सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Asiya Andrabi Profile NIA UAPA Case Delhi Court Life Sentence Jammu and Kashmir Separatists and Terror Links

कौन है आसिया अंद्राबी?: डॉक्टर की बेटी ने आतंकी से शादी को बनाया सपना, चेहरा न ढकने वालों पर कराए एसिड एटैक

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: Kirtivardhan Mishra Updated Tue, 24 Mar 2026 08:37 PM IST
विज्ञापन
सार
दिल्ली की अदालत में एनआईए ने आरोप लगाया कि आसिया ने घृणा फैलाने वाले भाषणों, साजिश और आतंकी गतिविधियों के जरिये देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की कोशिश की। उसने अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा दिया और प्रतिबंधित संगठनों से संपर्क बनाए रखा। इसके बाद कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 
loader
Asiya Andrabi Profile NIA UAPA Case Delhi Court Life Sentence Jammu and Kashmir Separatists and Terror Links
आसिया अंद्राबी को आजीवन कारावास की सजा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार (24 मार्च) को जम्मू-कश्मीर की अलगाववादी चरमपंथी नेता आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने आतंकी संगठन का सदस्य होने, आतंकी साजिश रचने और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने से जुड़े मामलों में जनवरी में ही आसिया को दोषी ठहराया था और सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब कोर्ट ने इस सजा का एलान किया है। 


आसिया अंद्राबी, यह नाम आज शायद लोगों के दिमाग से कुछ हद तक मिट चुका है। लेकिन 1980 से 2000 के दशक तक यह नाम जम्मू-कश्मीर में दहशत का पर्याय था। दरअसल, इस दौरान जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने के लिए कई संगठन बन चुके थे। इसमें से कुछ संगठनों ने तो शांति का झूठा पैगाम फैलाया, लेकिन कुछ संगठन खुले तौर पर चरमपंथ और आतंकी गतिविधि फैलाने में जुटे रहे। ऐसे ही एक संगठन और इसकी गतिविधियों में आसिया अंद्राबी का नाम शामिल था। आसिया उन गिनी-चुनी महिलाओं में थी, जो घाटी में दहशत फैलाने में शामिल रही। 

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर आसिया अंद्राबी कौन है? जम्मू-कश्मीर में तनाव के दिनों में उसकी क्या भूमिका रही? कैसे वह घाटी में दहशत का पर्याय बनती चली गई? इस दहशत का आखिरकार अंत कैसे हुआ? आइये जानते हैं...

कौन है आसिया अंद्राबी, कैसा रहा शुरुआती जीवन

आसिया अंद्राबी का जन्म 1963 में हुआ था। वह श्रीनगर के चिकित्सक सईद शहाबुद्दीन अंद्राबी की सबसे छोटी बेटी है। आसिया की शुरुआती पढ़ाई श्रीनगर के गवर्नमेंट विमेंस कॉलेज से हुई। यहां से उसने गृह विज्ञान में स्नातक की डिग्री पूरी की। इसके बाद वह पोस्ट-ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए दार्जिलिंग जाना चाहती थी। हालांकि, माता-पिता ने आसिया को बाहर जाने की अनुमति नहीं दी। 

इस्लामिक साहित्य ने बनाया कट्टरपंथी

बताया जाता है कि अपने भाई इनायतुल्लाह अंद्राबी, जो कश्मीर विश्वविद्यालय में पढ़ाते थे और जमात-ए-इस्लामी की छात्र विंग के सदस्य थे, की वजह से आसिया काफी कम उम्र में ही इस्लामिक साहित्य के संपर्क में आई। इन साहित्यों को पढ़ने के बाद उसका दृष्टिकोण और दुनिया को देखने का नजरिया पूरी तरह से बदल गया। इस वैचारिक बदलाव के बाद, वह जमात-ए-इस्लामी की महिला विंग में शामिल हो गई। हालांकि, 1985 के आसपास आसिया ने खुद को जमात-ए-इस्लामी से अलग कर लिया और महिलाओं के लिए दुख्तरान-ए-मिल्लत नाम के अपने खुद के संगठन की स्थापना की। इसने कश्मीर में महिलाओं के लिए इस्लामिक वेशभूषा लागू करने जैसे अभियान चलाए, जिसमें मुस्लिम महिलाओं के लिए चेहरा ढंकना और हिंदू-सिख महिलाओं के लिए सिर को ढंकना अनिवार्य कर दिया गया। 

कश्मीर में ऐसे मिली चरमपंथी के तौर पर पहचान

आसिया अंद्राबी की पहचान कश्मीर में उस वक्त तेजी से उभरी, जब घाटी में धार्मिक पहचान को लेकर तनाव शुरू हो चुका था। बताया जाता है कि इस दौरान अपनी कट्टरपंथी सोच और इससे जुड़े अभियानों से आसिया अलगाववादी नेताओं की नजर में आई। इस दौरान आसिया ने जिन बड़े अभियानों को जोर-शोर से चलाया, उनमें मुस्लिम महिलाओं के लिए चेहरा ढकने पर मजबूर करने से लेकर वैलेंटाइन डे का विरोध और कश्मीर में सिनेमा हॉल बंद कराने जैसे अभियान तक शामिल थे। 

