपीके ने कहा कि उसने असम सरकार और अरुणाचल प्रदेश के कई सामाजिक संगठनों के साथ बातचीत के बाद यह फैसला लिया है। संगठन ने साफ किया कि उसका निशाना पड़ोसी राज्य की आम जनता नहीं है। टीएमपीके के अध्यक्ष तिलक डोले ने कहा कि उनकी मुख्य मांगों पर तत्काल कार्रवाई का भरोसा दिया गया है। आम लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए नाकेबंदी अस्थायी रूप से हटाई गई है।
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गुरुवार दोपहर टीएमपीके ने धेमाजी जिला आयुक्त कार्यालय में असम सरकार के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में शिक्षा मंत्री रणोज पेगू और सीमा संरक्षण एवं विकास मंत्री अतुल बोरा शामिल थे। इसके बाद धेमाजी के लिकाबाली में भी बैठक हुई। इसका आयोजन अरुणाचल प्रदेश के आदिसू और एबीकेवाईडब्ल्यू की पहल पर किया गया था। बैठक में टीएमपीके, गालो वेलफेयर सोसाइटी, जीवाईओ, गालो स्टूडेंट्स यूनियन और एएलएसडीएसयू के प्रतिनिधि शामिल हुए।
यह भी पढ़ें: नालसार के 2026 बैच पर BCI का यू-टर्न: सीजेआई विवाद के बीच कुछ घंटों में हटाई एनरोलमेंट रोक; अब आगे क्या होगा?
चार आरोपियों पर क्या है टीएमपीके की मांग?
टीएमपीके ने गोलीबारी के मामले में चार आरोपियों के नाम बताए हैं। संगठन ने संबंधित अधिकारियों से इन सभी को अगले 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने की मांग की है।
- चारों आरोपियों को 48 घंटे में गिरफ्तार करने की मांग।
- आरोपियों को असम पुलिस को सौंपने का अल्टीमेटम।
- असम सरकार ने सीमा विवाद स्थायी रूप से सुलझाने के लिए जल्द कदम उठाने का भरोसा दिया।
- दूसरे राज्य से असम आने वाले किसी भी व्यक्ति या समूह को कानून का पालन करना होगा।
- बातचीत के लिए आने वालों को हथियार लाने की अनुमति नहीं होगी।
क्या सीमा विवाद के कारण बढ़ा तनाव?
सोमवार को धेमाजी जिले में असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास जमीन पर अतिक्रमण के विवाद को लेकर कथित तौर पर अरुणाचल प्रदेश के उपद्रवियों ने गोलीबारी की थी। इसमें असम के कम से कम 12 लोग घायल हुए थे। इसके बाद टीएमपीके के साथ मिसिंग मिमाग केबांग (एमएमके) और तकम मिसिंग महिला केबांग (टीएमएमके) जैसे स्थानीय सामाजिक संगठनों ने आर्थिक नाकेबंदी का समर्थन किया। संगठनों ने अरुणाचल प्रदेश आने-जाने वाले वाहनों को प्रवेश बिंदुओं पर रोक दिया था। हालांकि, आपातकालीन सेवाओं और स्कूली वाहनों को इससे बाहर रखा गया था।