इस्लामिक वेशभूषा, नकाब लागू करने का अभियान: आसिया के संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत ने 1991 के आसपास कश्मीर घाटी में महिलाओं के लिए नकाब और सख्त इस्लामिक ड्रेस कोड लागू करने का आक्रामक अभियान चलाया। इसके तहत लड़कियों के स्कूलों को सख्त ड्रेस कोड अपनाने की धमकियां दी गईं। यहां तक कि उनके समूह की सदस्यों ने बिना पर्दा किए बाहर निकलने वाली मुस्लिम महिलाओं के चेहरों पर पेंट तक फेंका। 

सिनेमा, टीवी और अश्लीलता का विरोध: बताया जाता है कि आसिया ने कथित तौर पर मुस्लिम महिलाओं के सिनेमा जाने और टीवी या वीडियो देखने से रोकने का भी अभियान चलाया। मार्च 1987 में उसने अश्लील फिल्में दिखाने वाले सिनेमाघरों के खिलाफ सार्वजनिक प्रदर्शन किए और अश्लीलता प्रदर्शित करने वाले पोस्टरों पर कालिख पोत दी। नतीजतन घाटी में कुछ ही समय में सिनेमा हॉल खत्म हो गए। आसिया के संगठन ने कश्मीर में वैलेंटाइन डे मनाने को गैर-इस्लामिक करार देते हुए इसके खिलाफ कड़ा अभियान चलाया।

निकाह के लिए थी ख्वाहिश- सिर्फ 'मुजाहिद' से ही हो

आसिया अंद्राबी का निकाह वर्ष 1990 में आशिक हुसैन फकतू के साथ हुआ था। आशिक हुसैन फकतू कश्मीर घाटी के शीर्ष और सबसे कुख्यात आतंकवादी कमांडरों में से एक था। उसे डॉ. कासिम या मोहम्मद कासिम के नाम से भी जाना जाता है। घाटी में जब आतंकी घटनाएं बढ़ रही थीं, तब आशिक आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन से जुड़ा था। हालांकि, 1990 के दशक की शुरुआत में वह हिज्बुल से अलग हो गया और उसने जमीयत-उल-मुजाहिदीन नाम का अपना एक अलग आतंकवादी गुट बना लिया।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि आसिया अंद्राबी ने फकतू से निकाह सिर्फ इसलिए किया, क्योंकि उसने यही इच्छा रखी थी कि वह केवल किसी मुजाहिद (इस्लामिक लड़ाके) से ही निकाह करे। इस दौरान फकतू कश्मीर के आतंकी गुटों में अपनी अलग पहचान बना चुका था। 1992 में उसने मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील हृदयनाथ वान्चू की हत्या कर दी थी, जिसके लिए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई। अगस्त 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी सजा को पलटने की एक अपील को भी खारिज कर दिया था।

कैसे घाटी में दहशत का पर्याय बनी अंद्राबी?

आसिया अंद्राबी के अभियानों ने उसे अलगाववादियों के साथ-साथ आतंकी संगठनों और चरमपंथियों के बीच भी पहचान दिलाई। इस मौके को पहचानते हुए आसिया और उसके संगठन ने अपना ध्यान छोटे अभियानों से हटाकर जिहाद जैसे कट्टर इस्लामी अभियानों पर केंद्रित किया। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ अभियान चलाया गया तो इसमें आसिया अंद्राबी ने आक्रामक भूमिका निभाई। 1993 में इन अभियानों में वह किस हद तक शामिल थी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तत्कालीन सरकार ने आसिया को उसके पति और नवजात बच्चे के साथ एक साल के लिए जेल में बंद कर दिया। 

समय के साथ आसिया का तर्क था कि मुस्लिम महिलाओं को भारतीय सेना से अपने सम्मान और घरों की रक्षा करने का अधिकार है। उसने यह भी घोषणा की थी कि अगर कभी जरूरत पड़ी तो घाटी की महिलाएं महिला आत्मघाती हमलावरों का भी समर्थन करेंगी।

1993 में जेल भेजे जाने की घटना सिर्फ शुरुआत थी। आसिया को इसके बाद कई बार जेल भेजा गया। आसिया अंद्राबी लगातार चरमपंथी गतिविधियों से जुड़ी रही। इस दौरान उसने अपने संगठन की पहचान को भी बदला और आतंकी गुटों के साथ काम करना जारी रखा। अगस्त 2001 में आसिया अंद्राबी और उसके संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत ने लश्कर-ए-जब्बार नाम के एक नए हिंसक गुट के साथ मिलकर काम किया। इस दौरान श्रीनगर में लड़कियों के स्कूलों को सख्त इस्लामिक ड्रेस कोड अपनाने की धमकी दी गई और महिलाओं पर एसिड फेंकने के मामले तक सामने आए। बताया जाता है कि अंद्राबी के संगठन ने इस दौरान गैर-मुस्लिम महिलाओं (हिंदू और सिख) के लिए माथे पर बिंदी लगाने और सिर को दुपट्टे से ढकने का फरमान भी जारी किया। 

पाकिस्तान में हाफिज सईद से बना संपर्क

आसिया अंद्राबी का संपर्क पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तयैबा के सरगना हाफिस सईद से भी होने का दावा किया जाता रहा है। अंद्राबी ने कई मौकों पर पाकिस्तान के प्रति अपने प्रेम को खुले तौर पर जाहिर भी किया, जिसके चलते हाफिज सईद के संगठनों की भारत-विरोधी रैलियों में उसके समर्थन में नारेबाजी हुई। आरोप है कि एक मौके पर तो अंद्राबी ने पाकिस्तान में भारत विरोधी रैली को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित भी किया था।

महिला आतंकी गुट बनाने की भी रची साजिश

दावा किया जाता है कि साल 2012 में जब हाफिज सईद के गुट ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के मुजफ्फराबाद में 21 महिला आतंकवादियों का एक विंग दुख्तरान-ए-तैयबा बनाने का प्रयास किया, तो भारतीय खुफिया एजेंसियों ने इसमें आसिया के संगठन की सीधी मिलीभगत होने का संदेह जताया था। इस संगठन का जिम्मा सईद सदाकर हुसैन नाम के एक आतंकी को सौंपा गया था। 

सेना, सरकार और कश्मीरी हिंदुओं के खिलाफ चलाए अभियान

2010 में कश्मीर में हुए भारी विरोध प्रदर्शनों और पत्थरबाजी के दौरान उसने कट्टरपंथी अलगाववादी और पाकिस्तान समर्थक मसर्रत आलम भट के साथ मिलकर घाटी में क्विट जम्मू एंड कश्मीर अभियान का नेतृत्व किया। आसिया ने कश्मीर में खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया। मार्च 2015 में उसने पाकिस्तान दिवस (23 मार्च) के मौके पर श्रीनगर में पाकिस्तानी झंडा फहराया। इसके बाद उसे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया था। उस दौरान आसिया और मसर्रत आलम ने नारे भी लगाए थे, जिनमें कहा गया था- हाफिज सईद का क्या पैगाम, कश्मीर बनेगा पाकिस्तान।

ये भी पढ़ें: Asiya Andrabi: कश्मीरी अलगाववादी आसिया अंद्राबी को यूएपीए मामले में उम्रकैद की सजा, जानें क्या है गुनाह?

बुरहान वानी की मौत के बाद दंगे-पत्थरबाजी में रही शामिल

जुलाई 2016 में हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कश्मीर में बड़े पैमाने पर दंगे और पत्थरबाजी हुई। आसिया अंद्राबी को इन घटनाओं का मुख्य मास्टरमाइंड माना गया। उस पर युवाओं को खुलेआम भड़काने का आरोप लगा। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2017 आते-आते आसिया अंद्राबी के नेतृत्व में उसके संगठन ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाने वाले आतंकियों की खुलेआम तारीफ करनी शुरू कर दी। उस पर नागरिकों को सेना और आतंकियों की मुठभेड़ों के बीच में दखल देने के लिए भड़काने का भी आरोपी बनाया गया। बताया जाता है कि इस नीति के जरिए उसका संगठन घिरे हुए आतंकियों को भागने में मदद करने की कोशिश कर रहा था। इसके अलावा उसने कश्मीरी पुलिसकर्मियों को नौकरी छोड़कर सेना के खिलाफ हथियार उठाने के लिए भी भड़काया।

कैसे कानून के शिकंजे में आई आसिया?

संगठन पर लगा प्रतिबंध: इन देश-विरोधी गतिविधियों के चलते साल 2018 में केंद्र सरकार ने उसके संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया और उस पर प्रतिबंध लगा दिया।

एनआईए ने दर्ज किया मामला: अप्रैल 2018 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आसिया और उसकी सहयोगियों के खिलाफ प्रतिबंधित संगठन का हिस्सा होने, देश के खिलाफ जंग छेड़ने, राजद्रोह और आपराधिक साजिश रचने का मामला दर्ज किया। इसी के साथ जुलाई में आसिया के साथ उसकी दो मुख्य सहयोगियों फहमीदा सोफी और नाहिदा नसरीन को गिरफ्तार कर लिया गया। ये तीनों जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से दर्ज एक अन्य मामले में पहले से जेल में बंद थीं। इस गिरफ्तारी के बाद से उसे लगातार जेल में रखा गया। अब इन्हीं मामलों में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।

अन्य वीडियो
विज्ञापन
विज्ञापन
Trending Videos

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed